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खोजबीन — दो बैलों की कथा; कथा सम्राट– प्रेमचंद; प्रेमचंद का बचपन और बच्चों की कहानियाँ (channel-NCERTOFFICIAL)
उत्तर
पुस्तक ने यहाँ तीन विषय सुझाए हैं और NCERT के आधिकारिक चैनल की ओर संकेत किया है। इन्हें केवल देख लेना पर्याप्त नहीं — देखकर नोट बनाइए। नीचे हर विषय के लिए यह दिया गया है कि क्या खोजना है और क्या लिखकर लाना है।
| विषय | क्या खोजें / देखें | कक्षा में क्या प्रस्तुत करें |
|---|---|---|
| 1. ‘दो बैलों की कथा’ (नाट्य/श्रव्य रूप) | कहानी का नाट्य-रूपांतरण या पाठ (audio) सुनिए। ध्यान दीजिए कि संवाद बोलते समय स्वर कैसे बदलता है — हीरा का शांत स्वर, मोती का तीखा स्वर, मालकिन का चिढ़ा हुआ स्वर। | कक्षा में कहानी के किसी एक भाग का नाट्य-मंचन कीजिए। पात्र — हीरा, मोती, झूरी, मालकिन, गया, छोटी लड़की, चौकीदार, दढ़ियल, दो गधे। ‘मूक-भाषा’ के संवाद मंच के किनारे खड़ा एक सूत्रधार बोल सकता है। |
| 2. कथा सम्राट — प्रेमचंद | जन्म 1880, लमही (वाराणसी); मूल नाम धनपत राय; उपनाम पहले ‘नवाब राय’, फिर ‘प्रेमचंद’। पहला कहानी-संग्रह सोज़े-वतन, जिसे अंग्रेज़ सरकार ने जब्त कर लिया। असहयोग आंदोलन में सरकारी नौकरी से त्यागपत्र। कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में। उपन्यास — सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान। पत्रिकाएँ — हंस, जागरण, माधुरी। निधन 1936। | एक समय-रेखा (timeline) बनाइए — 1880 जन्म से 1936 निधन तक — जिसमें हर मोड़ पर एक रचना या घटना अंकित हो। साथ में उनकी पाँच प्रसिद्ध कहानियों (ईदगाह, पंच परमेश्वर, बड़े भाई साहब, नमक का दारोगा, पूस की रात) का एक-एक पंक्ति में परिचय। |
| 3. प्रेमचंद का बचपन और बच्चों की कहानियाँ | बचपन में माता का देहांत, कठिन आर्थिक स्थिति, दूर जाकर पढ़ाई और किताबों की दुकान पर उपन्यास पढ़ना। बच्चों के लिए लिखी रचनाएँ — जंगल की कहानियाँ, कुत्ते की कहानी, राम चर्चा, तथा ‘ईदगाह’ और ‘दो बैलों की कथा’ जैसी कहानियाँ जो बच्चों में सबसे लोकप्रिय हैं। | प्रेमचंद की एक बाल-कहानी पढ़कर कक्षा में सुनाइए और बताइए कि उसमें भी कोई पशु या कोई निर्धन पात्र किस तरह मुख्य भूमिका में है। फिर तुलना कीजिए कि ‘दो बैलों की कथा’ से वह किस बात में मिलती है। |
खोजबीन का तरीका: केवल इंटरनेट पर मत रुकिए। विद्यालय के पुस्तकालय से मानसरोवर का कोई भाग लीजिए और उसमें से एक कहानी पढ़िए। घर के बड़ों से पूछिए कि उन्होंने प्रेमचंद की कौन-सी कहानी पढ़ी या फ़िल्म देखी है — गोदान, गबन, शतरंज के खिलाड़ी और सद्गति पर फ़िल्में बनी हैं। हर स्रोत का नाम अपनी कॉपी में लिख लीजिए; यही आपकी संदर्भ-सूची होगी।
क्यों करें: एक कहानी को अच्छी तरह समझने के लिए उसके लेखक को जानना ज़रूरी है। जब आप जान लेंगे कि प्रेमचंद ने स्वयं असहयोग आंदोलन में नौकरी छोड़ी थी और उनकी पहली किताब जब्त हो गई थी, तब हीरा का वाक्य — “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ” — केवल एक बैल का संवाद नहीं रह जाएगा।