कक्षा ९ हिंदी अध्याय 1 दो बैलों की कथा के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

रचनाकार — प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में लमही (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ। उनका मूल नाम धनपत राय था। उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की, परंतु असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पूरी तरह लेखन को समर्पित हो गए। सन् 1936 में उनका निधन हुआ। उनकी कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। सेवासदन , प्रेमाश्रम , रंगभूमि , कायाकल्प , निर्मला , गबन , कर्मभूमि और गोदान उनके प्रमुख उपन्यास हैं। उन्होंने हंस , जागरण और माधुरी पत्रिकाओं का संपादन भी किया। किसान, मजदूर, दलित, स्त्री और स्वाधीनता आंदोलन उनकी रचनाओं के मूल विषय हैं; उनके कथा-साहित्य में मनुष्य ही नहीं, पशु-पक्षियों को भी आत्मीयता मिली है। कथावस्तु — झूरी के दो बैल हीरा और मोती पछाईं जाति के हैं — देखने में सुंदर, काम में चौकस, डील में ऊँचे। झूरी उन्हें अपने साले गया के यहाँ भेज देता है। ब

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शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
निरापदआपत्ति से रहित, निर्विघ्न, सुरक्षित“उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है”उसका निरापद स्वभाव ही उसकी सबसे बड़ी पूँजी है।
सहिष्णुतासहनशीलता, क्षमा“उसके सीधेपन, उसकी निरापद सहिष्णुता…”सहिष्णुता कमजोरी नहीं, एक बड़ा गुण है।
विषादउदासी, अवसाद, मन उचट जाना“उसके चेहरे पर एक स्थायी विषाद … छाया रहता है।”परीक्षा का परिणाम सुनकर उसके मुख पर विषाद छा गया।
पराकाष्ठाअंतिम सीमा, चरम कोटि“वे सभी उसमें पराकाष्ठा को पहुँच गए हैं”उसकी सहनशीलता पराकाष्ठा तक पहुँच चुकी थी।
कदाचित्कभी, शायद“कदाचित सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है।”कदाचित् वह आज न आ सके।
पछाईंपश्चिमी प्रदेश की (गोवंश की एक नस्ल)“दोनों पछाईं जाति के थे”पछाईं बैल ऊँचे डील और ताकत के लिए जाने जाते हैं।
चौकससतर्क, सावधान, ठीक“देखने में सुंदर, काम में चौकस, डील में ऊँचे।”चौकीदार रात-भर चौकस रहा।
डीलशरीर की ऊँचाई-चौड़ाई, कद“डील में ऊँचे”उसका डील देखकर सब चकित रह गए।
विग्रहफूट, झगड़ा, अलगाव“विग्रह के नाते से नहीं, केवल विनोद के भाव से”दो पड़ोसियों में विग्रह ठीक नहीं।
विनोदपरिहास, मनोरंजन, क्रीड़ा“केवल विनोद के भाव से, आत्मीयता के भाव से”बच्चों की बातों में विनोद भरा रहता है।
नाँदपशुओं को चारा-पानी देने का बड़ा चौड़ा बर्तन“नाँद में खली-भूसा पड़ जाने के बाद…”नाँद में पानी भरकर बैलों को छोड़ दिया।
गोईंजोड़ा, साथ काम करने वाली बैलों की जोड़ी“झूरी ने एक बार गोईं को ससुराल भेज दिया।”गोईं के बिना हल नहीं चलता।
पगहियाढोर (पशु) बाँधने की रस्सी“पगहिया पकड़कर आगे से खींचता”पगहिया ढीली थी, इसलिए बछड़ा छूट गया।
कनखियों सेतिरछी निगाह से, आँख के इशारे से“एक-दूसरे को कनखियों से देखा और लेट गए।”उसने कनखियों से मेरी ओर देखा और मुस्करा दिया।
गराँवफंदेदार रस्सी जो पशु के गले में पहनाई जाती है“उसने गराँव खोल दिया”गराँव खुलते ही बैल दौड़ पड़ा।
टिटकार‘टिक-टिक’ करके पशु को चलाने की ध्वनि“उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे।”किसान की टिटकार सुनते ही बैल चल पड़े।
थानपशुओं के बाँधे जाने की जगह“दोनों दौड़कर अपने थान पर आए”गाय अपने थान पर बँधी जुगाली कर रही है।
बरकतवृद्धि, बढ़ती, लाभ, प्रभाव“प्रेम के इस प्रसाद की यह बरकत थी…”थोड़े में भी बरकत हो, तो घर चल जाता है।
रगेदनाखदेड़ना, दौड़ाना“मैं आगे से रगेदता हूँ, तुम पीछे से रगेदो”कुत्ते ने बिल्ली को गली के बाहर तक रगेद दिया।
तजुरबाअनुभव“साँड़ को … संगठित शत्रुओं से लड़ने का तजुरबा न था।”तजुरबा किताबों से नहीं, काम करने से आता है।
मेड़खेत की सीमा पर बना मिट्टी का घेरा“हीरा तो मेड़ पर था, निकल गया।”मेड़ पर बैठकर किसान खेत निहार रहा था।
काँजीहौसवह बाड़ा जिसमें आवारा या दूसरे का खेत चरने वाले पशु बंद किए जाते हैं“दोनों मित्र काँजीहौस में बंद कर दिए गए।”काँजीहौस से छूटने के लिए जुर्माना भरना पड़ा।
साबिकावास्ता, सरोकार, पाला पड़ना“जीवन में पहली बार ऐसा साबिका पड़ा”ऐसे कठोर आदमी से मेरा कभी साबिका नहीं पड़ा।
बूतासामर्थ्य, बल, शक्ति“अपने बूते-भर जोर तो मार दिया।”अपने बूते से बाहर काम मत उठाओ।
उजड्डपनउद्दंडता, अशिष्टता“हीरा का यह उजड्डपन देखकर…”उजड्डपन से किसी का भला नहीं होता।
डुग्गीचमड़े से मढ़ा चौड़े मुँह का छोटा बाजा“बाड़े के सामने डुग्गी बजने लगी”गाँव में डुग्गी बजाकर घोषणा की गई।
उन्मत्तमतवाला, मस्त“दोनों उन्मत्त होकर … कुलेलें करते हुए”जीत की खबर सुनकर भीड़ उन्मत्त हो उठी।
अख़्तियारअधिकार, वश“किसी को मेरे बैल नीलाम करने का क्या अख़्तियार है?”यह फैसला मेरे अख़्तियार में नहीं है।
  1. मेरे उत्तर मेरे तर्क
  2. मेरी समझ मेरे विचार
  3. मेरी कल्पना मेरे अनुमान
  4. मेरे अनुभव मेरे विचार
  5. कहानी की पड़ताल
  6. कहानी का सौंदर्य
  7. कहानी की रचना
  8. कहानी का समय और समाज
  9. पशुओं के लिए कानून
  10. हमारी धरोहर और संस्कृति
  11. अलग-अलग और साथ-साथ
  12. भारतीय सांकेतिक भाषा
  13. मार्ग खोजेंगे कैसे?
  14. सृजन
  15. व्याकरण की बात
  16. भाषा गढ़ते मुहावरे
  17. गतिविधियाँ
  18. मेरी पहेली
  19. भाषा संगम
  20. खोजबीन
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