गंगा अध्याय 1 दो बैलों की कथा के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-06
इस अध्याय के बारे में
रचनाकार — प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में लमही (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ। उनका मूल नाम धनपत राय था। उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की, परंतु असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पूरी तरह लेखन को समर्पित हो गए। सन् 1936 में उनका निधन हुआ। उनकी कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। सेवासदन , प्रेमाश्रम , रंगभूमि , कायाकल्प , निर्मला , गबन , कर्मभूमि और गोदान उनके प्रमुख उपन्यास हैं। उन्होंने हंस , जागरण और माधुरी पत्रिकाओं का संपादन भी किया। किसान, मजदूर, दलित, स्त्री और स्वाधीनता आंदोलन उनकी रचनाओं के मूल विषय हैं; उनके कथा-साहित्य में मनुष्य ही नहीं, पशु-पक्षियों को भी आत्मीयता मिली है। कथावस्तु — झूरी के दो बैल हीरा और मोती पछाईं जाति के हैं — देखने में सुंदर, काम में चौकस, डील में ऊँचे। झूरी उन्हें अपने साले गया के यहाँ भेज देता है। ब
अभ्यास
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- मेरी कल्पना मेरे अनुमान
- मेरे अनुभव मेरे विचार
- कहानी की पड़ताल
- कहानी का सौंदर्य
- कहानी की रचना
- कहानी का समय और समाज
- पशुओं के लिए कानून
- हमारी धरोहर और संस्कृति
- अलग-अलग और साथ-साथ
- भारतीय सांकेतिक भाषा
- मार्ग खोजेंगे कैसे?
- सृजन
- व्याकरण की बात
- भाषा गढ़ते मुहावरे
- गतिविधियाँ
- मेरी पहेली
- भाषा संगम
- खोजबीन