गंगा अध्याय 1 भाषा गढ़ते मुहावरे

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“लोग आ-आकर उनकी सूरत देखते और मन फीका करके चले जाते।” … कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए। 1. “झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।”
उत्तर

मुहावरा — दाँतों पसीना आना

बिंदुविवरण
अर्थबहुत अधिक परिश्रम करना पड़ना; किसी काम में बहुत कठिनाई का सामना करना।
कहानी में क्योंबैल न आगे बढ़ते थे, न पीछे — “पीछे से हाँकता तो दोनों दाएँ-बाएँ भागते; पगहिया पकड़कर आगे से खींचता, तो दोनों पीछे को जोर लगाते।” इसलिए गया को घर तक ले जाने में अत्यधिक कठिनाई हुई।
मुहावरा क्यों बनादाँतों में पसीना आना असंभव है — यही असंभवता कठिनाई की अति दिखाती है। इसीलिए यह अतिशयोक्ति पर टिका मुहावरा है।
नया वाक्यपुरानी अलमारी को तीसरी मंज़िल तक चढ़ाने में हम चारों के दाँतों पसीना आ गया
एक और वाक्ययह सवाल इतना उलझा हुआ था कि हल करते-करते मेरे दाँतों पसीना आ गया।
प्र2.
2. “उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।”
उत्तर

मुहावरा — दिल काँप उठना

बिंदुविवरण
अर्थभय से थर्रा जाना; अनिष्ट की आशंका से मन दहल जाना।
कहानी में क्योंनीलाम के समय आया दढ़ियल आदमी — “जिसकी आँखें लाल थीं और मुद्रा अत्यंत कठोर” — बैलों की देह टटोल रहा था। उसे देखकर बिना बताए ही उन्हें समझ आ गया कि वह कसाई है।
ध्यान दीजिएयहाँ ‘अंतर्ज्ञान’ शब्द भी साथ है, यानी यह भय किसी के बताने से नहीं, भीतरी बोध से आया — इसी से मुहावरा और गहरा हो जाता है।
नया वाक्यरात के सन्नाटे में सीढ़ियों पर भारी कदमों की आहट सुनकर मेरा दिल काँप उठा
एक और वाक्यपरीक्षा-परिणाम का लिफ़ाफ़ा हाथ में आते ही उसका दिल काँप उठा।
प्र3.
3. “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।”
उत्तर

मुहावरा — जल उठना

बिंदुविवरण
अर्थक्रोध या ईर्ष्या से भर जाना; तिलमिला उठना।
कहानी में क्योंमालकिन को लगा कि बैलों ने भाईचारा नहीं, कामचोरी दिखाई है — “कैसे नमक-हराम बैल हैं कि एक दिन वहाँ काम न किया; भाग खड़े हुए।” उनका क्रोध इसी में फूट पड़ा।
शिल्पयह वाक्य कहानी के सबसे सुंदर विरोधाभास का हिस्सा है — झूरी उन्हीं बैलों को देखकर “स्नेह से गद्गद” होता है और उसकी स्त्री “जल उठती” है।
नया वाक्यअपने से छोटे भाई को पुरस्कार मिलते देख वह भीतर-ही-भीतर जल उठा
एक और वाक्यखेत में छोड़े गए मवेशियों को देखकर किसान जल उठा।
प्र4.
4. “मोती दिल में ऐंठकर रह गया।”
उत्तर

मुहावरा — दिल में ऐंठकर रह जाना

बिंदुविवरण
अर्थक्रोध या खीज को मन-ही-मन दबा लेना; कुछ कर न पाने की झुँझलाहट भीतर ही रह जाना।
कहानी में क्योंमोती लाठी लिए आते हुए गया को सबक सिखाना चाहता था, पर हीरा ने रोक दिया — “नहीं। हमारी जाति का यह धर्म नहीं है।” मित्र की बात मानकर वह रुक गया, पर भीतर का गुस्सा उतरा नहीं।
इसका मनोवैज्ञानिक अर्थयह वही दबा हुआ क्रोध है जो आगे चलकर विद्रोह बनकर फूटता है — “दोनों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था।”
नया वाक्यअध्यापक के सामने वह कुछ कह न सका और दिल में ऐंठकर रह गया
एक और वाक्यअपनी बारी छिनते देखकर भी वह चुप रहा, बस दिल में ऐंठकर रह गया।
प्र5.
5. “आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूँ कैसे ले जाता है।”
उत्तर

मुहावरा — खबर लेना

बिंदुविवरण
अर्थ(यहाँ) दंड देना, मज़ा चखाना, अच्छी तरह सबक सिखाना।
सावधानी‘खबर लेना’ के दो अर्थ हैं — (i) हाल-चाल पूछना (“दादी की खबर ले आना”), और (ii) दंड देना। कौन-सा अर्थ है, यह संदर्भ से तय होता है। यहाँ मोती दढ़ियल को धमका रहा है, इसलिए दूसरा अर्थ है।
कहानी में क्योंदढ़ियल को गाँव के बाहर तक खदेड़ आने के बाद मोती अकड़ता हुआ लौटा और यह चेतावनी दी — “देखूँ, कैसे ले जाता है।”
नया वाक्ययदि उसने फिर मेरे छोटे भाई को तंग किया, तो मैं उसकी अच्छी तरह खबर लूँगा
दूसरे अर्थ में वाक्यछुट्टी के दिन जाकर बीमार मित्र की खबर ले आना।
प्र6.
6. “जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।”
उत्तर

इस एक वाक्य में दो मुहावरे हैं — जी तोड़कर काम करना और गम खाना

मुहावराअर्थकहानी में संदर्भनया वाक्य
जी तोड़कर काम करनापूरी शक्ति और लगन लगाकर परिश्रम करनाप्रेमचंद विदेश में बसे भारतवासियों के बारे में कह रहे हैं कि वे कठोर परिश्रम करते हैं, फिर भी बदनाम हैं।परीक्षा के दिनों में उसने जी तोड़कर पढ़ाई की और पहली श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ।
गम खानाअपमान या दुख को चुपचाप सह लेना; क्रोध पी जानायह उसी ‘निरापद सहिष्णुता’ की ओर संकेत है जिस पर पूरी कहानी व्यंग्य करती है।दुकानदार की कड़वी बात सुनकर भी पिताजी गम खा गए और चुपचाप लौट आए।
ध्यान दीजिए: ये दोनों मुहावरे उसी अनुच्छेद में हैं जहाँ लेखक व्यंग्य कर रहा है। यानी प्रेमचंद कह रहे हैं कि केवल ‘जी तोड़कर काम करना’ और ‘गम खा जाना’ पर्याप्त नहीं — आत्मसम्मान की रक्षा भी आनी चाहिए। यही कहानी का केंद्रीय भाव है।
प्र7.
7. “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।”
उत्तर

मुहावरा — ईंट का जवाब पत्थर से देना

बिंदुविवरण
अर्थकरारा जवाब देना; अन्याय का दुगुनी शक्ति से प्रतिकार करना।
कहानी में क्योंप्रेमचंद यहाँ तीखा व्यंग्य कर रहे हैं — जो चुपचाप सहते हैं उन्हें दुनिया ‘बुद्धिहीन’ मानती है, और जो पलटकर उत्तर देते हैं उन्हें ‘सभ्य’। इसके तुरंत बाद वे उदाहरण भी देते हैं — “जापान की मिसाल सामने है। एक ही विजय ने उसे संसार की सभ्य जातियों में गण्य बना दिया।”
कहानी में इसका मूर्त रूपयही मुहावरा मोती के चरित्र में जीवित हो जाता है — साँड़ के पेट में सींग भोंकना और दढ़ियल को गाँव के बाहर तक खदेड़ना।
नया वाक्यसीमा पर बार-बार छेड़खानी होने पर सेना ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
एक और वाक्यपहले तीन ओवर में खूब रन लुटाने के बाद गेंदबाज़ ने ईंट का जवाब पत्थर से देते हुए लगातार दो विकेट ले लिए।
प्र8.
8. “तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।”
उत्तर

मुहावरा — नौ-दो ग्यारह होना

बिंदुविवरण
अर्थचुपचाप भाग जाना, चंपत हो जाना, खिसक लेना।
कहानी में क्योंसाँड़ को सामने आता देखकर मोती भाग जाने के पक्ष में था। हीरा ने कहा “भागना कायरता है”, तो मोती ने चिढ़कर यह वाक्य कहा। (आगे वही मोती डटकर लड़ता है — यही उसके चरित्र की रोचक बात है।)
शब्द-चित्र‘नौ’ और ‘दो’ को जोड़ने पर ‘ग्यारह’ बनता है, और ‘11’ दो सीधी खड़ी रेखाएँ हैं — मानो दो पैर तेज़ी से चलते हुए। मुहावरे में यही चित्र छिपा है।
नया वाक्यशीशा टूटने की आवाज़ सुनते ही बच्चे नौ-दो ग्यारह हो गए
एक और वाक्यचौकीदार की टॉर्च जलते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया।
पाठ के अन्य मुहावरे (अभ्यास के लिए): मन फीका करना, नमक-हराम होना, जान हथेली पर लेना, जान से हाथ धोना, बगलें झाँकना, आँखें न उठाना, विजय के नशे में झूमना, बोटी-बोटी काँपना, ठठरियाँ निकल आना, अकड़ना, टकटकी लगाना, दिल भारी होना, आँखों में आँसू लाना, अपने बूते-भर जोर मारना। इनके अर्थ लिखकर एक-एक वाक्य बनाइए — इसी से भाषा ‘मुहावरेदार’ बनती है।
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