गंगा अध्याय 1 गतिविधियाँ

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
1. कविता (गीत) और अभिनंदन-पत्र — “बाल-सभा ने निश्चय किया, दोनों पशुवीरों को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।” (क) मान लीजिए कि बाल-सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। अपनी कल्पना से वह गीत लिखिए।
उत्तर

गीत लिखते समय तीन बातें ध्यान रखिए — तुक (पंक्तियों के अंत की एक-सी ध्वनि), टेक (वह पंक्ति जो हर अंतरे के बाद लौटे), और लय (हर पंक्ति में लगभग बराबर मात्राएँ, ताकि सब मिलकर गा सकें)।

नमूना उत्तर — ‘हीरा-मोती’ (बाल-सभा का गीत)

टेक —
हीरा-मोती, हीरा-मोती, गाँव तुम्हारा गाता है,
जो सिर ऊँचा रखकर जीता, वही हमें भाता है॥

पछाईं जाति के दो साथी, सुंदर और सजीले,
काम में चौकस, डील में ऊँचे, मन के बड़े रसीले।
बिन बोले ही बात समझ लें, ऐसा नाता है —
जो सिर ऊँचा रखकर जीता, वही हमें भाता है॥

रातों-रात पगहिया तोड़ी, लौट पड़े निज द्वारे,
कीचड़ सने खड़े थे आकर, आँखों में थे तारे।
जिसको अपना घर प्यारा हो, वह क्यों घबराता है —
जो सिर ऊँचा रखकर जीता, वही हमें भाता है॥

सूखा भूसा, डंडे-लाठी, भूख भरी थी रातें,
फिर भी पाँव नहीं उठवाए, मानी नहीं वे बातें।
जो न झुके अन्याय के आगे, वह ही जग जीता है —
जो सिर ऊँचा रखकर जीता, वही हमें भाता है॥

साँड़ बड़ा था हाथी जैसा, दोनों डटकर भिड़ गए,
मिलकर वार किया जब दोनों, उसके तेवर उड़ गए।
जुड़कर लड़ने वाले को ही जीत बुलाती है —
जो सिर ऊँचा रखकर जीता, वही हमें भाता है॥

तोड़ी बंदीगृह की दीवार, छूटे कितने प्राणी,
खुद बँधकर भी साथी न छोड़ा — यही बड़ी कुर्बानी।
सच्चा मीत वही है जो दुख में साथ निभाता है —
जो सिर ऊँचा रखकर जीता, वही हमें भाता है॥

Tip: गीत में कहानी की घटनाओं का क्रम रखिए (मित्रता → लौटना → अत्याचार → साँड़ → काँजीहौस)। इससे गाते समय सुनने वाले को पूरी कहानी याद आती जाएगी। और टेक ऐसी चुनिए जिसमें कहानी का भाव हो, केवल नाम नहीं।
प्र2.
1. (ख) हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र लिखिए।
उत्तर

अभिनंदन-पत्र (मानपत्र) एक औपचारिक, अलंकृत प्रशंसा-पत्र होता है। इसमें रहता है — शीर्षक, संबोधन, कार्य का उल्लेख, गुणों की प्रशंसा, कृतज्ञता, शुभकामना, और अंत में देने वाली संस्था का नाम, स्थान व दिनांक। भाषा गरिमामय और थोड़ी अलंकृत होती है।

नमूना उत्तर:

अभिनंदन-पत्र
बाल-सभा, ग्राम बेलपुर की ओर से

आदरणीय पशु-वीर हीरा एवं मोती,

आज हमारा यह छोटा-सा गाँव आपका अभिनंदन करते हुए गर्व का अनुभव करता है। आप दोनों केवल हमारे खेत जोतने वाले बैल नहीं हैं — आप साहस, मित्रता और स्वाभिमान के जीवंत उदाहरण हैं।

जिस रात आपको अपने घर से दूर, अनजान गाँव में बाँध दिया गया, आपने अन्न-जल त्याग दिया और मजबूत पगहे तोड़कर उसी रात लौट आए। घुटनों तक कीचड़ में सने, थके हुए, फिर भी आपकी आँखों में जो ‘विद्रोहमय स्नेह’ था, उसे यह गाँव कभी नहीं भूलेगा।

आपने भूखे रहकर भी अन्यायी के आगे पाँव नहीं उठाए। आपने अपने से कहीं बड़े साँड़ का सामना अकेले नहीं, बल्कि मिलकर किया और यह सिखाया कि संगठित शक्ति के आगे कोई शक्ति बड़ी नहीं होती। और सबसे बढ़कर — काँजीहौस की दीवार गिराकर आपने अपनी मुक्ति से पहले नौ-दस मूक प्राणियों की मुक्ति चुनी। बँधे हुए मित्र को छोड़कर अकेले भाग जाना आपने स्वीकार नहीं किया। यह वह आचरण है जिसे मनुष्य भी सदा नहीं निभा पाता।

आपने यह भी दिखाया कि शक्ति का उपयोग कहाँ रुक जाना चाहिए — गिरे हुए शत्रु पर आपने सींग नहीं चलाया और स्त्री पर वार नहीं किया। शक्ति के साथ मर्यादा — यही सच्ची वीरता है।

इस अवसर पर बाल-सभा आपके सम्मान में यह अभिनंदन-पत्र, फूलों की माला तथा गुड़, चोकर, खली और रोटियों का भोग समर्पित करती है। हमारी कामना है कि आप दोनों सदा साथ रहें, स्वस्थ रहें और इसी थान पर, इसी स्नेह के बीच अपना जीवन बिताएँ।

भवदीय,
बाल-सभा
ग्राम — बेलपुर, जिला — वाराणसी
दिनांक — 15 अगस्त 20XX

Tip: अभिनंदन-पत्र में केवल तारीफ़ के विशेषण मत भरिए — काम गिनाइए। ऊपर के नमूने में हर अनुच्छेद कहानी की एक घटना पर टिका है, इसीलिए प्रशंसा खोखली नहीं लगती।
प्र3.
2. बाल सभा में भाषण — मान लीजिए कि आपको बाल-सभा ने हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के लिए बुलाया है। भाषण का विषय है— ‘पशुओं के अधिकार’। अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर

भाषण का ढाँचा — संबोधन → विषय-प्रवेश (कोई घटना या प्रश्न) → मुख्य बिंदु (तीन-चार, क्रम से) → उदाहरण और तथ्य → अपील → धन्यवाद। बोलने के लिए वाक्य छोटे रखिए और बीच-बीच में श्रोताओं से प्रश्न पूछिए।

नमूना उत्तर — भाषण

माननीय अध्यक्ष महोदय, आदरणीय अध्यापकगण और मेरे प्यारे साथियो,

आज बाल-सभा में हम दो बैलों — हीरा और मोती — के लौट आने की खुशी मना रहे हैं। पर मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ: यदि वे न लौट पाते तो? यदि वह दढ़ियल उन्हें ले जाने में सफल हो जाता, तो आज हम यहाँ तालियाँ नहीं बजा रहे होते। इसलिए आज मैं ‘पशुओं के अधिकार’ विषय पर कुछ कहना चाहता हूँ।

पहली बात — पशु हमारी सम्पत्ति ज़रूर हैं, पर वे वस्तु नहीं हैं। वस्तु को भूख नहीं लगती, दर्द नहीं होता, डर नहीं लगता। हीरा और मोती को तीनों लगे। जिसे भूख और दर्द होता है, उसके अधिकार भी होते हैं।

दूसरी बात — उनका सबसे पहला अधिकार है भोजन और पानी। सोचिए, काँजीहौस में एक सप्ताह तक उन्हें चारे का एक तिनका नहीं मिला। वे दीवार की नमकीन मिट्टी चाटते रहे। क्या यह किसी अपराध का दंड हो सकता है? नहीं — यह क्रूरता है।

तीसरी बात — उनका अधिकार है मार-पीट से सुरक्षा। जो हाथ हल पकड़ता है, उसी हाथ में डंडा नहीं होना चाहिए। जिस बैल को उसका मालिक “फूल की छड़ी से भी न छूता था”, वही बैल किसी और के हाथों नाक पर डंडे खाता है — यह अंतर कोई कानून नहीं, हमारी संवेदना तय करती है।

चौथी बात — उनका अधिकार है विश्राम, चिकित्सा और वृद्धावस्था में सम्मान। जिस पशु ने जीवन-भर हमारे खेत जोते, बूढ़ा होने पर उसे कसाई के हाथ बेच देना कृतघ्नता है। हमारे देश में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 बना हुआ है, और हमारे संविधान का अनुच्छेद 51(क)(छ) हर नागरिक से कहता है कि वह जीवमात्र के प्रति दया रखे। यानी दया केवल अच्छाई नहीं, हमारा कर्तव्य है।

साथियो, हम बच्चे कानून तो नहीं बना सकते, पर हम बहुत कुछ कर सकते हैं। हम अपने घर के पशुओं को समय पर चारा-पानी दे सकते हैं। गर्मी में सड़क के कुत्तों और पक्षियों के लिए पानी का बर्तन रख सकते हैं। घायल पशु दिखे तो बड़ों को बता सकते हैं। और किसी को किसी बेज़बान पर हाथ उठाते देखें, तो चुप नहीं रह सकते।

अंत में मैं इतना ही कहूँगा — जिस समाज में बेज़बान सुरक्षित होते हैं, वही समाज सचमुच सभ्य कहलाने योग्य है। हीरा और मोती ने अपनी लड़ाई खुद लड़ ली; पर हर पशु इतना भाग्यशाली नहीं होता। उनकी लड़ाई हमें लड़नी है।

धन्यवाद। जय हिंद।

Tip: भाषण की शुरुआत किसी प्रश्न या घटना से कीजिए — इससे श्रोता तुरंत जुड़ जाते हैं। और अंत में हमेशा एक अपील रखिए कि सुनने वाला क्या करे; उपदेश से अधिक असर आमंत्रण का होता है।
प्र4.
3. शीर्षक — इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर

कहानी पाँच भागों में बँटी है (पुस्तक में हर भाग के आरंभ पर एक छोटा चिह्न/अंक दिया गया है)। नीचे हर भाग की सीमा, कथा-सार और सुझाए गए शीर्षक दिए गए हैं।

भागकहाँ से कहाँ तक (मुख्य घटनाएँ)सुझाया गया शीर्षकवैकल्पिक शीर्षक
1गधे और बैल पर लेखक की टिप्पणी; हीरा-मोती का परिचय और भाईचारा; झूरी का गोईं को ससुराल भेजना; पहली रात पगहे तोड़कर लौट आना; गाँव का स्वागत; मालकिन का क्रोध और सूखे भूसे का हुक्म।दो मित्र और पहली वापसी“बेगाना घर”; “जहाँ अपनापन नहीं, वहाँ नाँद भी खाली है”
2गया का दुबारा ले जाना; गाड़ी और हल में जोतना; डंडे; मोती का हल लेकर भागना; छोटी लड़की की दो रोटियाँ; उसका गराँव खोलना; बैलों का भागना और रास्ता भूल जाना; मटर चरना और आज़ादी का अनुभव।बंधन, रोटियाँ और भागना“दो रोटियों का प्रसाद”; “पाँव न उठाने की कसम”
3साँड़ का सामना; योजना बनाकर दोनों का मिलकर लड़ना और साँड़ को हराना; फिर मटर के खेत में मोती का पकड़ा जाना; हीरा का लौट आना; दोनों का काँजीहौस में बंद होना।साँड़ से भिड़ंत और गिरफ़्तारी“संगठित शक्ति की जीत”; “जीत के बाद कैद”
4काँजीहौस की भूख; हीरा का दीवार तोड़ना और बाँधा जाना; मोती का दो घंटे की जोर-आजमाई से दीवार गिराना; नौ-दस प्राणियों की मुक्ति; गधों को ठेलकर निकालना; मोती का मित्र के पास लौट आना और सुबह पिटना।टूटी दीवार, टूटा बंधन“मित्र नहीं छोड़ा जाता”; “जोर तो मारता ही जाऊँगा”
5एक सप्ताह की भूख; डुग्गी और नीलाम; दढ़ियल का खरीदना; परिचित रास्ता पहचानकर घर की ओर दौड़; झूरी और दढ़ियल की तकरार; मोती का दढ़ियल को खदेड़ना; नाँद का भरना और मालकिन का माथे चूमना।घर की राह और मालकिन का चुंबन“अपना थान”; “लौट आए अपने द्वार”
शीर्षक चुनने की कसौटी: अच्छा शीर्षक तीन शर्तें पूरी करता है — (1) वह छोटा हो; (2) उस भाग की मुख्य घटना या मुख्य भाव पकड़े; (3) पढ़ते ही उत्सुकता जगाए। यही कारण है कि ‘भाग 4’ के लिए ‘काँजीहौस’ से बेहतर शीर्षक ‘टूटी दीवार, टूटा बंधन’ है — इसमें घटना भी है और अर्थ भी।
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