गंगा अध्याय 1 मेरी पहेली

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों— हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी
उत्तर

अच्छी पहेली बनाने का सूत्र — उत्तर को सीधे मत बताइए, उसके दो-तीन गुण बताइए और एक गुण ऐसा रखिए जो चौंकाए (जैसे शब्द के दो अर्थ)। तुक मिला दीजिए तो पहेली याद भी रह जाती है।

उत्तरपहेलीपहेली की चाबी
हीरा“खान में मिलूँ तो सबसे कीमती, कहानी में मिलूँ तो सींगोंवाला,
धीरज मेरा नाम है साथी, फिर भी दीवार मैंने हिला डाला।”
शब्द के दो अर्थ — रत्न और बैल का नाम; ‘धीरज’ उसके स्वभाव का संकेत।
मोती“सीप में जन्मूँ, माला में सजूँ, पर इस कथा में मैं हूँ जीव,
गुस्सा मेरा जल्दी आता, साँड़ भगाया मैंने सींग से खींच।”
दो अर्थ — रत्न और बैल; ‘गुस्सा’ और ‘साँड़’ से पहचान पक्की।
झूरी“न मैं बैल, न मैं साला, पर दोनों का हूँ मैं रखवाला,
फूल की छड़ी से भी न छूता, गले लगाकर रोता-हँसता।”
‘फूल की छड़ी से भी न छूना’ सीधे कहानी की पंक्ति है।
गया“मेरा नाम एक क्रिया भी है, ‘चला गया’ में मुझको पाओ,
पर इस कथा में साला हूँ मैं, हल में बैल जुताने आओ।”
‘गया’ शब्द संज्ञा भी है और क्रिया-रूप भी — यही मज़ा है।
बैल“कंधे पर जुआ, गले में घंटी, खेत मेरा घर-आँगन है,
‘बुद्धिहीन’ कहते हैं मुझको, पर सारा अन्न मेरा दान है।”
काम, ठिकाना और कहानी का व्यंग्य — तीनों संकेत।
मटर“हरी फली में गोल-गोल हम, कतार बनाकर बैठे रहते,
भूखे बैलों ने जब चर डाला, तब वे काँजीहौस में जा फँसते।”
रूप + कहानी की घटना।
रस्सी“बल खाकर मैं बल पकड़ूँ, पशु को थामे रहती हूँ,
चबा लो थोड़ा, झटका दो — फिर एक ही पल में टूट जाती हूँ।”
‘चबाकर तोड़ने’ का उपाय मोती ने ही बताया था।
रोटी“गोल हूँ, पर पहिया नहीं, तवे पर सिंककर फूल जाती,
दो ही मिलीं थीं भूखे बैलों को, पर दिल की भूख मिटा जाती।”
रूप + कहानी का मार्मिक प्रसंग।
समूह में कैसे कीजिए: कक्षा को चार-चार के समूहों में बाँटिए। हर समूह दो शब्द उठाए और उन पर पहेली बनाए। फिर समूह बारी-बारी अपनी पहेली सुनाएँ और बाकी कक्षा उत्तर दे। जिस पहेली का उत्तर सब बहुत जल्दी दे दें, वह बहुत आसान है; जिसका कोई न दे पाए, वह बहुत कठिन है। अच्छी पहेली वह है जिसका उत्तर दो-तीन प्रयास में मिल जाए।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ