प्र1.
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों— हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी
उत्तर
अच्छी पहेली बनाने का सूत्र — उत्तर को सीधे मत बताइए, उसके दो-तीन गुण बताइए और एक गुण ऐसा रखिए जो चौंकाए (जैसे शब्द के दो अर्थ)। तुक मिला दीजिए तो पहेली याद भी रह जाती है।
| उत्तर | पहेली | पहेली की चाबी |
|---|---|---|
| हीरा | “खान में मिलूँ तो सबसे कीमती, कहानी में मिलूँ तो सींगोंवाला, धीरज मेरा नाम है साथी, फिर भी दीवार मैंने हिला डाला।” | शब्द के दो अर्थ — रत्न और बैल का नाम; ‘धीरज’ उसके स्वभाव का संकेत। |
| मोती | “सीप में जन्मूँ, माला में सजूँ, पर इस कथा में मैं हूँ जीव, गुस्सा मेरा जल्दी आता, साँड़ भगाया मैंने सींग से खींच।” | दो अर्थ — रत्न और बैल; ‘गुस्सा’ और ‘साँड़’ से पहचान पक्की। |
| झूरी | “न मैं बैल, न मैं साला, पर दोनों का हूँ मैं रखवाला, फूल की छड़ी से भी न छूता, गले लगाकर रोता-हँसता।” | ‘फूल की छड़ी से भी न छूना’ सीधे कहानी की पंक्ति है। |
| गया | “मेरा नाम एक क्रिया भी है, ‘चला गया’ में मुझको पाओ, पर इस कथा में साला हूँ मैं, हल में बैल जुताने आओ।” | ‘गया’ शब्द संज्ञा भी है और क्रिया-रूप भी — यही मज़ा है। |
| बैल | “कंधे पर जुआ, गले में घंटी, खेत मेरा घर-आँगन है, ‘बुद्धिहीन’ कहते हैं मुझको, पर सारा अन्न मेरा दान है।” | काम, ठिकाना और कहानी का व्यंग्य — तीनों संकेत। |
| मटर | “हरी फली में गोल-गोल हम, कतार बनाकर बैठे रहते, भूखे बैलों ने जब चर डाला, तब वे काँजीहौस में जा फँसते।” | रूप + कहानी की घटना। |
| रस्सी | “बल खाकर मैं बल पकड़ूँ, पशु को थामे रहती हूँ, चबा लो थोड़ा, झटका दो — फिर एक ही पल में टूट जाती हूँ।” | ‘चबाकर तोड़ने’ का उपाय मोती ने ही बताया था। |
| रोटी | “गोल हूँ, पर पहिया नहीं, तवे पर सिंककर फूल जाती, दो ही मिलीं थीं भूखे बैलों को, पर दिल की भूख मिटा जाती।” | रूप + कहानी का मार्मिक प्रसंग। |
समूह में कैसे कीजिए: कक्षा को चार-चार के समूहों में बाँटिए। हर समूह दो शब्द उठाए और उन पर पहेली बनाए। फिर समूह बारी-बारी अपनी पहेली सुनाएँ और बाकी कक्षा उत्तर दे। जिस पहेली का उत्तर सब बहुत जल्दी दे दें, वह बहुत आसान है; जिसका कोई न दे पाए, वह बहुत कठिन है। अच्छी पहेली वह है जिसका उत्तर दो-तीन प्रयास में मिल जाए।