गंगा अध्याय 2 क्या लिखूँ? के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-06
इस अध्याय के बारे में
रचनाकार परिचय — पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगाँव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में हुआ था और निधन सन् 1971 में। हिंदी साहित्य में उनकी ख्याति कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार और हास्य-व्यंग्यकार के रूप में है, पर स्मरण वे विशेष रूप से अपने निबंधों के लिए किए जाते हैं। पंच-पात्र , पद्म-वन , प्रबंध पारिजात और कुछ बिखरे पन्ने उनके निबंध-संग्रह हैं; अश्रुदल और शतदल काव्य; झलमला और त्रिवेणी कहानी-संग्रह; विश्व साहित्य , हिंदी कहानी साहित्य , हिंदी साहित्य विमर्श तथा हिंदी उपन्यास साहित्य आलोचना-ग्रंथ हैं। उन्होंने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन भी किया। विधा — यह पाठ एक निबंध है, और वह भी आत्मपरक (व्यक्तिव्यंजक) निबंध — जिसमें लेखक स्वयं पाठक से बात करता हुआ चलता है, अपनी उलझन, अपनी हार और अपनी चतुराई, सब हँसते-हँसते सामने रख देता है। यही आत्मपरक शैली इस निबंध क
अभ्यास
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- निबंध लिखने की कला
- भाव-विस्तार
- मेरा अनुभव
- विषयों से संवाद
- सृजन
- व्याकरण की बात : समास
- उपसर्ग एवं प्रत्यय
- भाव एक शब्द अनेक
- गतिविधियाँ
- भाषा संगम
- झरोखे से
- खोजबीन