कक्षा ९ हिंदी अध्याय 2 क्या लिखूँ? के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
रचनाकार परिचय — पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगाँव, छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में हुआ था और निधन सन् 1971 में। हिंदी साहित्य में उनकी ख्याति कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार और हास्य-व्यंग्यकार के रूप में है, पर स्मरण वे विशेष रूप से अपने निबंधों के लिए किए जाते हैं। पंच-पात्र , पद्म-वन , प्रबंध पारिजात और कुछ बिखरे पन्ने उनके निबंध-संग्रह हैं; अश्रुदल और शतदल काव्य; झलमला और त्रिवेणी कहानी-संग्रह; विश्व साहित्य , हिंदी कहानी साहित्य , हिंदी साहित्य विमर्श तथा हिंदी उपन्यास साहित्य आलोचना-ग्रंथ हैं। उन्होंने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन भी किया। विधा — यह पाठ एक निबंध है, और वह भी आत्मपरक (व्यक्तिव्यंजक) निबंध — जिसमें लेखक स्वयं पाठक से बात करता हुआ चलता है, अपनी उलझन, अपनी हार और अपनी चतुराई, सब हँसते-हँसते सामने रख देता है। यही आत्मपरक शैली इस निबंध क
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्द | अर्थ | पाठ की पंक्ति / संदर्भ | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|---|
| स्फूर्ति | फुरती, उत्तेजना, मन में कुछ प्रकट होना | “हृदय में कुछ ऐसी स्फूर्ति-सी आती है” | सुबह की सैर से दिन भर स्फूर्ति बनी रहती है। |
| आवेग | बिना सोचे-विचारे कुछ कर बैठने की अंतःप्रेरणा, झोंक, उतावली | “मस्तिष्क में कुछ ऐसा आवेग-सा उत्पन्न होता है” | आवेग में लिया गया निर्णय प्रायः पछतावा देता है। |
| यथार्थ / यथार्थता | सत्य, वास्तविक, जैसा सचमुच है वैसा | “दूर रहने से हमें यथार्थता की कठोरता का अनुभव नहीं होता।” | कहानी सुंदर है, पर उसमें यथार्थ की छाया कम है। |
| उत्थित | उठा हुआ, उत्पन्न, अपने आप ऊपर आया हुआ | “जिसमें भाव अपने आप उत्थित हो जाते हैं” | सभा में एक नया प्रश्न उत्थित हो गया। |
| रहस्य | गुप्त भेद, मर्म, भीतरी बात | “मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा” | सफलता का रहस्य निरंतर अभ्यास है। |
| विज्ञ | जानकार, समझदार, विद्वान | “जिसके संबंध में बड़े-बड़े विज्ञों में भी विरोध है” | इस विषय पर विज्ञ लोगों की राय भी बँटी हुई है। |
| सम्मति | सहमति, राय, मत | “सबसे पहले निबंधशास्त्र के आचार्यों की सम्मति जान लूँ” | मैंने यह काम गुरुजी की सम्मति से आरंभ किया। |
| अनुसंधान | अन्वेषण, खोज, जाँच-पड़ताल | “पुस्तकालय में जाकर इस विषय का अनुसंधान कर लेता” | वैज्ञानिक वर्षों तक एक ही प्रश्न पर अनुसंधान करते हैं। |
| विश्वकोश | वह ग्रंथ जिसमें संसार के सारे विषयों का विवरण हो | “यहाँ न तो विश्वकोश है” | कठिन शब्द का अर्थ मैंने विश्वकोश में देखा। |
| दुर्बोध / दुर्बोधता | जो शीघ्र समझ में न आए, गूढ़, कठिन | “सेनापति ने भी अपनी कविता दुर्बोध कर दी है” | बिना ज़रूरत की दुर्बोधता लेखन का दोष है, गुण नहीं। |
| गांभीर्य | गंभीरता, गहराई, जटिलता | “यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है” | उसके भाषण में विषय का गांभीर्य साफ़ झलकता था। |
| गुत्थी | उलझन, गाँठ, कठिनाई | “अपने काव्य में ऐसी गुत्थियाँ डाल दी हैं” | शिक्षक ने दो पंक्तियों में सारी गुत्थी सुलझा दी। |
| अज्ञ | ज्ञानरहित, नासमझ | “जो अज्ञों से न सुलझ सकें” | अज्ञ बालक को डाँटने से नहीं, समझाने से लाभ होता है। |
| पद्धति | प्रथा, परिपाटी, प्रणाली, तरीका | “उस पद्धति के जन्मदाता मानटेन समझे जाते हैं” | हर विद्यालय की पढ़ाने की अपनी पद्धति होती है। |
| पाश्चात्य | पश्चिम का, पश्चिमी | “भारतीय और पाश्चात्य साहित्य के सिद्धांतों का सामंजस्य” | उन्होंने पाश्चात्य संगीत भी उतने ही मन से सीखा। |
| आख्यायिका | सिलसिलेवार कहानी या वृत्तांत, शिक्षा देने वाली कल्पित कथा | “न आख्यायिका-लेखक की सूक्ष्म दृष्टि” | कादंबरी संस्कृत की प्रसिद्ध आख्यायिका है। |
| उदात्त | ऊँचा, महान, श्रेष्ठ | “उनमें न कवि की उदात्त कल्पना रहती है” | महाकाव्य का नायक उदात्त चरित्र वाला होता है। |
| अभिव्यक्ति | व्यक्त होना, प्रकट होना, प्रकाशन | “उसके सच्चे भावों की सच्ची अभिव्यक्ति होती है” | चित्रकला भी भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम है। |
| अनुसरण | पीछे चलना, अनुकरण करना | “इसी पद्धति का अनुसरण कर मैं भी क्यों न निबंध लिखूँ” | अच्छी आदतों का अनुसरण करने में लज्जा कैसी? |
| समावेश | शामिल होना, मिलना, प्रवेश | “अलंकारों, मुहावरों और लोकोक्तियों का समावेश” | निबंध में उदाहरणों का समावेश उसे रोचक बनाता है। |
| कोलाहल | बहुत लोगों के एक साथ बोलने से होने वाला शोर, हंगामा | “कोलाहल से पूर्ण घर के एक कोने में बैठी हुई…” | मेले का कोलाहल दूर तक सुनाई दे रहा था। |
| कलरव | मधुर ध्वनि, कोमल शोर | “ढोल की ध्वनि के साथ आनंद का कलरव” | भोर में पक्षियों का कलरव मन मोह लेता है। |
| विषाद | अवसाद, उदासी | “आशंका और विषाद से युक्त हृदय के कंपन” | विदाई के समय उसके चेहरे पर विषाद उतर आया। |
| लोकोक्ति | लोक में प्रचलित वह वाक्य/वाक्यांश जो कोई विशेष अर्थ या सीख व्यक्त करे | “‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ एक लोकोक्ति है।” | ‘नाच न जाने आँगन टेढ़ा’ एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है। |
| अनमेली | हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य-शैली जिसमें असंगत वाक्य और विपरीत स्थितियाँ जोड़ी जाती हैं | “पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है।” | खुसरो की अनमेली सुनकर सारी कक्षा हँस पड़ी। |
| समास | दो या अधिक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना; समास का अर्थ है ‘संक्षेप’ | “गंगा+जल = गंगाजल, देश+भक्ति = देशभक्ति” | ‘निबंधशास्त्र’ में तत्पुरुष समास है। |
| उपसर्ग | भाषा के सार्थक लघुतम खंड जो शब्दों के आरंभ में लगकर नया शब्द बनाते हैं | “‘बोध’ के पहले ‘दुर्’ उपसर्ग” | ‘अ’ उपसर्ग लगने से ‘संतोष’ का उलटा ‘असंतोष’ बन गया। |
| प्रत्यय | भाषा के सार्थक लघुतम खंड जो शब्दों के अंत में लगकर नया शब्द बनाते हैं | “‘कठिन’ शब्द के बाद में ‘आई’ प्रत्यय” | ‘क’ प्रत्यय से ‘सुधार’ का ‘सुधारक’ बना। |
अभ्यास
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- निबंध लिखने की कला
- भाव-विस्तार
- मेरा अनुभव
- विषयों से संवाद
- सृजन
- व्याकरण की बात : समास
- उपसर्ग एवं प्रत्यय
- भाव एक शब्द अनेक
- गतिविधियाँ
- भाषा संगम
- झरोखे से
- खोजबीन