प्र1.
“खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा॥” पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।
उत्तर
पहले तीनों रूपों का अंतर समझ लीजिए — तभी संकलन ठीक-ठीक बनेगा।
| रूप | पहचान | पाठ/परंपरा से उदाहरण |
|---|---|---|
| अनमेली (अनमिली) | असंगत, आपस में न मिलने वाली बातें जोड़कर हास्य पैदा करना। हर पंक्ति अलग विषय की, फिर भी छंद एक। | “खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा॥” — इसी में चारों स्त्रियों के चारों विषय (खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल) आ गए। |
| मुकरी (कह-मुकरी) | सखी अपनी सहेली से बात करती है। तीन पंक्तियों में ऐसा वर्णन कि लगे किसी प्रियजन की बात हो रही है, और अंत में वह ‘मुकर’ जाती है — “ना सखि, …!” | “वो आवे तब शादी होय। उस बिन दूजा और न कोय। मीठे लागें वा के बोल। ऐ सखि साजन? ना सखि ढोल॥” |
| पहेली | किसी वस्तु का वर्णन बिना नाम लिए, ताकि सुनने वाला अनुमान लगाए। उत्तर एक ही होता है। | “एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा। चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे॥” — उत्तर : आकाश |
| दो-सुख़ने | दो अलग-अलग प्रश्न, जिनका उत्तर एक ही शब्द से मिल जाए — शब्द-चातुर्य का खेल। | प्रश्न — “गोश्त क्यों न खाया? डोम क्यों न गाया?” उत्तर — “गला न था।” (एक ही ‘गला’ दोनों का उत्तर।) |
संकलन कैसे बनाएँ — तरीक़ा:
- एक पतली कॉपी लीजिए और उसे चार भागों में बाँटिए — अनमेली, मुकरी, पहेली, दो-सुख़ने।
- सामग्री तीन जगहों से मिलेगी — (i) विद्यालय के पुस्तकालय की ‘अमीर खुसरो की पहेलियाँ’ जैसी पुस्तकें, (ii) घर के बड़े-बुज़ुर्ग, जिन्हें ये मौखिक रूप से याद हैं, (iii) शिक्षक की सहायता से इंटरनेट/एन.सी.ई.आर.टी. की सामग्री।
- हर रचना के साथ तीन बातें लिखिए — रचना, उसका उत्तर/अर्थ, और किस रूप की है।
- दादी-नानी से पूछना मत भूलिए — मुकरियाँ और पहेलियाँ आज भी सबसे अधिक मौखिक परंपरा में जीवित हैं, पुस्तकों में नहीं। जो आपको सुनाई जाए, उसे उन्हीं के शब्दों में लिखिए और नीचे बताने वाले का नाम लिखिए।
- अंत में कक्षा में ‘पहेली-दिवस’ रखिए — एक दल पहेली पूछे, दूसरा उत्तर दे।
खुसरो कौन थे: अमीर खुसरो (सन् 1253–1325) दिल्ली के फ़ारसी और हिंदवी (खड़ी बोली की आरंभिक रूप) के कवि थे, हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के शिष्य। उन्होंने साहित्य को दरबार से निकालकर आम लोगों की ज़बान तक पहुँचाया — इसीलिए उनकी पहेलियाँ और मुकरियाँ आज सात सौ वर्ष बाद भी गाँव-गाँव में जीवित हैं। पाठ में लेखक ने उन्हें ‘प्रतिभावान’ कहा है, और उनकी युक्ति उधार लेकर अपने दो विषयों को एक निबंध में समेट लिया।
ध्यान रहे: मौखिक परंपरा की रचनाओं के अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़े अलग पाठ मिलते हैं, और कुछ रचनाएँ खुसरो के नाम से जुड़ जाती हैं। इसलिए संकलन में जहाँ से आपने रचना ली है, वह स्रोत भी लिख दीजिए — यही ईमानदार अध्ययन का ढंग है।