गंगा अध्याय 2 गतिविधियाँ

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा॥” पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।
उत्तर

पहले तीनों रूपों का अंतर समझ लीजिए — तभी संकलन ठीक-ठीक बनेगा।

रूपपहचानपाठ/परंपरा से उदाहरण
अनमेली (अनमिली)असंगत, आपस में न मिलने वाली बातें जोड़कर हास्य पैदा करना। हर पंक्ति अलग विषय की, फिर भी छंद एक।“खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा॥” — इसी में चारों स्त्रियों के चारों विषय (खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल) आ गए।
मुकरी (कह-मुकरी)सखी अपनी सहेली से बात करती है। तीन पंक्तियों में ऐसा वर्णन कि लगे किसी प्रियजन की बात हो रही है, और अंत में वह ‘मुकर’ जाती है — “ना सखि, …!”“वो आवे तब शादी होय। उस बिन दूजा और न कोय।
मीठे लागें वा के बोल। ऐ सखि साजन? ना सखि ढोल॥”
पहेलीकिसी वस्तु का वर्णन बिना नाम लिए, ताकि सुनने वाला अनुमान लगाए। उत्तर एक ही होता है।“एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा।
चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे॥” — उत्तर : आकाश
दो-सुख़नेदो अलग-अलग प्रश्न, जिनका उत्तर एक ही शब्द से मिल जाए — शब्द-चातुर्य का खेल।प्रश्न — “गोश्त क्यों न खाया? डोम क्यों न गाया?” उत्तर — “गला न था।” (एक ही ‘गला’ दोनों का उत्तर।)
संकलन कैसे बनाएँ — तरीक़ा:
  1. एक पतली कॉपी लीजिए और उसे चार भागों में बाँटिए — अनमेली, मुकरी, पहेली, दो-सुख़ने।
  2. सामग्री तीन जगहों से मिलेगी — (i) विद्यालय के पुस्तकालय की ‘अमीर खुसरो की पहेलियाँ’ जैसी पुस्तकें, (ii) घर के बड़े-बुज़ुर्ग, जिन्हें ये मौखिक रूप से याद हैं, (iii) शिक्षक की सहायता से इंटरनेट/एन.सी.ई.आर.टी. की सामग्री।
  3. हर रचना के साथ तीन बातें लिखिए — रचना, उसका उत्तर/अर्थ, और किस रूप की है
  4. दादी-नानी से पूछना मत भूलिए — मुकरियाँ और पहेलियाँ आज भी सबसे अधिक मौखिक परंपरा में जीवित हैं, पुस्तकों में नहीं। जो आपको सुनाई जाए, उसे उन्हीं के शब्दों में लिखिए और नीचे बताने वाले का नाम लिखिए।
  5. अंत में कक्षा में ‘पहेली-दिवस’ रखिए — एक दल पहेली पूछे, दूसरा उत्तर दे।
खुसरो कौन थे: अमीर खुसरो (सन् 1253–1325) दिल्ली के फ़ारसी और हिंदवी (खड़ी बोली की आरंभिक रूप) के कवि थे, हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के शिष्य। उन्होंने साहित्य को दरबार से निकालकर आम लोगों की ज़बान तक पहुँचाया — इसीलिए उनकी पहेलियाँ और मुकरियाँ आज सात सौ वर्ष बाद भी गाँव-गाँव में जीवित हैं। पाठ में लेखक ने उन्हें ‘प्रतिभावान’ कहा है, और उनकी युक्ति उधार लेकर अपने दो विषयों को एक निबंध में समेट लिया।
ध्यान रहे: मौखिक परंपरा की रचनाओं के अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़े अलग पाठ मिलते हैं, और कुछ रचनाएँ खुसरो के नाम से जुड़ जाती हैं। इसलिए संकलन में जहाँ से आपने रचना ली है, वह स्रोत भी लिख दीजिए — यही ईमानदार अध्ययन का ढंग है।
प्र2.
कक्षा में ‘युवा और वृद्ध— दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर’ पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद के नियमों के लिए आप कक्षा 7 और 8 की पाठ्यपुस्तक मल्हार के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।
उत्तर

(क) आयोजन के नियम —

  1. कक्षा दो पक्षों में बँटे — पक्ष (युवा दृष्टि सही है) और विपक्ष (वृद्धों की दृष्टि सही है)। हर पक्ष में 3–4 वक्ता।
  2. हर वक्ता को दो मिनट; अंत में एक-एक मिनट का खंडन (rebuttal)।
  3. हर तर्क के साथ एक उदाहरण या प्रमाण देना अनिवार्य — बिना उदाहरण का तर्क नहीं गिना जाएगा।
  4. व्यक्ति पर नहीं, विचार पर बोलना है। किसी का उपहास करने पर अंक कटेंगे।
  5. एक अध्यक्ष (समय और अनुशासन) और तीन निर्णायक। अंक — विषय-ज्ञान 10, तर्क-शक्ति 10, भाषा और उच्चारण 5, हाव-भाव 5।
  6. अंत में पाँच मिनट का ‘मिलन-सत्र’ — दोनों पक्ष मिलकर बताएँ कि किन बातों पर वे सहमत हैं।

(ख) दोनों पक्षों के तर्क —

पक्ष : युवा दृष्टिविपक्ष : वृद्ध दृष्टि
“तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं” — हर सुधार युवा साहस से शुरू हुआ है। सती प्रथा हो या बालिका-शिक्षा, बदलाव पहले नई पीढ़ी ने माँगा।“वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक” — जो सिद्ध हो चुका है, उसे सँभालना भी उतना ही ज़रूरी है। हर पुरानी बात रूढ़ि नहीं होती; कुछ बातें परखी हुई बुद्धि होती हैं।
नई तकनीक, नई भाषा और नए काम युवा जल्दी सीखते हैं; समय बदल रहा है तो कौशल भी बदलने चाहिए।अनुभव वह चीज़ है जो किसी कक्षा में नहीं मिलती। संकट के समय ठहरकर सोचना बड़ों से ही सीखा जाता है।
वर्तमान से असंतोष ही प्रगति की जड़ है — पाठ कहता है कि इसी क्षोभ से “वर्तमान काल सदैव सुधारों का काल बना रहता है।”जल्दबाज़ी का निर्णय महँगा पड़ता है। भाव-विस्तार वाली पंक्ति यही कहती है — युवा “त्वरित निर्णय” चाहते हैं, वृद्ध “अनुभव और परंपरागत ढंग” पर विश्वास करते हैं।
युवा भविष्य में जिएँगे, इसलिए भविष्य का निर्णय उनकी बात सुनकर होना चाहिए।भविष्य अतीत की नींव पर ही खड़ा होता है; जड़ काटकर पेड़ ऊँचा नहीं किया जा सकता।
नमूना उत्तर — समापन वक्तव्य (दोनों पक्षों के बाद): “आदरणीय अध्यक्ष महोदय, दोनों पक्षों की बातें सुनकर मुझे लगता है कि यह प्रतियोगिता किसी एक के जीतने से पूरी नहीं होगी। हमारे पाठ ‘क्या लिखूँ?’ में लेखक ने बहुत सुंदर बात कही है — तरुण को भविष्य उज्ज्वल दिखता है और वृद्ध को अतीत सुखद, क्योंकि दोनों अपनी-अपनी दूरी से देख रहे हैं; और ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं।’ दोनों के स्वप्न सच्चे हैं और दोनों अधूरे भी। इससे भी बड़ी बात लेखक यह कहता है — ‘आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।’ यानी हम आज जिस पीढ़ी से बहस कर रहे हैं, कल हम स्वयं वही होंगे। इसलिए मेरा निवेदन है कि युवा से साहस लीजिए और वृद्ध से विवेक; निर्णय तेज़ हो, पर अनुभव की कसौटी पर कसा हुआ हो। यही दोनों पीढ़ियों की सच्ची जीत होगी। धन्यवाद।”
वाद-विवाद और वार्तालाप का अंतर: वाद-विवाद में आपको अपने पक्ष के लिए बोलना है, पर दूसरे पक्ष को सुनना भी उतना ही आवश्यक है — खंडन तभी अच्छा होता है जब आपने सामने वाले की बात ठीक-ठीक समझी हो। बहस जीतने का सबसे अच्छा तरीक़ा ऊँची आवाज़ नहीं, पक्का उदाहरण है।
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