गंगा अध्याय 2 भाषा संगम

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।” नीचे ‘निबंध’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। — निबंध (हिंदी); निबंधः (संस्कृत); निबंध (पंजाबी); मजमून (उर्दू); मजमून (कश्मीरी); मज्मूनु, निबंधु (सिन्धी); निबंध (मराठी); निबंध (गुजराती); निबंध (कोंकणी); निबंध (नेपाली); निबंध, प्रबंध (बांग्ला); निबंध-रचना (असमिया); निबंध, वाड़्डू (मणिपुरी); प्रबंध, रचना (ओड़िआ); व्यासमु (तेलुगु); कट्टुरै (तमिल); उपन्यासम् (मलयालम); लेख, प्रबंध (कन्नड़)। — इनके अतिरिक्त यदि आप ‘निबंध’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर

पुस्तक की सूची के अतिरिक्त ये शब्द भी जोड़े जा सकते हैं —

भाषा‘निबंध’ के लिए शब्दटिप्पणी
मैथिली / भोजपुरी / अवधी / छत्तीसगढ़ीनिबंधहिंदी प्रदेश की बोलियों में तत्सम रूप ही चलता है।
डोगरीनिबंध
बोडो / संतालीनिबंध (लिपि के अनुसार)संताली में ऑल-चिकी लिपि में लिखा जाता है।
अंग्रेज़ीessayफ़्रेंच essai से आया, जिसका अर्थ है ‘प्रयत्न, आज़माइश’।
फ़्रेंचessaiमानटेन की पुस्तक का नाम ही Essais (1580) था — इसी से यह विधा का नाम बना।
फ़ारसी / अरबीमज़मून (مضمون)उर्दू, कश्मीरी और सिन्धी में यही शब्द आया है।
सूची से क्या दिखता है — यह देखना ही असली अभ्यास है:
  • तीन परिवार साफ़ दिखते हैं। उत्तर-भारत की भाषाओं में संस्कृत से आया निबंध/प्रबंध चलता है; उर्दू-कश्मीरी-सिन्धी में फ़ारसी-अरबी से आया मज़मून; और दक्षिण की भाषाओं में उनके अपने शब्द — तेलुगु व्यासमु, तमिल कट्टुरै, मलयालम उपन्यासम्, कन्नड़ लेख/प्रबंध
  • शब्दों के भीतर अर्थ छिपा है। ‘निबंध’ = नि + बंध, यानी ‘भली-भाँति बँधा हुआ’ — यह बात पाठ में ही बताई गई है। तमिल ‘कट्टुरै’ में भी कट्टु का अर्थ ‘बाँधना’ और उरै का ‘कथन’ है — यानी बँधा हुआ कथन। दो अलग भाषा-परिवार, पर एक ही कल्पना!
  • एक ही शब्द के दो अर्थ। मलयालम का ‘उपन्यासम्’ हिंदी के ‘उपन्यास’ जैसा दिखता है, पर वहाँ उसका अर्थ ‘निबंध/प्रस्तुति’ है। इसीलिए किसी भाषा का शब्द केवल रूप देखकर नहीं, अर्थ पूछकर समझना चाहिए।
प्र2.
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए। (वाक्य — “निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।”)
उत्तर

यह काम हर विद्यार्थी को अपनी मातृभाषा में करना है — घर में जो भाषा बोली जाती है, उसी में। सहायता के लिए कुछ भाषाओं में यह वाक्य नीचे दिया गया है; इन्हें देखकर अपनी भाषा का वाक्य बनाइए और घर के बड़ों से जँचवा लीजिए।

भाषावाक्य
हिंदीनिबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।
संस्कृतनिबन्धं लिखितुं पूर्वं तस्य रूपरेखा रचनीया।
मराठीनिबंध लिहिण्यापूर्वी त्याची रूपरेषा तयार करून घ्यावी.
गुजरातीનિબંધ લખતાં પહેલાં તેની રૂપરેખા બનાવી લેવી જોઈએ.
पंजाबीਨਿਬੰਧ ਲਿਖਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਉਸ ਦੀ ਰੂਪਰੇਖਾ ਬਣਾ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ।
बांग्लाনিবন্ধ লেখার আগে তার রূপরেখা তৈরি করে নেওয়া উচিত।
उर्दूمضمون لکھنے سے پہلے اس کا خاکہ بنا لینا چاہیے۔
नेपालीनिबन्ध लेख्नुभन्दा पहिले त्यसको रूपरेखा बनाइलिनुपर्छ।
भोजपुरीनिबंध लिखे से पहिले ओकर रूपरेखा बना लेवे के चाहीं।
छत्तीसगढ़ीनिबंध लिखे के पहिली ओकर रूपरेखा बना लेना चाही।
करने का ढंग: पहले वाक्य को तीन टुकड़ों में तोड़िए — (1) ‘निबंध लिखने के पहले’, (2) ‘उसकी रूपरेखा’, (3) ‘बना लेनी चाहिए’। अब हर टुकड़े को अपनी भाषा में कहिए, फिर जोड़िए। इससे अनुवाद शब्द-दर-शब्द नहीं, भाव-दर-भाव होगा — और यही अच्छा अनुवाद है।
यह अभ्यास क्यों है: ‘भाषा संगम’ का उद्देश्य केवल अनुवाद कराना नहीं है। जब आप एक ही बात कई भारतीय भाषाओं में देखते हैं, तो दो बातें समझ में आती हैं — पहली, कि हमारी भाषाएँ अलग होकर भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं; और दूसरी, कि हर भाषा की अपनी वाक्य-रचना है (जैसे उर्दू में ‘मज़मून’ और ‘ख़ाका’ — शब्द बदले, पर बात वही रही)। यही भारत की भाषाई विविधता का पाठ है।
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