प्र1.
इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने-मधुर-मनमोहक। पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
पाठ से चुने गए ऐसे शब्द-समूह, उनका साझा भाव और वाक्य-प्रयोग —
| शब्द-समूह (पाठ से) | साझा भाव | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| विचार – मनन – चिंतन (पुस्तक का उदाहरण) | सोचना | इस विचार पर मैंने रात भर मनन किया, और सुबह तक चिंतन ने रास्ता दिखा दिया। |
| सुहावने – मधुर – मनमोहक (पुस्तक का उदाहरण) | जो अच्छा लगे | दूर के ढोल सुहावने लगते हैं, उनकी ध्वनि मधुर हो जाती है और पूरा दृश्य मनमोहक बन जाता है। |
| उमंग – स्फूर्ति – आवेग | भीतर उठने वाला वेग | मंच पर जाते समय मन में उमंग थी, शरीर में स्फूर्ति थी, और बोलते-बोलते ऐसा आवेग आया कि लिखा हुआ भाषण भूल ही गया। |
| विज्ञ – आचार्य – विद्वान | जानने वाला | इस विषय पर विज्ञ लोगों में मतभेद है; हमारे आचार्य की राय अलग है और नगर के दूसरे विद्वान उससे सहमत नहीं। |
| सम्मति – मत – राय | किसी के सोचने का पक्ष | पहले मैंने आचार्यों की सम्मति जानी, फिर अपने मित्रों का मत पूछा, और अंत में अपनी राय बनाई। |
| अनुसंधान – खोज – जाँच-पड़ताल | ढूँढ़ना | यदि समय होता तो पुस्तकालय में अनुसंधान कर लेता; अब तो जो खोज हो सकी, वही है — बाक़ी जाँच-पड़ताल बाद में। |
| कठिनता – कठिनाई – गुत्थी | अड़चन | प्रश्न की कठिनता मैं समझता हूँ; मेरी कठिनाई यह है कि इसकी गुत्थी कहीं से खुलती ही नहीं। |
| दुर्बोध – अस्पष्ट – गूढ़ | जो सहज समझ न आए | कविता दुर्बोध थी, उसका अर्थ अस्पष्ट रहा, पर शिक्षक ने उसका गूढ़ भाव खोलकर रख दिया। |
| पद्धति – प्रणाली – मार्ग | करने का ढंग | मानटेन की पद्धति सरल है; इसी प्रणाली से लिखने पर मुझे भी मार्ग मिल गया। |
| उल्लास – आनंद – प्रमोद | हर्ष | विवाह के घर में उल्लास था, बच्चों के मन में आनंद था और आँगन में प्रमोद की धूम मची थी। |
| कर्कश – कठोर – कटु | जो कड़ा और अप्रिय लगे | ढोल की कर्कश ध्वनि पास वालों को कठोर लगती है, पर दूर वाले को वह कटु प्रतीत ही नहीं होती। |
| कोलाहल – शोर – हल्ला | बहुत लोगों की मिली-जुली आवाज़ | बारात के कोलाहल में किसी की बात सुनाई नहीं दे रही थी; इतना शोर था कि माँ की आवाज़ भी हल्ले में डूब गई। |
| यथार्थ – सत्य – वास्तविक | जो सचमुच है | दूर से दिखने वाला चित्र सुंदर था, पर यथार्थ कुछ और निकला; सत्य सामने आया तो मैंने उसकी वास्तविक स्थिति समझी। |
| अनुभूति – अनुभव – संवेदना | भीतर होने वाला बोध | अच्छे निबंध में लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है; उसका अनुभव ही पढ़ने वाले के मन में संवेदना जगाता है। |
| तरुण – युवा – नवयुवक | जवान | तरुण भविष्य के स्वप्न देखते हैं; हर युवा बदलाव चाहता है, और यही नवयुवक समाज को आगे ले जाते हैं। |
| विषाद – उदासी – अवसाद | मन का भारीपन | विदाई के समय नव-वधू के मन में विषाद था; उसकी आँखों की उदासी देखकर सबका मन अवसाद से भर गया। |
पर पर्यायवाची पूरी तरह एक-से नहीं होते: यही इस अभ्यास की असली सीख है। ‘मधुर’ और ‘मनमोहक’ दोनों अच्छे लगने वाले हैं, पर मधुर कान के लिए है और मनमोहक मन के लिए। इसी तरह ‘कोलाहल’ में भीड़ का भाव है और ‘कलरव’ में मधुरता का — इसीलिए लेखक ने ढोल के साथ ‘आनंद का कलरव’ लिखा, ‘कोलाहल’ नहीं, जबकि घर के लिए ‘कोलाहल से पूर्ण घर’ लिखा। शब्द चुनते समय यही बारीक़ अंतर देखना चाहिए।