गंगा अध्याय 2 उपसर्ग एवं प्रत्यय

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

पहले नियम दोहरा लीजिए — उपसर्ग शब्द के आरंभ में लगता है (दुर् + बोध = दुर्बोध), और प्रत्यय शब्द के अंत में (सुधार + क = सुधारक)। दोनों अपने आप, अकेले प्रयोग नहीं होते।

(क) उपसर्ग वाले शब्द (निबंध से) —

शब्दउपसर्गमूल शब्दअर्थ-संकेत
दुर्बोध / दुर्बोधतादुर्बोधकठिनाई से समझ आने वाला
अनादिअन्आदिजिसका आरंभ न हो
अस्पष्टतास्पष्टताअभाव — स्पष्ट न होना
अज्ञज्ञजो जानता न हो
असंतोषसंतोषसंतोष का अभाव
प्रवाहप्रवाहआगे बहना
प्रगतिशीलप्रगतिआगे की गति
प्रयत्नप्रयत्नविशेष प्रयास
अनुभव / अनुभूतिअनुभव / भूतिपीछे-पीछे, साथ-साथ होना
अनुसंधानअनुसंधानखोज में पीछे लगना
अनुसरणअनुसरणपीछे चलना
विरोध / विवेचनाविरोध / वेचनाविशेष या विपरीत भाव
समावेशसम्आवेशसाथ-साथ आना, शामिल होना
सम्मति / संचितसम्मति / चितमिलकर, एक साथ
आवेग / आदेश / आग्रहवेग / देश / ग्रहओर, तक, पूर्णता
उत्थित / उत्पन्न / उल्लासउत्स्थित / पन्न / लासऊपर उठना
परिश्रमपरिश्रमचारों ओर से, पूरी तरह
निबंधनिबंधभली-भाँति बँधा हुआ
निर्माणनिर्माणपूरी तरह गढ़ना
प्रतीत / प्रतिभाप्रतिइत / भाओर, प्रत्येक, सामने

(ख) प्रत्यय वाले शब्द (निबंध से) —

शब्दमूल शब्दप्रत्ययक्या बना
सुधारकसुधारकरने वाला (कर्तृवाचक)
लेखकलेखलिखने वाला
निबंधकार / व्यंग्यकारनिबंध / व्यंग्यकाररचने वाला
समर्थक / संरक्षकसमर्थ / संरक्षसमर्थन/रक्षा करने वाला
कठिनाईकठिनआईभाववाचक संज्ञा
कठिनता / मधुरता / यथार्थता / दुर्बोधता / अस्पष्टताकठिन / मधुर / यथार्थ / दुर्बोध / अस्पष्टताभाववाचक संज्ञा
गंभीरता (गांभीर्य)गंभीरता / यगुण का भाव
लज्जाशील / प्रगतिशीललज्जा / प्रगतिशीलवैसा स्वभाव रखने वाला
प्रतिभावानप्रतिभावानजिसमें वह गुण हो
मनमोहकमनमोहमन मोह लेने वाला
मानसिक / सामाजिक / साहित्यिक / तार्किकमानस / समाज / साहित्य / तर्कइकसंबंध बताने वाला विशेषण
स्मरणीयस्मरणईयजिसे स्मरण किया जाए
सुहावनेसुहावनाअच्छा लगने वाला
लिपिबद्धलिपिबद्धलिपि में बँधा हुआ
पहचान का सूत्र: शब्द को बीच से पकड़िए — पहले मूल शब्द खोजिए (बोध, सुधार, कठिन, प्रगति)। जो उसके पहले जुड़ा है वह उपसर्ग, जो बाद में जुड़ा है वह प्रत्यय। कुछ शब्दों में दोनों एक साथ होते हैं — जैसे दुर्बोधता = दुर् (उपसर्ग) + बोध (मूल) + ता (प्रत्यय) और अस्पष्टता = अ + स्पष्ट + ता
प्र2.
नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए— • निबंध लिखना बड़ी ______ (कठिन…) की बात है। • वर्तमान से दोनों को ______ (…संतोष) होता है। • वाक्यों में कुछ ______ (…स्पष्ट…) भी चाहिए, क्योंकि यह ______ (…स्पष्ट…) या ______ (…बोध…) गांभीर्य ला देती है।
उत्तर

पूरे वाक्य इस प्रकार बनेंगे —

पूरा वाक्यभरा गया शब्दकैसे बना
निबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है।कठिनाईकठिन + आई (प्रत्यय) — विशेषण से भाववाचक संज्ञा बनी। (‘कठिनता’ भी शुद्ध है, पर वाक्य के प्रवाह में ‘कठिनाई’ ही स्वाभाविक लगता है।)
वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है।असंतोष (उपसर्ग) + संतोष — अभाव का अर्थ। पाठ की पंक्ति भी यही है — “वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है।”
वाक्यों में कुछ अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है।अस्पष्टता, अस्पष्टता, दुर्बोधताअस्पष्टता = + स्पष्ट + ता; दुर्बोधता = दुर् + बोध + ता। दोनों में उपसर्ग और प्रत्यय, दोनों लगे हैं।
पाठ से मिलान कीजिए: तीसरा वाक्य निबंध में ज्यों-का-त्यों आया है — “भाषा में अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है।” पर यह लेखक की अपनी राय नहीं, व्यंग्य है। वह दिखा रहा है कि विद्वत्ता का दिखावा करने वाले लोग जान-बूझकर कठिन लिखते हैं — जैसे श्रीहर्ष और सेनापति ने किया। स्वयं बख्शी की भाषा इस पूरे निबंध में सरल है। अभ्यास में शब्द भरते समय व्याकरण ठीक रखिए, पर बात का व्यंग्य भी समझिए।
ऐसे रिक्त स्थान भरने का तरीक़ा: कोष्ठक में दिया गया मूल शब्द देखिए, फिर वाक्य में उसकी ज़रूरत देखिए — संज्ञा चाहिए, विशेषण चाहिए या उलटा अर्थ चाहिए। ‘कठिन’ विशेषण है पर वाक्य में ‘की बात’ से पहले संज्ञा चाहिए, इसलिए ‘आई’ प्रत्यय लगा; ‘संतोष’ संज्ञा है पर वहाँ उलटा अर्थ चाहिए, इसलिए ‘अ’ उपसर्ग लगा।
प्र3.
नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है। — मधुर, सुधार, सुंदर, गति, समाज। उदाहरण— मधुर → मधुरता, मधुरमय, सुमधुर
उत्तर
मूल शब्दनए शब्दकैसे बने
मधुर (उदाहरण)मधुरता, मधुरमय, सुमधुरमधुर + ता; मधुर + मय; सु + मधुर
सुधारसुधारक, सुधारवादी, सुधारात्मक, कुसुधारसुधार + क (करने वाला); सुधार + वादी; सुधार + आत्मक; कु + सुधार (बिगाड़ने वाला सुधार)
सुंदरसुंदरता, सुंदरतम, असुंदर, सुंदरीसुंदर + ता; सुंदर + तम (सबसे अधिक); अ + सुंदर; सुंदर + ई (स्त्रीलिंग)
गतिगतिशील, गतिमान, प्रगति, दुर्गति, सद्गति, अगतिगति + शील; गति + मान; प्र + गति; दुर् + गति; सत् + गति; अ + गति
समाजसामाजिक, समाजवाद, समाजसेवी, असामाजिक, समाजशास्त्रसमाज + इक (‘स’ का ‘सा’ हो गया); समाज + वाद; समाज + सेवी; अ + सामाजिक; समाज + शास्त्र

अब इन्हें वाक्य में देखिए —

  • राजा राममोहन राय भारत के महान सुधारक थे।
  • ताजमहल की सुंदरता देखकर आँखें ठहर जाती हैं।
  • समय कभी नहीं रुकता, वह सदा गतिशील रहता है।
  • कूड़ा सड़क पर फेंकना एक असामाजिक काम है।
  • दादी की लोरी में ऐसी मधुरता थी कि बच्चा तुरंत सो गया।
एक बात ध्यान रखिए: उपसर्ग-प्रत्यय लगाते समय शब्द का रूप कभी-कभी बदल जाता है — समाज → सामाजिक, सत् + गति → सद्गति, दुर् + गति → दुर्गति। यह ध्वनि-परिवर्तन (संधि) है, भूल नहीं। इसलिए नया शब्द बनाकर एक बार बोलकर देखिए — यदि वह भाषा में सचमुच चलता है, तभी लिखिए।
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