गंगा अध्याय 2 व्याकरण की बात : समास

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। आपकी समझ के लिए एक उदाहरण तालिका में दिया गया है। (उदाहरण — सामासिक पद : निबंधशास्त्र, समास विग्रह : निबंध का शास्त्र, समास का नाम : तत्पुरुष समास) पाठ से अन्य उदाहरण चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

तालिका इस प्रकार भरी जाएगी। पहली पंक्ति पुस्तक की दी हुई है; शेष सब इसी पाठ से चुने गए हैं।

सामासिक पदसमास विग्रहसमास का नामपाठ में कहाँ
निबंधशास्त्रनिबंध का शास्त्रतत्पुरुष समास“निबंधशास्त्र के आचार्यों की सम्मति” (पुस्तक का उदाहरण)
निबंध-रचनानिबंध की रचनातत्पुरुष समास“निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा”
समाज-सुधारसमाज का सुधारतत्पुरुष समास“अमिता का आग्रह है कि मैं समाज-सुधार पर लिखूँ”
अतीत-गौरवअतीत का गौरवतत्पुरुष समास“वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक”
विश्वकोशविश्व का कोशतत्पुरुष समास“यहाँ न तो विश्वकोश है”
पुस्तकालयपुस्तक + आलय = पुस्तकों का आलय (घर)तत्पुरुष समास“पुस्तकालय में जाकर इस विषय का अनुसंधान कर लेता”
विवाहोत्सवविवाह + उत्सव = विवाह का उत्सवतत्पुरुष समास“किसी के विवाहोत्सव का चित्र अंकित कर लेता है”
मनोभावमन के भावतत्पुरुष समास“अपने मनोभावों को व्यक्त करने के लिए”
बाल्यावस्थाबाल्य + अवस्था = बाल्य की अवस्थातत्पुरुष समास“जो अपनी बाल्यावस्था और तरुणावस्था से दूर हट आए हैं”
लोकोक्तिलोक + उक्ति = लोक की उक्तितत्पुरुष समास“‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ एक लोकोक्ति है”
जीवन-संग्रामजीवन रूपी संग्रामकर्मधारय समास“संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं”
नव-वधूनव (नई) है जो वधूकर्मधारय समास“किसी लज्जाशील नव-वधू की कल्पना”
महात्मामहान् है जो आत्माकर्मधारय समास“स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी”
लज्जाशीललज्जा है शील (स्वभाव) जिसका — वह (नव-वधू)बहुव्रीहि समास“किसी लज्जाशील नव-वधू की कल्पना”
प्रगतिशीलप्रगति है शील जिसका — वह (जीवन)बहुव्रीहि समास“तभी तो यह जीवन प्रगतिशील माना गया है”
प्रतिभावानप्रतिभा है जिसमें — वह (व्यक्ति, अर्थात् खुसरो)बहुव्रीहि समास“अमीर खुसरो प्रतिभावान थे”
पंच-पात्रपाँच पात्रों का समूहद्विगु समासलेखक-परिचय — निबंध-संग्रह पंच-पात्र
त्रिवेणीतीन वेणियों (धाराओं) का समाहारद्विगु समासलेखक-परिचय — कहानी-संग्रह त्रिवेणी
हास्य-व्यंग्यहास्य और व्यंग्यद्वंद्व समास“अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है”
जाँच-पड़तालजाँच और पड़तालद्वंद्व समासशब्द-संपदा — ‘अनुसंधान’ का अर्थ
आस-पासआस और पासद्वंद्व समास“हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं”
नगर-नगरप्रत्येक नगर मेंअव्ययीभाव समास“सुधारकों का दल नगर-नगर और गाँव-गाँव में होता है”
गाँव-गाँवप्रत्येक गाँव मेंअव्ययीभाव समासवही पंक्ति
यथार्थयथा + अर्थ = अर्थ के अनुसार (जैसा सचमुच है)अव्ययीभाव समास“दूर रहने से हमें यथार्थता की कठोरता का अनुभव नहीं होता”
पहचानने का सरल तरीक़ा (छह भेद, छह प्रश्न):
  • तत्पुरुष — क्या बीच में कोई परसर्ग (का, के, की, से, के लिए, में) छिपा है और दूसरा पद प्रधान है? → हाँ, तो तत्पुरुष। जैसे निबंधशास्त्र = निबंध का शास्त्र
  • कर्मधारय — क्या पहला पद दूसरे का विशेषण है, या दोनों में उपमेय-उपमान का संबंध है? जैसे नव-वधू (नई वधू), जीवन-संग्राम (जीवन रूपी संग्राम)।
  • द्विगु — क्या पहला पद संख्यावाची है और अर्थ समूह का है? जैसे त्रिवेणी, पंच-पात्र
  • बहुव्रीहि — क्या अर्थ इन दोनों पदों में नहीं, किसी तीसरे में है? जैसे लज्जाशील — अर्थ ‘लज्जा’ या ‘शील’ नहीं, वह स्त्री है जिसमें लज्जा है।
  • द्वंद्व — क्या दोनों पद बराबर हैं और बीच में ‘और’ लग जाता है? जैसे जाँच-पड़ताल
  • अव्ययीभाव — क्या पूरा पद क्रिया-विशेषण जैसा काम कर रहा है, या वह पुनरुक्त है? जैसे यथार्थ, नगर-नगर
एक सावधानी: जीवन-संग्राम को यदि आप ‘जीवन का संग्राम’ मानें तो वह तत्पुरुष भी कहा जा सकता है। पर पाठ का भाव ‘जीवन रूपी संग्राम’ का है — यानी रूपक — इसलिए यहाँ कर्मधारय अधिक ठीक बैठता है। ऐसे शब्दों में विग्रह ही यह तय करता है कि समास कौन-सा है, इसलिए विग्रह हमेशा लिखिए।
ध्यान दीजिए: इस निबंध में द्विगु समास का कोई उदाहरण नहीं मिलता, इसलिए ऊपर दोनों उदाहरण पाठ के आरंभ में दिए गए लेखक-परिचय से लिए गए हैं। अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखते समय यह भी बता दीजिए कि उदाहरण कहाँ से लिया है — यही अच्छी अध्ययन-आदत है।
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