प्र1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है... असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है? (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना (ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना (ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना (घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
उत्तर
सही उत्तर — (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना।
यह उत्तर उपयुक्त क्यों है: यह दृष्टांत ए.जी. गार्डिनर के कथन को समझाने के लिए आया है। गार्डिनर कहते हैं कि लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है, जिसमें “विषय की चिंता नहीं रहती। कोई भी विषय हो, उसमें हम अपने हृदय के आवेग को भर ही देते हैं।” इसके ठीक बाद हैट-खूँटी का उदाहरण आता है और लेखक स्वयं उसका अर्थ खोल देता है — “इसी तरह मन के भाव ही तो यथार्थ वस्तु हैं, विषय नहीं।” यहाँ हैट = लेखक के मन के भाव (असली वस्तु) और खूँटी = विषय (केवल टाँगने का आधार)। जैसे हैट किसी भी खूँटी पर टँग सकता है, वैसे ही भाव किसी भी विषय के सहारे प्रकट हो सकते हैं। इसलिए यह दृष्टांत विषय की नहीं, भाव की प्रधानता उजागर करता है।
शेष विकल्प क्यों नहीं —
| विकल्प | निर्णय | कारण |
|---|---|---|
| (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता | सही ✓ | “असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं” का सीधा अनुवाद यही है — भाव असली, विषय गौण। |
| (ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री | ग़लत | दृष्टांत में तथ्य या सामग्री की बात है ही नहीं। उलटे लेखक आगे स्वीकार करता है कि उसके पास न विश्वकोश है, न कोई ग्रंथ — फिर भी वह लिखेगा। |
| (ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता | ग़लत | शैली और भाषा-व्यवस्था की चर्चा निबंध में बाद में, आचार्यों के प्रसंग में आती है। हैट-खूँटी वाला वाक्य उससे बहुत पहले, गार्डिनर के प्रसंग में आया है और उसका विषय ‘भाव बनाम विषय’ है। |
| (घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन | ग़लत | यह विकल्प बात को उलट देता है। यहाँ तो स्वयं एक उदाहरण देकर सिद्धांत समझाया जा रहा है; लेखक सिद्धांत-प्रधान लेखन का समर्थन कहीं नहीं करता — वह तो आगे शास्त्र की कसौटियों पर चुटकी लेता है। |
ध्यान दीजिए: ऐसे प्रश्न में उत्तर ढूँढ़ने का सबसे पक्का तरीक़ा यह है कि दृष्टांत के तुरंत बाद वाली पंक्ति पढ़िए — प्रायः लेखक स्वयं वहाँ उसका अर्थ खोल देता है, जैसे यहाँ खोला है।