प्र1.
पाठ में आए साहित्यकारों बाणभट्ट, श्रीहर्ष, अमीर खुसरो, सेनापति, महात्मा गांधी, ए.जी. गार्डिनर, शेक्सपीयर, मानटेन के विषय में पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर
खोजबीन शुरू करने से पहले यह तालिका देख लीजिए — इससे पता चल जाएगा कि किसे क्यों खोजना है, यानी पाठ में उसका नाम किस काम से आया है।
| साहित्यकार | काल / देश | पहचान और प्रमुख रचनाएँ | पाठ में किस संदर्भ में |
|---|---|---|---|
| बाणभट्ट | 7वीं शताब्दी, भारत (संस्कृत) | सम्राट हर्षवर्धन के दरबारी कवि। कादंबरी (गद्य-कथा) और हर्षचरित (ऐतिहासिक जीवनी) उनकी कृतियाँ हैं। उनकी गद्य-शैली लंबे समास और लंबे वाक्यों के लिए प्रसिद्ध है — कहावत ही है, “बाणोच्छिष्टं जगत्सर्वम्”। | “बाणभट्ट ने कादंबरी में ऐसे ही वाक्य लिखे हैं” — आधे पृष्ठ के लंबे वाक्य वाले व्यंग्य में। |
| श्रीहर्ष | 12वीं शताब्दी, भारत (संस्कृत) | महाकाव्य नैषधीयचरितम् के रचयिता; दार्शनिक ग्रंथ खंडनखंडखाद्य भी लिखा। उनकी शैली जान-बूझकर क्लिष्ट और पांडित्यपूर्ण मानी जाती है। | “श्रीहर्ष ने जान-बूझकर अपने काव्य में ऐसी गुत्थियाँ डाल दी हैं, जो अज्ञों से न सुलझ सकें।” |
| अमीर खुसरो | 1253–1325, दिल्ली | फ़ारसी और हिंदवी के कवि, संगीतज्ञ; हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के शिष्य। पहेलियाँ, मुकरियाँ, दो-सुख़ने और अनमेलियाँ लिखीं और आम जन की भाषा को साहित्य में जगह दी। | कुएँ पर चार स्त्रियों वाली कहानी — “एक ही पद्य में चारों की इच्छाओं की पूर्ति कर दी।” |
| सेनापति | 17वीं शताब्दी, रीतिकाल (ब्रजभाषा) | कवित्त रत्नाकर के रचयिता। ऋतु-वर्णन और अनुप्रास तथा यमक के चमत्कारपूर्ण प्रयोग के लिए प्रसिद्ध; इसी कारण उनकी कविता कठिन मानी जाती है। | “सेनापति ने भी अपनी कविता दुर्बोध कर दी है।” |
| महात्मा गांधी | 1869–1948, भारत | सत्य और अहिंसा के प्रयोक्ता; स्वतंत्रता-संग्राम के नेता और समाज-सुधारक। हिंद स्वराज तथा आत्मकथा सत्य के प्रयोग उनकी कृतियाँ हैं। | सुधारकों की सूची में — बुद्धदेव से लेकर गांधी तक। |
| ए.जी. गार्डिनर | 1865–1946, इंग्लैंड | अंग्रेज़ पत्रकार और निबंधकार; ‘Alpha of the Plough’ छद्म नाम से लिखते थे। Pebbles on the Shore और Leaves in the Wind उनके निबंध-संग्रह हैं। हल्के-फुल्के, आत्मीय निबंध उनकी विशेषता है। | निबंध का आरंभ ही उनके कथन से होता है — “लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है”; और शीर्षक बनाने की कठिनाई वाली बात भी उन्हीं की है। |
| शेक्सपीयर | 1564–1616, इंग्लैंड | अंग्रेज़ी के सबसे प्रसिद्ध नाटककार और कवि। हैमलेट, मैकबेथ, ओथेलो, किंग लियर उनकी त्रासदियाँ हैं और ऐज़ यू लाइक इट (‘जैसा तुम चाहो’) सुखांत नाटक। | “घबराकर नाम न रख सकने के कारण उन्होंने अपने एक नाटक का नाम रखा ‘जैसा तुम चाहो’।” |
| मानटेन (मिशेल द मॉन्तेन) | 1533–1592, फ़्रांस | आधुनिक निबंध-विधा के जनक। उनकी पुस्तक Essais (1580) से ही ‘essay’ शब्द चला — जिसका अर्थ है ‘प्रयत्न/आज़माइश’। उन्होंने अपने ही अनुभव, संदेह और आदतों पर लिखा। | “उस पद्धति के जन्मदाता मानटेन समझे जाते हैं… उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है।” |
खोजबीन कैसे कीजिए — तरीक़ा:
- विद्यालय के पुस्तकालय से आरंभ कीजिए — हिंदी साहित्य का इतिहास, विश्व साहित्य कोश और बाल-ज्ञानकोश में इन सबके संक्षिप्त परिचय मिल जाते हैं।
- इंटरनेट पर खोजते समय नाम के साथ पहचान भी लिखिए — जैसे केवल ‘सेनापति’ नहीं, ‘सेनापति रीतिकालीन कवि’। वरना दूसरा ही परिणाम आएगा।
- हर साहित्यकार के लिए अपनी कॉपी में चार पंक्तियाँ लिखिए — काल, भाषा, दो प्रमुख रचनाएँ, और एक विशेषता।
- अंत में एक समय-रेखा बनाइए — बाणभट्ट (7वीं सदी) → श्रीहर्ष (12वीं) → खुसरो (13वीं) → मानटेन और शेक्सपीयर (16वीं) → सेनापति (17वीं) → गार्डिनर और गांधी (20वीं)। इससे दिखेगा कि लेखक ने चौदह सौ वर्षों और तीन महाद्वीपों के लेखकों को एक छोटे-से निबंध में बुन दिया है।
यह ध्यान देने योग्य है: पाठ में इन नामों को दो विरोधी दलों में बाँटकर देखिए — एक ओर बाणभट्ट, श्रीहर्ष और सेनापति, जिनके सहारे लेखक कठिन-दुर्बोध शैली पर व्यंग्य करता है; दूसरी ओर गार्डिनर और मानटेन, जो सहज, आत्मीय और अनुभव-आधारित लेखन के पक्षधर हैं। लेखक की सहानुभूति स्पष्ट रूप से दूसरे दल के साथ है — और यही इस निबंध का छिपा हुआ पक्ष है।