गंगा अध्याय 1 मार्ग खोजेंगे कैसे?

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे।” 1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। उत्तर लिखते समय चार बातें रखिए — कहाँ भटके, कैसे भटके, क्या महसूस हुआ, और रास्ता कैसे मिला

नमूना उत्तर: “पिछले वर्ष हम परिवार के साथ एक बड़े मेले में गए थे। भीड़ में झूलों की ओर देखते-देखते मैं पिताजी से बिछड़ गया। पहले तो मुझे लगा कि वे पास ही होंगे, पर दो-तीन मिनट में चारों ओर अनजान चेहरे थे और मेरा गला सूखने लगा। पहले मन हुआ कि दौड़कर ढूँढ़ूँ, पर तभी मुझे विद्यालय में सिखाई बात याद आई — भटक जाओ तो दौड़ो मत, रुक जाओ। मैं वहीं एक बड़े खंभे के पास खड़ा हो गया, जो दूर से दिखता था। फिर मैंने आस-पास देखा और मुझे मेले का सूचना-केंद्र (announcement counter) दिखाई दिया। वहाँ बैठी महिला ने मेरा और पिताजी का नाम पूछकर ध्वनि-विस्तारक यंत्र से घोषणा कर दी। दस मिनट बाद पिताजी वहाँ पहुँच गए। उस दिन के बाद से मैंने अपने पिता का मोबाइल नंबर याद कर लिया है और जहाँ भी जाता हूँ, पहले यह देख लेता हूँ कि सूचना-केंद्र या पुलिस-सहायता केंद्र किधर है।”
कहानी से तुलना: हीरा-मोती के पास न नक्शा था, न भाषा — फिर भी वे अंत में घर पहुँचे। कैसे? पहचान के चिह्नों से — “वही खेत, वही बाग, वही गाँव मिलने लगे… इसी कुएँ पर हम पुर चलाने आया करते थे; यही कुआँ है।” रास्ता खोजने का सबसे पुराना तरीका यही है — जाने-पहचाने चिह्न ढूँढ़ना। इसीलिए किसी नई जगह जाते समय रास्ते के दो-तीन बड़े चिह्न (मंदिर, पुल, बड़ा पेड़, पेट्रोल पंप) याद कर लेने चाहिए।
प्र2.
2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए? कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए। (संकेत— ऑनलाइन मानचित्र, पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन, विद्यार्थी, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोर्डों पर लिखे पते, डाकघर आदि।)
उत्तर

भटक जाने पर सबसे बड़ी भूल है घबराकर चलते चले जाना — इससे आदमी और दूर निकल जाता है। सही क्रम यह है —

  1. रुकिए और शांत होइए। गहरी साँस लीजिए। जहाँ आप हैं, वहीं आस-पास कोई आपको ढूँढ़ रहा हो सकता है। हीरा-मोती की भूल यही थी — “तुम भी बेतहाशा भागे।”
  2. अपनी स्थिति पहचानिए। आस-पास के सूचना-पट, दुकानों के बोर्ड पर लिखे पते, गली का नाम, मील का पत्थर, बस-स्टॉप का नाम पढ़िए। इससे पता चल जाएगा कि आप किस मोहल्ले या गाँव में हैं।
  3. सुरक्षित व्यक्ति या स्थान चुनिए। सहायता के लिए सबसे भरोसेमंद क्रम — पुलिसकर्मी → विद्यालय → सरकारी भवन (डाकघर, बैंक, अस्पताल, पंचायत भवन, रेलवे/बस स्टेशन का पूछताछ केंद्र) → वर्दी पहने विद्यार्थी या शिक्षक → दुकानदार (दुकान के भीतर, अकेली सुनसान जगह नहीं) → बच्चों के साथ खड़ी कोई महिला
  4. सही जानकारी दीजिए। अपना नाम, अपने माता-पिता या अभिभावक का नाम, गाँव/मोहल्ले का नाम और मोबाइल नंबर बताइए। इसीलिए ये सब याद होने चाहिए, केवल फ़ोन में नहीं।
  5. तकनीक का प्रयोग कीजिए। फ़ोन हो तो ऑनलाइन मानचित्र में अपना गंतव्य डालिए और ‘लाइव लोकेशन’ अपने घर भेज दीजिए। आपातकालीन नंबर याद रखिए — 112 (सर्व-आपात), 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन), 100 (पुलिस)।
  6. ये काम कभी मत कीजिए — किसी अजनबी की गाड़ी में मत बैठिए, किसी के साथ सुनसान जगह मत जाइए, अपना पता लेकर आगे बढ़ने के बजाय किसी को अपने साथ चलने का आग्रह मत कीजिए, और अँधेरा होने पर चलते रहने के बजाय किसी सुरक्षित, रोशनी वाली सार्वजनिक जगह पर रुक जाइए।
सबसे ज़रूरी नियम: भटक जाने पर ‘चलते रहना’ नहीं, ‘सही व्यक्ति तक पहुँचना’ लक्ष्य है। दस कदम सही दिशा में पूछकर चलना, एक किलोमीटर अनुमान से चलने से बेहतर है।
Tip: छोटे बच्चों की जेब में माता-पिता का नाम और मोबाइल नंबर लिखी एक पर्ची रख देनी चाहिए। यात्रा पर निकलने से पहले परिवार में यह तय कर लीजिए कि बिछड़ जाने पर सब किस एक जगह इकट्ठा होंगे — यह छोटा-सा नियम बड़ी परेशानी बचा देता है।
प्र3.
3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।
उत्तर

यह विद्यालय में करने की गतिविधि है। इसे इस क्रम से कीजिए —

  1. मानचित्र ढूँढ़िए। निकासी मानचित्र (Evacuation Plan) प्रायः गलियारे, सीढ़ी के पास, कार्यालय के बाहर या हर मंज़िल के प्रवेश-द्वार पर लगा होता है।
  2. ‘आप यहाँ हैं’ बिंदु खोजिए। उस पर उँगली रखकर अपनी कक्षा तक पहुँचिए, फिर हरे तीरों का पीछा कीजिए।
  3. दो रास्ते याद कीजिए — एक मुख्य और एक वैकल्पिक। आग या मलबे के कारण मुख्य रास्ता बंद हो सकता है, इसलिए दूसरा जानना अनिवार्य है।
  4. इकट्ठा होने की जगह (Assembly Point) देखिए — प्रायः खेल का मैदान या खुला प्रांगण। वहीं उपस्थिति ली जाती है।
  5. अपनी कक्षा का नक्शा स्वयं बनाइए — कक्षा, दरवाज़ा, गलियारा, सीढ़ी, मुख्य द्वार, इकट्ठा होने का स्थान — और कक्षा की दीवार पर लगा दीजिए।
आपदाक्या करेंक्या न करें
आगपंक्ति बनाकर शांति से निकलें; धुआँ हो तो झुककर चलें; दरवाज़ा खोलने से पहले उसे छूकर देखें कि गरम तो नहीं।लिफ़्ट का प्रयोग न करें; बस्ता लेने वापस न जाएँ।
भूकंप‘झुको–ढँको–पकड़ो’ — मेज़ के नीचे जाएँ, सिर ढँकें; कंपन रुकने पर बाहर निकलें।कंपन के समय दौड़ें नहीं; खिड़की, अलमारी और पंखे के नीचे न खड़े हों।
बाढ़ / तेज़ वर्षाऊँची मंज़िल या ऊँचे स्थान पर जाएँ; शिक्षक के निर्देश का पालन करें।बहते पानी में उतरने की कोशिश न करें।
नमूना उत्तर: “मेरी कक्षा पहली मंज़िल पर, गलियारे के बाएँ छोर पर है। मानचित्र के अनुसार सबसे निकट का सुरक्षित मार्ग यह है — कक्षा से बाहर निकलकर दाईं ओर मुड़ना, बीस कदम पर बनी पश्चिमी सीढ़ी से नीचे उतरना, और मुख्य द्वार से निकलकर खेल के मैदान में बने ‘इकट्ठा होने के स्थान’ पर पहुँचना। यदि पश्चिमी सीढ़ी पर भीड़ या धुआँ हो, तो वैकल्पिक मार्ग है — बाईं ओर की पूर्वी सीढ़ी से उतरकर प्रयोगशाला के पिछले दरवाज़े से मैदान तक जाना। दोनों रास्तों में लगभग एक ही समय लगता है, इसलिए मैंने दोनों याद कर लिए हैं।”
यह प्रश्न इस पाठ के साथ क्यों: हीरा-मोती काँजीहौस में इसलिए फँसे रहे क्योंकि निकलने का रास्ता ही नहीं था — उन्हें दीवार गिरानी पड़ी। और भागते समय वे इसलिए भटके क्योंकि उन्होंने पहले से रास्ता नहीं पहचाना था। निकलने का रास्ता संकट आने पर नहीं खोजा जाता, पहले से जाना जाता है।
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