प्र1.
आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी (लिंक) पर जाकर भारतीय सांकेतिक भाषा सीख सकते हैं—
उत्तर
यह गतिविधि है — पुस्तक में दी गई कड़ी (QR/लिंक) खोलकर भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language – ISL) सीखिए। नीचे वह जानकारी दी जा रही है जो इस गतिविधि को अर्थपूर्ण बनाएगी।
- यह क्या है — ISL भारत के मूक-बधिर समुदाय की अपनी भाषा है। यह हिंदी या अंग्रेज़ी का ‘इशारों में अनुवाद’ नहीं है; इसका अपना व्याकरण, अपना वाक्य-क्रम और अपनी शब्द-रचना है। इसमें हाथ की मुद्रा, हाथ की स्थिति, गति, चेहरे के भाव और होंठों की हलचल — सब मिलकर अर्थ बनाते हैं।
- कौन सिखाता है — भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (ISLRTC), नई दिल्ली — यह भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है। इसने ISL का शब्दकोश भी तैयार किया है, जिसमें हज़ारों शब्दों के वीडियो हैं। NCERT की कई पाठ्यपुस्तकें अब ISL में भी उपलब्ध हैं।
- कहाँ से शुरू करें — पहले वर्णमाला (finger-spelling), फिर संख्याएँ, फिर रोज़ के शब्द — नमस्ते, धन्यवाद, हाँ, नहीं, माँ, पिता, विद्यालय, पानी, सहायता, मित्र। इसके बाद छोटे वाक्य।
- कक्षा में कैसे करें — हर सप्ताह पाँच नए संकेत सीखिए और उन्हें कक्षा में सबके सामने दिखाइए। एक ‘मूक-भाषा दिवस’ रखिए जिसमें आधे घंटे कक्षा में केवल संकेतों से बात हो — तब आप समझ पाएँगे कि बिना ध्वनि के बात करना कितना कठिन और कितना सुंदर है।
यह गतिविधि इस पाठ के साथ क्यों दी गई है: पूरी कहानी ‘मूक-भाषा’ पर टिकी है। पुस्तक यह याद दिलाना चाहती है कि जो बोल नहीं सकता, वह कह नहीं सकता — ऐसा मानना हमारी भूल है। हीरा-मोती की मूक-भाषा कल्पना है, पर भारतीय सांकेतिक भाषा वास्तविक है और लाखों लोगों की पूरी भाषा है। इसे सीखना केवल कौशल नहीं, संवेदनशीलता का काम है।
Try This: अपने नाम की ISL वर्तनी सीखकर उसे कक्षा में दिखाइए, और यह भी पता कीजिए कि आपके जिले में मूक-बधिर विद्यार्थियों के लिए कोई विद्यालय या संसाधन-केंद्र है या नहीं।