प्र1.
‘दो बैलों की कथा’ कहानी जिस समय लिखी गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेजों का दमनकारी शासन चल रहा था… इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए— (1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके।)
उत्तर
सही मिलान इस प्रकार है — 1→6, 2→5, 3→4, 4→2, 5→1, 6→3।
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव | मिलान का आधार |
|---|---|---|
| 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | 6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। | दोनों में एक ही बात है — बार-बार बंधन, फिर भी प्रयास न छोड़ना। हीरा डंडे खाकर मोटी रस्सी से बँध चुका है, फिर भी दीवार तोड़ने की बात कर रहा है। |
| 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। | यह असहयोग का सूत्र है — मृत्यु स्वीकार, पर शत्रु की सेवा नहीं। मोती यह बात दढ़ियल के संदर्भ में कहता है। |
| 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। | दोनों जगह एक ही पीड़ा है — अपने जीवन के मूल्य का न आँका जाना। यह कहानी का अंतिम संवाद है और सबसे कड़वा भी। |
| 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। | दोनों में विद्रोह अभी भीतर पक रहा है, फूटा नहीं। यह पंक्ति उस समय की है जब वे रोटियाँ खाकर भी भीतर-भीतर उबल रहे थे। |
| 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी। | दोनों में अपने ऊपर संकट लेकर दूसरों को मुक्त कराना है। मोती जानता था कि सुबह उसकी ‘खूब मरम्मत’ होगी, फिर भी उसने दीवार गिराई। |
| 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | 3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। | दोनों में बड़ी शक्ति के सामने छोटी शक्ति का साहस है — और दोनों में जीत संगठन से मिलती है, आकार से नहीं। |
मिलान करने की विधि: हर वाक्य में पहले क्रिया-भाव पहचानिए — क्या यह ‘न झुकना’ है, ‘असहयोग’ है, ‘अपमान’ है, ‘भीतरी विद्रोह’ है, ‘बलिदान’ है या ‘असमान युद्ध’ है? फिर दाईं ओर उसी भाव वाला वाक्य ढूँढ़िए। शब्द नहीं, भाव मिलाइए — यही ऐसे प्रश्नों का नियम है।
Did you know? इसी कारण प्रेमचंद की कहानियाँ अंग्रेजी शासन को खटकती थीं। उनके पहले कहानी-संग्रह सोज़े-वतन को सरकार ने जब्त कर लिया था और उनकी प्रतियाँ जला दी गई थीं। प्रेमचंद ने असहयोग आंदोलन में भाग लेने के लिए सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी।