गंगा अध्याय 1 मेरे उत्तर मेरे तर्क

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है? (क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता (ख) एकता और सहयोग (ग) गर्व और दंभ (घ) विद्रोह और क्रोध
उत्तर

सटीक उत्तर — (ख) एकता और सहयोग

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है: कहानी हीरा-मोती के संबंध को आरंभ से ही ‘भाईचारे’ के रूप में गढ़ती है — “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” काम बाँटने में भी वे होड़ नहीं करते, बल्कि एक-दूसरे का बोझ उठाना चाहते हैं — “हरएक की यही चेष्टा होती थी कि ज्यादा-से-ज्यादा बोझ मेरी ही गरदन पर रहे।” साँड़ से लड़ते समय दोनों की संगठित रणनीति ही जीत दिलाती है — “साँड़ को भी संगठित शत्रुओं से लड़ने का तजुरबा न था।” और काँजीहौस में मोती अपने बँधे मित्र को छोड़कर भागने से इनकार कर देता है — “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे हैं। आज तुम विपत्ति में पड़ गए, तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” यही एकता और सहयोग है।
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विताग़लतदोनों में होड़ नहीं। सींग मिलाना भी “विग्रह के नाते से नहीं, केवल विनोद के भाव से” होता है — यानी खेल है, स्पर्धा नहीं।
(ख) एकता और सहयोगसही ✓भाईचारा, मूक-भाषा से विचार-विनिमय, साँड़ के विरुद्ध संयुक्त योजना, और मित्र के लिए स्वयं मार खाना — सब इसी की ओर संकेत करते हैं।
(ग) गर्व और दंभग़लतदंभ तो कहानी में साँड़ का लक्षण है — “अपने घमंड में भूला हुआ है।” बैलों में स्वाभिमान है, दंभ नहीं।
(घ) विद्रोह और क्रोधग़लतविद्रोह और क्रोध कहानी में हैं ज़रूर, पर वे गया और मालकिन के प्रति हैं — हीरा-मोती के आपसी संबंध का गुण नहीं। प्रश्न ‘आपसी संबंध’ पूछ रहा है।
प्र2.
2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया? (क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया। (ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया। (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा। (घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
उत्तर

सटीक उत्तर — (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है: प्रेमचंद पहली ही रात का कारण खुद बता देते हैं — “बैलों को क्या मालूम, वे क्यों भेजे जा रहे हैं। समझे, मालिक ने हमें बेच दिया।” इसके तुरंत बाद उनकी कल्पित शिकायत आती है — “हमने तो तुम्हारी सेवा करने में कोई कसर नहीं उठा रखी… फिर तुमने हमें इस जालिम के हाथ क्यों बेच दिया?” यह भूख या रस्सी की शिकायत नहीं, आहत सम्मान की शिकायत है। इसीलिए नाँद में चारा रखे जाने पर भी “एक ने भी उसमें मुँह न डाला” — पेट भूखा था, पर मन भरा हुआ था।
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।ग़लतयह तो अस्वीकार का कारण बन ही नहीं सकता। और पहली रात नाँद लगाई तो गई, पर उन्होंने खुद ही मुँह न डाला।
(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।ग़लतमोटी रस्सी बाद में बाँधी गई — पहली बार भागने की सज़ा के रूप में। यह अस्वीकार का परिणाम है, कारण नहीं।
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।सही ✓पाठ में यही सोच शब्दशः दर्ज है, और उसी रात वे पगहे तुड़ाकर लौट जाते हैं।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।ग़लतकहानी में ऐसा कहीं नहीं है। पहली रात दोनों साथ ही थे — “दोनों ने अपनी मूक-भाषा में सलाह की… और लेट गए।”
प्र3.
3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया? (क) कष्टों से बचने के लिए (ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए (ग) अभिमान की रक्षा के लिए (घ) अपनापन पाने के लिए
उत्तर

सटीक उत्तर — (घ) अपनापन पाने के लिए

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है: यह प्रश्न कहानी के पहले पलायन के बारे में है। तब तक गया ने उन्हें मारा नहीं था, न भूखा रखा था; नाँद भी लगाई गई थी। फिर भी वे लौट गए। कारण प्रेमचंद स्वयं लिखते हैं — “जिसे उन्होंने अपना घर समझ रखा था, वह आज उनसे छूट गया था। यह नया घर, नया गाँव, नए आदमी, सब उन्हें बेगानों-से लगते थे।” ‘बेगाना’ का उलटा ही ‘अपना’ है। जिस दिशा में वे भागते हैं वह भी बताती है कि वे खुले जंगल की ओर नहीं, झूरी के द्वार की ओर जा रहे हैं। और लौटने पर जो मिलता है वह भी अपनापन ही है — “झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया। दौड़कर उन्हें गले लगा लिया।”
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) कष्टों से बचने के लिएग़लतपहली रात तक कोई कष्ट दिया ही नहीं गया था। कष्ट (सूखा भूसा, डंडे) तो लौटने के बाद शुरू होते हैं — और तब भी वे भागने की जगह डटे रहते हैं।
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिएआंशिक रूप से ठीक, पर यहाँ नहींयदि केवल स्वतंत्रता चाहिए होती, तो बंधन खुलते ही वे कहीं भी जा सकते थे। पर वे सीधे अपने ही थान पर आकर खड़े हो जाते हैं — यानी वे बंधन नहीं, पराया बंधन नहीं चाहते। स्वतंत्रता का भाव कहानी में आगे (मटर के खेत में) अलग से आता है।
(ग) अभिमान की रक्षा के लिएग़लतबैलों में स्वाभिमान है, अभिमान नहीं। अभिमान का अर्थ है घमंड — वह कहानी में साँड़ का गुण है, बैलों का नहीं।
(घ) अपनापन पाने के लिएसही ✓‘बेगानों-से लगते थे’ वाली पंक्ति सीधे इसी विकल्प की ओर ले जाती है; लौटने का गंतव्य भी घर ही है।
ध्यान दीजिए: कहानी में दो पलायन हैं। पहला (झूरी के घर लौटना) अपनापन पाने के लिए है; दूसरा (लड़की के गराँव खोलने पर) अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह और स्वतंत्रता के लिए है। प्रश्न में “घर लौटने का निर्णय” कहा गया है, इसलिए उत्तर पहले पलायन का है।
प्र4.
4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है? (क) स्वाभिमान (ख) अहिंसा (ग) पराधीनता (घ) अन्याय की रक्षा
उत्तर

सटीक उत्तर — (क) स्वाभिमान

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है: मोती अपनी मार पर नहीं भड़कता — वह तब भड़कता है जब “उस निर्दयी ने हीरा की नाक पर खूब डंडे जमाए”। यानी उसका क्रोध पीड़ा से नहीं, अपमान और अन्याय से जन्मा है। प्रेमचंद ने इससे ठीक पहले लिखा है — “आहत सम्मान की व्यथा तो थी ही, उस पर मिला सूखा भूसा।” ‘आहत सम्मान’ ही स्वाभिमान का दूसरा नाम है। और मोती की भाषा भी स्वाभिमानी की भाषा है — “मुझे मारेगा, तो मैं भी एक-दो को गिरा दूँगा!” वह डरकर नहीं, तनकर खड़ा होता है।
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) स्वाभिमानसही ✓आहत सम्मान से उपजा प्रतिकार; अपने और अपने मित्र के मान की रक्षा।
(ख) अहिंसाग़लतअहिंसा तो इस प्रसंग में हीरा का पक्ष है — “नहीं। हमारी जाति का यह धर्म नहीं है।” मोती इसके ठीक विपरीत खड़ा है।
(ग) पराधीनताग़लतपराधीनता का अर्थ है चुपचाप दासता मान लेना। मोती का आक्रोश तो पराधीनता के इनकार का प्रमाण है।
(घ) अन्याय की रक्षाग़लतमोती अन्याय की रक्षा नहीं, अन्याय का विरोध कर रहा है। यह विकल्प अर्थ की दृष्टि से ही उलटा है।
प्र5.
5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया? (क) कहानी को रोचक बनाने के लिए (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए (ग) संवादों को छोटा रखने के लिए (घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
उत्तर

सटीक उत्तर — (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है: ‘मूक-भाषा’ पहली बार जिस वाक्य में आती है, वह स्वयं इसका उद्देश्य बता देता है — “अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है।” यानी लेखक बैलों को मनुष्य से कम नहीं, कहीं-कहीं मनुष्य से ऊपर दिखा रहा है। मूक-भाषा में जो बातें होती हैं वे भी विचार के स्तर की हैं — धर्म, कायरता, अनाथ लड़की की चिंता, स्वार्थ, बलिदान। जैसे — “भागना कायरता है”, “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए”, “औरत जात पर सींग चलाना मना है”। ये किसी पशु की नहीं, एक चेतन नैतिक प्राणी की बातें हैं। यही चेतना कहानी को स्वतंत्रता आंदोलन का रूपक बनने लायक बनाती है।
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) कहानी को रोचक बनाने के लिएग़लत (अधूरा)रोचकता एक उप-परिणाम है, उद्देश्य नहीं। केवल रोचकता चाहिए होती तो संवाद हल्के-फुल्के होते, न कि धर्म और बलिदान पर बहस।
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिएसही ✓‘गुप्त शक्ति जिससे मनुष्य वंचित है’ वाली पंक्ति और संवादों का नैतिक स्तर, दोनों यही सिद्ध करते हैं।
(ग) संवादों को छोटा रखने के लिएग़लतमूक-भाषा वाले संवाद कहानी के सबसे लंबे और सबसे गहरे संवाद हैं — काँजीहौस वाला संवाद तो पूरा पृष्ठ घेरता है।
(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिएग़लतकहानी में व्यंग्य है, हास्य नहीं। मूक-भाषा के प्रसंग करुण और गंभीर हैं — “मोती ने आँखों में आँसू लाकर कहा…”।
प्र6.
6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं? (क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के (ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के (ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
उत्तर

सटीक उत्तर — (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है: पाठ की भूमिका में ही लिखा है कि प्रेमचंद ने इस कहानी में यह भी बताया है कि “स्वतंत्रता सहज ही नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है”, और इस प्रकार परोक्ष रूप से यह कहानी स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से जुड़ी है। हीरा-मोती वही करते हैं जो पराधीन जनता करती है — बार-बार बंधन तोड़ते हैं, बार-बार पकड़े जाते हैं, भूखे रहते हैं, मार खाते हैं, पर हार नहीं मानते। हीरा का वाक्य — “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ” — पूरे स्वाधीनता संघर्ष का सार है। और काँजीहौस की दीवार गिराकर नौ-दस दूसरे प्राणियों को छुड़ाना बताता है कि उनका संघर्ष केवल अपने लिए नहीं, सबके लिए है — जनता का संघर्ष यही होता है।
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) अंग्रेजों के क्रूर शासन केग़लतक्रूर शासन के प्रतीक गया, काँजीहौस और दढ़ियल हैं — शासित नहीं, शासक। हीरा-मोती तो उसके भोगी हैं।
(ख) पशुओं के योगदान केग़लतयह विकल्प रूपक को शब्दशः पढ़ लेता है। कहानी पशुओं के बारे में लिखी गई है, पर कही मनुष्यों की बात है।
(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन केग़लत (केवल आधा सच)हीरा अहिंसा का पक्ष लेता है, पर मोती साँड़ के पेट में सींग भोंकता है और दढ़ियल को खदेड़ता है। दोनों मिलकर अहिंसा + सशस्त्र प्रतिकार दोनों धाराओं को दिखाते हैं — इसलिए केवल ‘अहिंसा’ कहना अधूरा होगा।
(घ) भारतीय जनता के संघर्ष केसही ✓यह विकल्प दोनों धाराओं को समेट लेता है और पाठ की भूमिका की बात से अक्षरशः मेल खाता है।
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