गंगा अध्याय 3 भाषा संगम

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।” नीचे ‘तोता’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है — तोता (हिंदी); शुकः (संस्कृत); तोता (पंजाबी); तोता (उर्दू); तोतुं (कश्मीरी); तोतो (सिंधी); पोपट (मराठी); पोपट, सूडो (गुजराती); पोपट (कोंकणी); सुगा (नेपाली); तोता (बांग्ला); भाटौ (असमिया); तेनवा (मणिपुरी); शुआ, शुक (ओड़िआ); चिलुक (तेलुगु); किळि (तमिल); शुकम्, तत्त (मलयालम); गिळि (कन्नड़)। इनके अतिरिक्त यदि आप ‘तोता’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर

पहले पुस्तक की सूची को शब्द-परिवारों में बाँटकर देखिए — तब पता चलता है कि ये अलग-अलग शब्द नहीं, कुछ ही मूल शब्दों के रूप हैं।

शब्द-परिवारभाषाएँ और रूपटिप्पणी
‘तोता’ वर्गतोता (हिंदी, पंजाबी, उर्दू, बांग्ला); तोतुं (कश्मीरी); तोतो (सिंधी)उत्तर और पूर्व भारत में यही रूप फैला है।
‘शुक’ वर्ग (संस्कृत मूल)शुकः (संस्कृत); शुआ, शुक (ओड़िआ); शुकम्, तत्त (मलयालम)संस्कृत का शुक ही अनेक भाषाओं में उतरा है।
‘पोपट’ वर्गपोपट (मराठी, कोंकणी); पोपट, सूडो (गुजराती)पश्चिम भारत की भाषाओं में साझा रूप।
‘किळि/गिळि’ वर्गकिळि (तमिल); गिळि (कन्नड़); चिलुक (तेलुगु)दक्षिण की भाषाओं का अपना परिवार।
अन्यसुगा (नेपाली); भाटौ (असमिया); तेनवा (मणिपुरी)ये स्वतंत्र रूप हैं।

कुछ और भाषाओं में ‘तोता’ (आप अपनी जानकारी से और जोड़िए):

  • अंग्रेजी — parrot
  • मैथिली/भोजपुरी — सुग्गा / सुगा
  • अवधी — सुआ (कबीर और जायसी की कविताओं में ‘सुआ’ मिलता है)
  • राजस्थानी — तोतो / सूवो
  • डोगरी — तोता
  • संथाली — लाटका
पुस्तक में एक मुद्रण-त्रुटि: छपी सूची में लिखा है — “शुआ (शुक); (ओड़िआ)”। वास्तव में यह “शुआ, शुक (ओड़िआ)” होना चाहिए — कोष्ठक गलत जगह लग गया है, जिससे ‘शुक’ किसी भाषा के बिना रह जाता है।
यह गतिविधि क्यों दी गई है: एक ही पक्षी के इतने नाम यह दिखाते हैं कि भारत की भाषाएँ अलग-अलग होकर भी आपस में जुड़ी हैं। ‘शुक’ से ‘शुआ’ और ‘सुग्गा’ बनना भाषा-परिवर्तन का सुंदर उदाहरण है — शब्द यात्रा करते हैं और रास्ते में अपना रूप बदल लेते हैं
प्र2.
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर

मूल वाक्य (हिंदी): “वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।”

यह प्रश्न आपकी अपनी मातृभाषा माँगता है, इसलिए उत्तर हर विद्यार्थी का अलग होगा। नीचे कुछ भाषाओं में नमूने दिए हैं — इन्हें देखकर आप अपनी भाषा में लिखिए और कक्षा में सुनाइए।

भाषावाक्य
भोजपुरीऊ ना जाने कहाँ से एगो प्यारका पहाड़ी सुग्गा ले आइल रहे।
अवधीऊ न जाने कहाँ ते एक पियारा-सा पहाड़ी सुआ ले आवा रहा।
ब्रजवो न जानै कहाँ तैं एक प्यारो-सो पहाड़ी तोता लै आयो हतो।
राजस्थानीवो कठै सूँ ठा नीं एक प्यारो-सो पहाड़ी तोतो ले आयो हो।
मराठीतो कुठून कोण जाणे एक गोड-सा डोंगरी पोपट घेऊन आला होता.
बांग्लासे কোথা থেকে যেন একটা মিষ্টি পাহাড়ি তোতা নিয়ে এসেছিল। (से कोथा थेके जेनो एकटा मिष्टि पाहाड़ि तोता निये एसेछिलो।)
अंग्रेजीHe had brought, from goodness knows where, a lovely little hill parrot.
अनुवाद करते समय ध्यान दीजिए: ‘न जाने कहाँ से’ एक मुहावरेदार पदबंध है — इसका शब्दशः अनुवाद मत कीजिए, अपनी भाषा में जो वैसा ही भाव देता हो, वही लिखिए। इसी तरह ‘प्यारा-सा’ का ‘-सा’ लघुता और स्नेह दोनों जोड़ता है; अपनी भाषा का समकक्ष प्रत्यय खोजिए।
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