प्र1.
“वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।” नीचे ‘तोता’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है — तोता (हिंदी); शुकः (संस्कृत); तोता (पंजाबी); तोता (उर्दू); तोतुं (कश्मीरी); तोतो (सिंधी); पोपट (मराठी); पोपट, सूडो (गुजराती); पोपट (कोंकणी); सुगा (नेपाली); तोता (बांग्ला); भाटौ (असमिया); तेनवा (मणिपुरी); शुआ, शुक (ओड़िआ); चिलुक (तेलुगु); किळि (तमिल); शुकम्, तत्त (मलयालम); गिळि (कन्नड़)। इनके अतिरिक्त यदि आप ‘तोता’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर
पहले पुस्तक की सूची को शब्द-परिवारों में बाँटकर देखिए — तब पता चलता है कि ये अलग-अलग शब्द नहीं, कुछ ही मूल शब्दों के रूप हैं।
| शब्द-परिवार | भाषाएँ और रूप | टिप्पणी |
|---|---|---|
| ‘तोता’ वर्ग | तोता (हिंदी, पंजाबी, उर्दू, बांग्ला); तोतुं (कश्मीरी); तोतो (सिंधी) | उत्तर और पूर्व भारत में यही रूप फैला है। |
| ‘शुक’ वर्ग (संस्कृत मूल) | शुकः (संस्कृत); शुआ, शुक (ओड़िआ); शुकम्, तत्त (मलयालम) | संस्कृत का शुक ही अनेक भाषाओं में उतरा है। |
| ‘पोपट’ वर्ग | पोपट (मराठी, कोंकणी); पोपट, सूडो (गुजराती) | पश्चिम भारत की भाषाओं में साझा रूप। |
| ‘किळि/गिळि’ वर्ग | किळि (तमिल); गिळि (कन्नड़); चिलुक (तेलुगु) | दक्षिण की भाषाओं का अपना परिवार। |
| अन्य | सुगा (नेपाली); भाटौ (असमिया); तेनवा (मणिपुरी) | ये स्वतंत्र रूप हैं। |
कुछ और भाषाओं में ‘तोता’ (आप अपनी जानकारी से और जोड़िए):
- अंग्रेजी — parrot
- मैथिली/भोजपुरी — सुग्गा / सुगा
- अवधी — सुआ (कबीर और जायसी की कविताओं में ‘सुआ’ मिलता है)
- राजस्थानी — तोतो / सूवो
- डोगरी — तोता
- संथाली — लाटका
पुस्तक में एक मुद्रण-त्रुटि: छपी सूची में लिखा है — “शुआ (शुक); (ओड़िआ)”। वास्तव में यह “शुआ, शुक (ओड़िआ)” होना चाहिए — कोष्ठक गलत जगह लग गया है, जिससे ‘शुक’ किसी भाषा के बिना रह जाता है।
यह गतिविधि क्यों दी गई है: एक ही पक्षी के इतने नाम यह दिखाते हैं कि भारत की भाषाएँ अलग-अलग होकर भी आपस में जुड़ी हैं। ‘शुक’ से ‘शुआ’ और ‘सुग्गा’ बनना भाषा-परिवर्तन का सुंदर उदाहरण है — शब्द यात्रा करते हैं और रास्ते में अपना रूप बदल लेते हैं।