प्र1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? — 1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा? (क) अनुशासन और नियम के साथ जीना (ख) भय और संशय के साथ जीना (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना (घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
उत्तर
सही उत्तर — (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना।
यह उत्तर क्यों उपयुक्त है: प्रश्न स्वयं लता जी से पूछा गया था और उन्होंने अपने शब्दों में उत्तर भी दिया है — “सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा।” आगे वे पिता का वाक्य दोहराती हैं — “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” इसमें दोनों बातें एक साथ हैं — स्वाभिमान (किसी के आगे न झुकना) और सच्चाई (जो सही लगे, वही करना)। इसका प्रमाण उनके आचरण में भी है — “मैंने किसी से यह नहीं कहा कि आप मुझे पाँच सौ रुपये दीजिए… मुझे उसकी जरूरत है।” यानी यह सीख कहने भर की नहीं रही, जिया गया मूल्य बनी।
| विकल्प | निर्णय | कारण |
|---|---|---|
| (क) अनुशासन और नियम के साथ जीना | अधूरा | पिता का अनुशासन पाठ में है ज़रूर — “उनका सख्त अनुशासन था”, फिल्में देखने पर रोक थी। पर यह उनका स्वभाव था; प्रश्न यह है कि लता जी ने क्या सीखा। उस पर उनका अपना उत्तर ‘स्वाभिमान’ है, ‘अनुशासन’ नहीं। |
| (ख) भय और संशय के साथ जीना | ग़लत | पिता के गुस्से से बच्चे डरते ज़रूर थे, पर वह डर सम्मान का था और क्षणिक था — “अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।” लता जी ने कहीं संशय में जीना नहीं सीखा; उलटे उन्होंने निर्भय होकर खड़े रहना सीखा। |
| (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना | सही ✓ | लता जी का सीधा कथन — “सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा… जिंदगी में सही बातों पर खड़े रहने की हिम्मत मिली।” |
| (घ) चतुराई और संयम के साथ जीना | ग़लत | ‘चतुराई’ शब्द पाठ की भावना के विरुद्ध है। जो व्यक्ति ज़रूरत में भी हाथ न फैलाए, वह चतुराई नहीं, सिद्धांत से जीता है। |