प्र1.
साक्षात्कार से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं? चुनकर लिखिए— [दृढ़ता, कृतज्ञता, दार्शनिकता, समर्पण, उत्तरदायित्व, स्पष्टता, एकाग्रता, साधना, स्पष्टवादिता, विनम्रता, कठोरता, सरलता, आत्मविश्वास, उत्सवप्रियता, श्रद्धा, मानवता, अमरता, घमंड, स्वाभिमान] — 1. “मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।”
उत्तर
इस पंक्ति से उभरने वाले गुण — एकाग्रता, समर्पण, साधना (और इनके साथ उत्तरदायित्व भी)।
| गुण | पंक्ति में वह कहाँ दिखता है |
|---|---|
| एकाग्रता | “किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी” — ध्यान एक ही बिंदु पर टिका है, चारों ओर से हटकर। |
| समर्पण | पूरा दिन, पूरी शक्ति और पूरा मन एक ही काम को सौंप देना। |
| साधना | यह एक दिन की बात नहीं — “सुबह से रात तक” वर्षों तक चलने वाला अभ्यास। लगातार किया गया परिश्रम ही साधना कहलाता है। |
| उत्तरदायित्व | इसी अनुच्छेद में आगे कारण भी है — “हमेशा यही बात दिमाग में घूमती थी कि किसी तरह बस मुझे अपने परिवार को देखना है।” |
तर्क: इस वाक्य में लता जी अपने काम की तारीफ नहीं कर रहीं, केवल अपनी दिनचर्या बता रही हैं। जो व्यक्ति बिना बड़ाई किए यह कह दे कि काम के सिवा कुछ याद ही नहीं रहता था, उसके भीतर का समर्पण वाक्य से अपने आप झलक जाता है। ‘सुध न रहना’ मुहावरा ही एकाग्रता की चरम अवस्था का सूचक है।