गंगा अध्याय 4 शास्त्रीय संगीत

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
1. “फिर उसमें लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन की भी परंपरा थी।” रागदारी वाले गायन का अर्थ है भारतीय शास्त्रीय संगीत। आपने इस पाठ में संगीत से जुड़े अनेक शब्दों को पढ़ा है। शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों की सहायता से इनके अर्थ और उदाहरण खोजकर लिखिए— राग, सुर, बंदिश, अभंग, सोहर, फाग, बधावा
उत्तर

ये सातों शब्द एक ही संसार के हैं, पर दो अलग धाराओं के — पहले तीन शास्त्रीय संगीत के, और बाद के चार लोक संगीत के।

शब्दअर्थउदाहरण
रागस्वरों का वह नियमबद्ध क्रम जिससे एक विशेष भाव जगता है। हर राग के आरोह-अवरोह, वादी-संवादी स्वर और गाने का समय निश्चित होता है। पुस्तक की शब्द-संपदा में — “विशिष्ट ताल-लययुक्त ध्वनि, मन को प्रसन्न करना, प्रीति, अनुराग।”राग भैरव (प्रातःकाल), राग यमन (संध्या), राग मल्हार (वर्षा), राग जयजयवंती — पाठ के अनुसार पं. दीनानाथ मंगेशकर ने इसी राग का एक रेकॉर्ड बनाया था।
सुरसंगीत की मूल ध्वनि, स्वर। सात शुद्ध स्वर हैं — सा, रे, ग, म, प, ध, नि। ‘सुर में होना’ का अर्थ है ठीक ऊँचाई पर आवाज़ लगना।“जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है” — उस्ताद अली अकबर खाँ। पिताजी “एक राग गाते समय किसी भी सुर को षड्ज बनाकर” राग बदल देते थे।
बंदिशकिसी राग में ताल के साथ बँधी हुई रचना — शब्द, स्वर और ताल तीनों का बँधा हुआ रूप। इसी को ‘चीज़’ भी कहते हैं। बंदिश के दो हिस्से होते हैं — स्थायी और अंतरा।ख्याल गायकी में विलंबित और द्रुत — दो बंदिशें गाई जाती हैं। ‘बंदिश’ शब्द ही बताता है कि रचना किसी बंधन (ताल) में बँधी है।
अभंगमहाराष्ट्र का भक्तिगीत — विठोबा (विट्ठल) की स्तुति में मराठी में रचा गया छंद। संत ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ और तुकाराम इसके प्रमुख रचयिता हैं। ‘अभंग’ अर्थात् जो भंग न हो, अखंड।संत तुकाराम के अभंग। पाठ में ‘संत तुकाराम’ फिल्म का जो गीत आया है — ‘अमी जातो अमचा गावा, अमचा राम-राम ध्यावा’ — वह इसी परंपरा का है।
सोहरबच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला मंगलगीत। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में स्त्रियाँ इसे समूह में गाती हैं।जन्माष्टमी और रामनवमी पर ईश्वर के जन्म के कारण भी सोहर गाया जाता है — यह बात पाठ में साक्षात्कारकर्ता ने कही है।
फागफागुन मास में, विशेषकर होली पर गाया जाने वाला गीत; होली का राग-रंग। ब्रज और बुंदेलखंड में फाग-मंडलियाँ ढोलक-मंजीरे के साथ गाती हैं। इसी का एक भेद धमार है, जो चौदह मात्राओं की धमार ताल में गाया जाता है।“होली के मौके पर फाग और धमार” — पाठ की पंक्ति। ब्रज का प्रसिद्ध फाग — “होरी खेलन आयो श्याम…”
बधावामंगलाचार, बधाई का गीत; और बच्चे के जन्म आदि के अवसर पर भेजा जाने वाला उपहार भी। राजस्थान और मालवा में विवाह-जन्म के अवसर पर बधावा गाया जाता है।“जन्माष्टमी और रामनवमी में ईश्वर के जन्म के कारण सोहर और बधावा आदि गाने का मामला” — पाठ से।
ध्यान देने की बात: पहले तीन शब्द (राग, सुर, बंदिश) संगीत के व्याकरण के हैं — इन्हें सीखना पड़ता है, गुरु चाहिए। बाद के चार (अभंग, सोहर, फाग, बधावा) अवसर के गीत हैं — इन्हें कोई सिखाता नहीं, ये घर-आँगन में सुनकर आ जाते हैं। पाठ की खूबी यही है कि उसमें दोनों धाराएँ साथ चलती हैं — पिताजी की रागदारी भी है और मंगलागौर के गीत भी।
प्र2.
2. “त्योहारों के संदर्भ में एक बात और ध्यान में आती है कि अधिकांश प्रदेशों में पर्वों व अनुष्ठानों से संदर्भित घर-घर गीत गाए जाने का प्रचलन रहा है।” आपने पढ़ा कि भारत में त्योहारों पर फाग, धमार, सोहर, बधावा, छठ के गीत आदि गाने की परंपरा है। अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले ऐसे गीतों के विषय में अपने घर में पता कीजिए और एक गीत अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

यह खोज-कार्य है, इसलिए उत्तर आपके अपने क्षेत्र का होगा। कैसे कीजिए —

  1. घर की सबसे बुज़ुर्ग महिला सदस्य से पूछिए — वे प्रायः इन गीतों की सबसे बड़ी जानकार होती हैं।
  2. पूछिए कि यह गीत किस अवसर पर गाया जाता है, कौन गाता है, और उसमें कौन-सा वाद्य बजता है।
  3. गीत को बोलकर गवाइए और साथ-साथ लिखिए। जो शब्द समझ न आएँ, उनका अर्थ भी वहीं पूछ लीजिए — लोकगीतों में पुराने और क्षेत्रीय शब्द बहुत होते हैं।
  4. हो सके तो मोबाइल से रिकॉर्ड कर लीजिए, ताकि लय भी सुरक्षित रहे। लोकगीत का आधा सौंदर्य उसकी लय में होता है।
  5. अंत में लिखिए — गीत का नाम, अवसर, भाषा/बोली, गाने वाले का नाम और आपको उसमें सबसे अच्छी लगी पंक्ति।

अपने क्षेत्र के गीत खोजने के लिए संकेत-सूची —

क्षेत्रलोकगीतअवसर
ब्रज / बुंदेलखंडफाग, रसिया, धमारहोली, फागुन
अवध / भोजपुरसोहर, कजरी, बिरहा, चैताजन्म, सावन, विरह, चैत
बिहारछठ के गीतछठ पूजा
राजस्थान / मालवाबधावा, बन्ना-बन्नी, माँडविवाह, जन्म
महाराष्ट्रमंगलागौर के गीत, अभंग, ओवी, लावणीनई बहू का स्वागत, भक्ति, श्रम
पंजाबसुहाग, घोड़ियाँ, बोलियाँविवाह, वैसाखी
गुजरातगरबा, रास के गीतनवरात्रि
असम / बंगालबिहू गीत, भटियालीबिहू, नाव खेते समय
उत्तराखंड / हिमाचलमंगल गीत, झोड़ा, नाटीविवाह, मेले

नमूना उत्तर (ब्रज क्षेत्र का प्रचलित फाग):

“होरी खेलन आयो श्याम आधी रात,
भर पिचकारी सन्मुख मारी, अँगिया भिजोय गयो सारी…”

अवसर — होली / फागुन का मास। कौन गाता है — मोहल्ले की फाग-मंडली, स्त्री और पुरुष अलग-अलग टोलियों में। वाद्य — ढोलक, मंजीरा, झाँझ। भाव — कृष्ण और राधा की होली का चंचल वर्णन, जिसमें हँसी-ठिठोली और रंग की उमंग है।
यह काम क्यों ज़रूरी है: लोकगीत किसी पुस्तक में नहीं, स्मृति में रहते हैं — इसीलिए वे उस पीढ़ी के साथ चले जाते हैं जो उन्हें जानती है। लता जी ने यही चिंता जताई थी — “आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।” आपका लिखा हुआ एक गीत भी उस परंपरा को कुछ वर्ष और जीवित रख सकता है।
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