गंगा अध्याय 4 साइबर सुरक्षा

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“आज, जो स्थिति है और जिस तरह हमारी तकनीक विकसित हो चुकी है, उसमें अगर इन लोगों को काम करने का मौका मिलता, तब तो कमाल ही हो गया होता।” • आज तकनीकी विकास इतना अधिक हो चुका है कि अनेक धोखेबाज/ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग करके अपनी आवाज़ बदलकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि साइबर सुरक्षा नियमों का प्रयोग करते हुए इस प्रकार की धोखाधड़ी से किस प्रकार बचा जा सकता है?
उत्तर

पहले समझिए कि यह ठगी होती कैसे है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आज किसी व्यक्ति की थोड़ी-सी रिकॉर्ड की गई आवाज़ से उसकी हूबहू नकली आवाज़ बना सकती है — इसे ‘वॉइस क्लोनिंग’ कहते हैं। ठग किसी के सोशल मीडिया वीडियो से आवाज़ उठाते हैं, फिर उसके परिजन को फोन करके रोती हुई आवाज़ में कहते हैं — “मैं मुसीबत में हूँ, तुरंत पैसे भेजो।” घबराहट में लोग जाँच किए बिना पैसे भेज देते हैं।

बचाव के नियम —

नियमकैसे काम करता है
1. घबराइए नहीं, रुकिएहर ठगी की पहली शर्त जल्दबाजी है — “अभी भेजो, किसी को बताना मत।” जहाँ यह वाक्य सुनाई दे, वहीं समझ लीजिए कि कुछ गड़बड़ है। दो मिनट रुकना ही आधा बचाव है।
2. फोन काटकर स्वयं मिलाइएउसी नंबर पर उत्तर मत दीजिए। फोन काटिए और अपने पास सुरक्षित रखे उस व्यक्ति के असली नंबर पर स्वयं कॉल कीजिए। नकली आवाज़ आपका किया हुआ कॉल नहीं उठा सकती।
3. परिवार का ‘गुप्त शब्द’ (कोड वर्ड) तय कीजिएघर में एक ऐसा शब्द या प्रश्न तय रखिए जो केवल परिवार जानता हो — जैसे “दादी के गाँव का नाम क्या है?” संकट के फोन पर वही पूछिए। आवाज़ नकली हो सकती है, स्मृति नहीं।
4. ओ.टी.पी., पासवर्ड और बैंक विवरण कभी न बताइएकोई भी सच्चा बैंक, पुलिस या सरकारी कार्यालय फोन पर ओ.टी.पी. नहीं माँगता। यह नियम बिना अपवाद है।
5. अनजान लिंक और ऐप से बचिए‘लॉटरी लगी है’, ‘केवाईसी अपडेट करें’, ‘बिजली कटने वाली है’ — इन संदेशों के लिंक मत खोलिए। ऐप केवल आधिकारिक स्टोर से ही लीजिए, और स्क्रीन-शेयरिंग वाले ऐप किसी के कहने पर बिलकुल मत डालिए।
6. अपनी आवाज़ और तस्वीरें सोच-समझकर साझा कीजिएसार्वजनिक खातों पर ढेर सारे वीडियो डालना ठगों को कच्चा माल देना है। खाते ‘प्राइवेट’ रखिए और अनजान लोगों की मित्रता-विनती स्वीकार मत कीजिए।
7. वीडियो कॉल पर भी सतर्क रहिएअब चेहरा तक बदला जा सकता है (डीपफेक)। यदि चित्र में पलक झपकना, होंठों की हरकत या आवाज़ का मेल अजीब लगे, तो कॉल काटकर सत्यापन कीजिए।
8. तुरंत शिकायत कीजिएठगी हो जाए तो 1930 (राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन) पर फोन कीजिए या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कीजिए, और अपने बैंक को सूचित कीजिए। पहला घंटा सबसे कीमती होता है — इसे ‘गोल्डन आवर’ कहते हैं।
9. घर के बड़ों को बताइएऐसी ठगी के सबसे आसान शिकार बुज़ुर्ग होते हैं। उन्हें ये नियम सरल भाषा में समझाना विद्यार्थियों का काम है।
पाठ से इसका क्या संबंध है: लता जी की पहचान ही उनकी आवाज़ थी — “मेरी आवाज़ ही पहचान है!” जिस युग में तकनीक किसी की भी आवाज़ की नकल बना सकती है, उस युग में यह प्रश्न और गहरा हो जाता है कि पहचान की रक्षा कैसे हो। लता जी तकनीक के विरोध में नहीं थीं — वे कहती हैं कि पुराने संगीतकारों को आज की तकनीक मिलती तो “कमाल ही हो गया होता।” तकनीक बुरी नहीं होती; उसका दुरुपयोग बुरा होता है। इसलिए उत्तर तकनीक छोड़ना नहीं, सावधानी सीखना है।
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