गंगा अध्याय 5 मेरे देश की धरती

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
कन्याकुमारी भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित एक तटीय शहर है जिसके प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण पाठ में हुआ है। 1. भारत के समुद्री तट पर स्थित अन्य राज्यों के नाम तथा उनकी अवस्थिति को भारत के मानचित्र पर चिह्नित कीजिए।
उत्तर

भारत की मुख्य भूमि की तटरेखा गुजरात से शुरू होकर पश्चिम बंगाल तक जाती है। द्वीपों को मिलाकर भारत की कुल तटरेखा लगभग 7,516 किलोमीटर लंबी है। तट पर स्थित नौ राज्य और चार संघ राज्य क्षेत्र हैं।

क्रमराज्य / संघ राज्य क्षेत्रकौन-सा समुद्रअवस्थिति (कहाँ है)
1गुजरातअरब सागरसबसे उत्तर-पश्चिम में; कच्छ की खाड़ी और खंभात की खाड़ी इसी के तट पर। भारत के किसी भी राज्य से लंबी तटरेखा।
2महाराष्ट्रअरब सागरगुजरात के दक्षिण में, कोंकण तट।
3गोवाअरब सागरमहाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच; सबसे छोटा तटीय राज्य।
4कर्नाटकअरब सागरकनारा तट।
5केरलअरब सागरमालाबार तट; पश्चिमी तट का दक्षिणतम राज्य, कन्याकुमारी के पड़ोस तक।
6तमिलनाडुबंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और (कन्याकुमारी के पास) अरब सागरप्रायद्वीप का दक्षिणी सिरा; कन्याकुमारी इसी राज्य में है। कोरोमंडल तट।
7आंध्र प्रदेशबंगाल की खाड़ीतमिलनाडु के उत्तर में, पूर्वी तट।
8ओडिशाबंगाल की खाड़ीपूर्वी तट; चिल्का झील और कोणार्क इसी तट पर।
9पश्चिम बंगालबंगाल की खाड़ीसबसे उत्तर-पूर्व में; गंगा-डेल्टा और सुंदरबन।
10दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव (सं.रा.क्षेत्र)अरब सागरगुजरात और महाराष्ट्र के तट पर बिखरे हुए भाग।
11पुदुच्चेरी (सं.रा.क्षेत्र)बंगाल की खाड़ी और अरब सागरपुदुच्चेरी और कराइकल तमिलनाडु के तट पर, यनम आंध्र प्रदेश के तट पर, माहे केरल के तट पर।
12लक्षद्वीप (सं.रा.क्षेत्र)अरब सागरकेरल के पश्चिम में प्रवाल द्वीपों का समूह।
13अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (सं.रा.क्षेत्र)बंगाल की खाड़ीदेश के दक्षिण-पूर्व में; भारत का दक्षिणतम बिंदु इंदिरा पॉइंट यहीं (ग्रेट निकोबार) है।
मानचित्र पर चिह्नित करते समय ये चार बातें ध्यान रखिए:
  1. पहले दो तट अलग-अलग रंग से भरिए — पश्चिमी तट (गुजरात से केरल तक, अरब सागर) और पूर्वी तट (तमिलनाडु से पश्चिम बंगाल तक, बंगाल की खाड़ी)।
  2. तीनों जल-राशियों के नाम अवश्य लिखिए — अरब सागर (पश्चिम), बंगाल की खाड़ी (पूर्व), हिंद महासागर (दक्षिण)।
  3. प्रायद्वीप के सिरे पर कन्याकुमारी को तारे से चिह्नित कीजिए और लिखिए — ‘तीनों का संगम-स्थल’।
  4. द्वीप-समूहों को भूलिए मत — लक्षद्वीप को पश्चिम में और अंडमान-निकोबार को पूर्व में अलग खाने (inset) में दिखाइए।
याद रखने का सरल क्रम: पश्चिम से दक्षिण होते हुए पूर्व की ओर — गु–म–गो–क–के–त–आ–ओ–प (गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल)।
प्र2.
2. यात्रा करना सभी को अच्छा लगता है। आपके मन में भी कुछ जगहों को देखने की इच्छा अवश्य हुई होगी। अपनी पसंद की उन जगहों की सूची नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार बनाइए। (पर्यटन स्थल / राज्य जहाँ वह स्थित है / पर्वतीय-समुद्री-मैदानी-अन्य क्षेत्र / जलवायु / घूमने का अनुकूल समय)
उत्तर

पुस्तक ने तालिका खाली छोड़ी है। नीचे वही तालिका पूरी भरकर दी गई है — इसमें हर तरह का क्षेत्र (पर्वतीय, समुद्री, मैदानी, मरुस्थलीय, पठारी, वन) आ जाए, इसका ध्यान रखा गया है। आप इसे देखकर अपनी पसंद की सूची बना सकते हैं।

पर्यटन स्थलराज्य जहाँ वह स्थित हैपर्वतीय / समुद्री / मैदानी / अन्य क्षेत्रजलवायुघूमने का अनुकूल समय
कन्याकुमारीतमिलनाडुसमुद्री (तीन सागरों का संगम)उष्ण-आर्द्र, वर्ष भर लगभग एक-सा तापमानअक्टूबर से मार्च
शिमलाहिमाचल प्रदेशपर्वतीयशीतोष्ण; सर्दियों में हिमपातमार्च से जून (हिमपात के लिए दिसंबर–जनवरी)
लेह–लद्दाखलद्दाख (संघ राज्य क्षेत्र)पर्वतीय (शीत-मरुस्थल)अत्यधिक ठंडी और शुष्क; बहुत कम वर्षाजून से सितंबर (शेष महीनों में दर्रे बंद)
गोवा (कलंगुट, पणजी)गोवासमुद्रीउष्ण-आर्द्र; जून–सितंबर तेज़ मानसूननवंबर से फरवरी
पुरी और कोणार्कओडिशासमुद्रीउष्ण-आर्द्र; चक्रवात की आशंकाअक्टूबर से फरवरी (रथयात्रा आषाढ़ में)
जैसलमेरराजस्थानमरुस्थलीयअत्यंत गर्म-शुष्क ग्रीष्म, ठंडी रातेंनवंबर से फरवरी
आगरा (ताजमहल)उत्तर प्रदेशमैदानीअति गर्म ग्रीष्म, ठंडा शीतअक्टूबर से मार्च
वाराणसीउत्तर प्रदेशमैदानी (गंगा तट)गर्म ग्रीष्म, आर्द्र वर्षा, ठंडा शीतअक्टूबर से मार्च (देव दीपावली कार्तिक में)
काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यानअसमवन एवं मैदानी (ब्रह्मपुत्र घाटी)आर्द्र, भारी वर्षानवंबर से अप्रैल (मानसून में उद्यान बंद)
खजुराहोमध्य प्रदेशपठारी (बुंदेलखंड)गर्म-शुष्क ग्रीष्म, सुहावना शीतअक्टूबर से मार्च
अंडमान (पोर्ट ब्लेयर, हैवलॉक)अंडमान और निकोबार द्वीप समूहसमुद्री (द्वीपीय)उष्ण-आर्द्र, भारी वर्षादिसंबर से अप्रैल
ऋषिकेशउत्तराखंडपर्वतीय-तराई (गंगा तट)सुहावना; ग्रीष्म में ठंडा, वर्षा में भूस्खलनसितंबर से नवंबर तथा फरवरी से मई
‘घूमने का अनुकूल समय’ तय करने का नियम: तीन बातें देखिए — (1) मौसम : अत्यधिक गर्मी, बर्फ़ या मानसून वाले महीने छोड़िए; (2) पहुँच : पहाड़ों में दर्रे और वन्य-उद्यान वर्षा-ऋतु में बंद रहते हैं; (3) आयोजन : रथयात्रा, देव दीपावली या पुष्कर मेला जैसे अवसर उस स्थान को बिलकुल बदल देते हैं। और यह भी याद रखिए कि जिस समय भीड़ सबसे कम हो, वही समय अकसर देखने के लिए सबसे अच्छा होता है — ठीक वैसे ही जैसे लेखक भीड़ वाली सैंड हिल छोड़कर आगे बढ़ गया था।
प्र3.
3. कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति, परिवेश, महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल एवं जन-जीवन का वर्णन करते हुए बताइए कि वहाँ की स्थिति आपके राज्य अथवा शहर/गाँव से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर

क. भौगोलिक स्थिति — कन्याकुमारी भारत के तमिलनाडु राज्य के सबसे दक्षिणी छोर पर बसा तटीय शहर है। यही भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिंदु है। यहाँ तीन जल-राशियाँ मिलती हैं — पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में हिंद महासागर। पाठ में लेखक ने ठीक यही बात लिखी है — “अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी — इन तीनों के संगम-स्थल-सी वह चट्टान…”।

ख. परिवेश — समुद्र में से उभरी हुई स्याह चट्टानें, ऊँची-ऊँची लहरें, रेत के टीले (सैंड हिल), दूर-दूर हटकर उगे नारियल के झुरमुट, तट के साथ-साथ चलती सूखी पहाड़ियों की शृंखला, और तट पर बिछी कई-कई रंगों वाली रेत। यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण है — एक ही स्थान से समुद्र में सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों देखा जा सकना। पाठ की पहली ही पंक्ति यही कहती है — “कन्याकुमारी। सुनहले सूर्योदय और सूर्यास्त की भूमि।”

ग. महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल —

  • विवेकानंद स्मारक चट्टान — तट से सौ-सवा-सौ गज भीतर समुद्र में; इसी पर स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी।
  • कन्याकुमारी (भगवती अम्मन) मंदिर — “मंदिर की लाल और सफेद लकीरें”, जिनकी चर्चा पाठ में है।
  • तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा — पड़ोस की चट्टान पर (यह लेखक की यात्रा के बहुत बाद, सन् 2000 में बनी)।
  • सैंड हिल, गांधी स्मारक मंडपम और सूर्यास्त-बिंदु

घ. जन-जीवन — मछली पकड़ना और नाव खेना (चार मल्लाह), शंख-मालाओं जैसे हस्तशिल्प बेचना (दो स्थानीय नवयुवतियाँ), होटल-गेस्ट हाउस में सेवा-कार्य (बैरे), फोटो-एलबम बेचना — यही मुख्य जीविकाएँ हैं। और इनके पीछे है शिक्षित बेकारी : “आठ हजार की आबादी में कम-से-कम चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक ऐसे हैं जो बेकार हैं।” साथ ही मंदिर की घंटियाँ, सूर्य को अर्घ्य और भक्तों की मंडलियाँ — धार्मिक जीवन भी उतना ही जीवंत है।

नमूना तुलना (मेरे शहर — मेरठ, उत्तर प्रदेश — से भिन्नता):
बिंदुकन्याकुमारीमेरा शहर (गंगा-यमुना का मैदान)
धरातलसमुद्र तट, चट्टानें, रेत के टीले, पीछे पहाड़ियाँसमतल जलोढ़ मैदान; न समुद्र, न पहाड़
जल-स्रोततीन समुद्र — पर पीने का मीठा पानी दुर्लभनहरें, नलकूप और गंगा की सहायक नदियाँ
जलवायुवर्ष भर लगभग एक-सी उष्ण-आर्द्र; ऋतुएँ धुँधलीतीखी ऋतुएँ — भीषण गर्मी, वर्षा, कड़ी सर्दी
जीविकामत्स्य-पालन, पर्यटन, हस्तशिल्प, होटल-सेवाखेती (गन्ना, गेहूँ), खेल-सामग्री और कैंची जैसे लघु उद्योग, व्यापार
भाषातमिल तथा मलयालम; पर्यटन के कारण अंग्रेज़ी और हिंदी भीहिंदी, खड़ी बोली तथा उर्दू
भोजनचावल, नारियल, मछली, इमली — सांभर, अप्पम, मीन-कुळंबुगेहूँ की रोटी, दाल, दही, सरसों का साग, गुड़
दिन की लयसूर्योदय-सूर्यास्त पर टिकी; ज्वार-भाटा दिनचर्या तय करता हैमंडी, बस-अड्डा और खेत के काम पर टिकी

सबसे बड़ा अंतर: कन्याकुमारी में क्षितिज तीन ओर है और वह पानी का है; मेरे मैदानी शहर में क्षितिज खेतों और मकानों से कटा हुआ है। इसी एक अंतर से वहाँ का जीवन-बोध बदल जाता है — जो व्यक्ति रोज़ असीम समुद्र देखता है, उसके लिए अपनी दूरी और अपनी सीमा का अर्थ अलग होता है।

उत्तर लिखते समय: अपने शहर/गाँव का नाम लेकर लिखिए और तुलना कम-से-कम चार बिंदुओं पर कीजिए — धरातल, जलवायु, जीविका और भोजन/भाषा। केवल ‘वहाँ समुद्र है, यहाँ नहीं’ लिखना अधूरा उत्तर है; बताइए कि उस अंतर से लोगों के काम और दिनचर्या में क्या फ़र्क पड़ता है।
प्र4.
4. इस यात्रा-वृत्तांत में कन्याकुमारी में स्थित चट्टान को आखिरी चट्टान कहा गया है। पुस्तकालय या अन्य स्रोतों तथा समाज विज्ञान के अपने शिक्षक से बातचीत करके पता लगाइए कि वर्तमान समय में भारत का अंतिम छोर (दक्षिणतम बिंदु) किसे माना जाता है। उस स्थान के विषय में लिखिए।
उत्तर

वर्तमान में भारत का दक्षिणतम बिंदु ‘इंदिरा पॉइंट’ है — जो कन्याकुमारी में नहीं, बल्कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी सिरे पर है। कन्याकुमारी भारत की मुख्य भूमि (स्थल-भाग) का दक्षिणतम बिंदु है — और लेखक ने भी बहुत सावधानी से यही लिखा है : “मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।”

बिंदुकन्याकुमारीइंदिरा पॉइंट
क्या हैभारत की मुख्य भूमि का दक्षिणतम छोरसम्पूर्ण भारत का दक्षिणतम बिंदु
कहाँतमिलनाडु, प्रायद्वीप का सिराग्रेट निकोबार द्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
अक्षांश (लगभग)8° उत्तरलगभग 6°45′ उत्तर — यानी भूमध्य रेखा के और पास
पुराने नामपिग्मेलियन पॉइंट, पारसन पॉइंट

इंदिरा पॉइंट के विषय में जानने योग्य बातें —

  • यह ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी सिरे पर है और यहाँ एक प्रकाश-स्तंभ (लाइट हाउस) बना है। यहाँ से इंडोनेशिया का सुमात्रा द्वीप लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर ही दूर है।
  • सन् 2004 के हिंद महासागर के सुनामी में यह क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ और यहाँ की भूमि कुछ मीटर नीचे धँस गई; प्रकाश-स्तंभ का निचला भाग पानी में डूब गया।
  • ग्रेट निकोबार में ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिज़र्व है, जहाँ विशाल केकड़ा, निकोबारी मेगापोड और चमड़े-पीठ वाला विशाल कछुआ पाए जाते हैं। यहाँ शोम्पेन और निकोबारी जनजातियाँ रहती हैं।
  • यह क्षेत्र संरक्षित है, इसलिए सामान्य पर्यटक यहाँ बिना अनुमति नहीं जा सकते।
तो क्या पाठ का शीर्षक ग़लत है? बिलकुल नहीं। ‘आखिरी चट्टान’ लेखक के लिए दो अर्थ रखती है — भौगोलिक (स्थल-भाग की अंतिम चट्टान) और भावात्मक (जहाँ से आगे केवल असीम जल है, यानी जहाँ मनुष्य की सीमा समाप्त होती है)। दूसरा अर्थ ही वृत्तांत की आत्मा है — इसीलिए लेखक वहाँ खड़े होकर स्वयं को ‘बड़ी-बड़ी चट्टानों के बीच एक छोटी-सी चट्टान’ अनुभव करता है।
याद रखिए (परीक्षा के लिए चार छोर): उत्तर — इंदिरा कॉल (लद्दाख, सियाचिन के पास); दक्षिण — इंदिरा पॉइंट (ग्रेट निकोबार); पूर्व — किबिथू क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश); पश्चिम — गुहार मोती (कच्छ, गुजरात)। और मुख्य भूमि का दक्षिणी छोर — कन्याकुमारी
प्र5.
5. इंटरनेट या अन्य किन्हीं माध्यमों से पता लगाइए कि आखिरी चट्टान में वर्णित कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक चट्टान के स्वरूप में किस प्रकार का विस्तार हुआ है? (संकेत– तिरुवल्लुवर की प्रतिमा इत्यादि)
उत्तर

मोहन राकेश ने जिस चट्टान को देखा था, वह लगभग नंगी चट्टान थी — “चट्टान तट से सौ-सवा-सौ गज आगे समुद्र के बीच जाकर है”, जहाँ पहुँचने का साधन केवल मल्लाहों की कच्ची मछुआ नाव थी। आज वहाँ का स्वरूप बहुत बदल चुका है।

क्या जुड़ाकबविवरण
विवेकानंद रॉक मेमोरियलसन् 1970चट्टान पर बना स्मारक, जो एकनाथ रानाडे के प्रयत्नों से देश भर के जन-सहयोग से बना। इसमें दो मुख्य भाग हैं — विवेकानंद मंडपम (जहाँ स्वामी जी की काँसे की प्रतिमा है) और श्रीपाद मंडपम (जहाँ देवी कन्याकुमारी के चरण-चिह्न माने जाते हैं)। भीतर ध्यान-मंडपम भी है, जहाँ लोग मौन बैठ सकते हैं। स्थापत्य में देश के अलग-अलग अंचलों की मंदिर-शैलियाँ मिलाई गई हैं।
तिरुवल्लुवर की प्रतिमा1 जनवरी 2000पड़ोस की चट्टान पर तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर की विशाल पाषाण-प्रतिमा। कुल ऊँचाई 133 फुट — 38 फुट का आधार-मंडप और उस पर 95 फुट की मूर्ति। यह 133 की संख्या तिरुक्कुरल के 133 अध्यायों की प्रतीक है। शिल्पी — वी. गणपति स्थपति
नौका (फेरी) सेवास्मारक बनने के बाद सेअब सरकारी फेरी नियमित रूप से यात्रियों को तट से चट्टान तक ले जाती है। मोहन राकेश को जिस ‘रबड़ पेड़ के तीन तनों’ वाली नाव में जाना पड़ा था, उसकी अब आवश्यकता नहीं रही।
विवेकानंद केंद्र1972 सेस्मारक के साथ जुड़ी सेवा-संस्था, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के काम करती है। स्मारक के परिसर में प्रदर्शनी और पुस्तकालय भी हैं।
पर्यटक सुविधाएँबाद के वर्षों मेंघाट, टिकट-घर, प्रतीक्षालय, प्रकाश-व्यवस्था और सुरक्षा-रेलिंग। समुद्र में तेज़ लहरों के दिनों में फेरी बंद कर दी जाती है।
इस बदलाव को कैसे देखें: इस प्रश्न का उत्तर केवल सूची नहीं है — एक विचार भी है। स्मारक बनने से वह चट्टान सुलभ हो गई : आज हज़ारों लोग वहाँ जा पाते हैं। पर उसी के साथ वह एकांत भी चला गया जिसमें मोहन राकेश ने ‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ महसूस किया था और जिसमें कभी विवेकानंद ने तीन दिन ध्यान लगाया था। विकास सुविधा देता है और एकांत ले लेता है — किसी भी तीर्थ या प्राकृतिक स्थल के बारे में यह प्रश्न हमेशा बना रहेगा। कक्षा में इसी पर दो पक्ष बनाकर चर्चा कीजिए।
खोजने का तरीका: ‘विवेकानंद रॉक मेमोरियल’ और ‘तिरुवल्लुवर स्टैचू’ पर पर्यटन विभाग तथा भारत सरकार के सूचना-स्रोत देखिए। जो भी तथ्य लें, उसके साथ वर्ष लिखिए और स्रोत का नाम अपनी कॉपी में दर्ज कीजिए — यही अच्छी खोजबीन का ढंग है।
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