गंगा अध्याय 5 यात्रा और खोज

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएँ की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है। पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत और उनके लेखकों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए और लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक संकेत नीचे दिया गया है। (यात्रा-वृत्तांत / स्थान / रचनाकार — किन्नर देश में | हिमाचल प्रदेश में स्थित किन्नौर | राहुल सांकृत्यायन)
उत्तर

पुस्तक ने तालिका की केवल पहली पंक्ति भरकर दी है। नीचे वही तालिका पूरी भरकर दी गई है — पहले हिंदी के प्रमुख यात्रा-वृत्तांत, फिर कुछ प्राचीन यात्री जिनके विवरण से भारत का इतिहास लिखा गया।

यात्रा-वृत्तांतस्थानरचनाकार
किन्नर देश मेंहिमाचल प्रदेश में स्थित किन्नौरराहुल सांकृत्यायन
मेरी तिब्बत यात्रातिब्बतराहुल सांकृत्यायन
मेरी लद्दाख यात्रालद्दाख (जम्मू-कश्मीर/लद्दाख क्षेत्र)राहुल सांकृत्यायन
घुमक्कड़-शास्त्रयात्रा और घुमक्कड़ी का दर्शन (किसी एक स्थान का नहीं)राहुल सांकृत्यायन
आखिरी चट्टान तककन्याकुमारी तथा दक्षिण भारत (तमिलनाडु)मोहन राकेश
अरे यायावर रहेगा याद?यूरोप तथा अन्य देशों की यात्राएँअज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)
एक बूँद सहसा उछलीयूरोपअज्ञेय
चीड़ों पर चाँदनीयूरोप तथा पहाड़ी अंचलनिर्मल वर्मा
धुंध से उठती धुनहिमाचल प्रदेश (शिमला और आसपास का अंचल)निर्मल वर्मा
पैरों में पंख बाँधकरयूरोपरामवृक्ष बेनीपुरी
ठेले पर हिमालयहिमालय (नैनीताल–कौसानी अंचल)धर्मवीर भारती
हिमालय-प्रवास / हिमालयनो प्रवासहिमालय क्षेत्रकाका कालेलकर
आवारा की डायरीदेश-विदेश की यात्राएँयशपाल

अब वे यात्री, जिनके विवरणों से इतिहास लिखा गया —

यात्रीकब और कहाँ सेक्या दर्ज किया
मेगस्थनीज़ईसा पूर्व चौथी शताब्दी, यूनान से; चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार मेंइंडिका — पाटलिपुत्र नगर, मौर्य प्रशासन और भारतीय समाज का विवरण।
फ़ाह्यानपाँचवीं शताब्दी, चीन से; चंद्रगुप्त द्वितीय के काल मेंबौद्ध विहारों, नालंदा-पाटलिपुत्र और जनजीवन का विवरण।
ह्वेनसांगसातवीं शताब्दी, चीन से; हर्षवर्धन के काल मेंसी-यू-की — नालंदा विश्वविद्यालय, कन्नौज सभा और तत्कालीन भारत का चित्र।
अल-बिरूनीग्यारहवीं शताब्दी, मध्य एशिया सेकिताब-उल-हिंद (तहकीक-ए-हिंद) — भारतीय ज्ञान, गणित, ज्योतिष और समाज का अध्ययन।
इब्न बतूताचौदहवीं शताब्दी, मोरक्को से; मुहम्मद बिन तुगलक के काल मेंरिह्ला — दिल्ली, डाक-व्यवस्था, बाज़ार और नगर-जीवन का विवरण।
यात्रा ‘खोज’ कैसे बनती है: ऊपर की दोनों तालिकाएँ एक ही बात कहती हैं — यात्री वह देखता है जो वहाँ रहने वाले के लिए इतना सामान्य हो चुका है कि दिखता ही नहीं। इसीलिए मौर्यकालीन पाटलिपुत्र का सबसे अच्छा विवरण एक यूनानी ने लिखा, और कन्याकुमारी की बेकारी का सबसे मार्मिक वाक्य दिल्ली से गए एक लेखक ने दर्ज किया। यात्रा-वृत्तांत इसीलिए साहित्य भी है और सामाजिक दस्तावेज़ भी।
कैसे खोजें: विद्यालय के पुस्तकालय में ‘यात्रा-वृत्तांत’ या ‘संस्मरण’ शीर्षक वाला खाना देखिए। हर पुस्तक के लिए एक कार्ड बनाइए जिसमें चार बातें हों — पुस्तक का नाम, लेखक, स्थान, प्रकाशन-वर्ष — और एक ऐसा वाक्य उतारिए जो आपको सबसे अच्छा लगा। यही आपकी अपनी ‘संदर्भ-सूची’ बनेगी।
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