कक्षा ९ हिंदी अध्याय 5 आखिरी चट्टान तक के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

रचनाकार — मोहन राकेश का जन्म सन् 1925 में अमृतसर, पंजाब में हुआ। वे हिंदी साहित्य के बहुमुखी रचनाकार थे — कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी-लेखन और यात्रा-वृत्तांत, सभी विधाओं में उन्होंने लिखा। नाटक — आषाढ़ का एक दिन , लहरों के राजहंस , आधे-अधूरे ; उपन्यास — अंधेरे बंद कमरे , अंतराल , न आने वाला कल ; कहानी-संग्रह — क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ , नए बादल , वारिस तथा अन्य कहानियाँ ; डायरी — मोहन राकेश की डायरी ; और यात्रा-वृत्तांत — आखिरी चट्टान तक । आषाढ़ का एक दिन पर उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। कुछ समय उन्होंने सारिका पत्रिका का संपादन भी किया। सन् 1972 में मात्र 48 वर्ष की अल्पायु में उनका निधन हो गया। विधा — यह पाठ यात्रा-वृत्तांत है, कहानी नहीं। इसमें न कोई गढ़ा हुआ कथानक है, न पात्रों का संघर्ष। जो कुछ है, वह है — एक स्थान, एक यात्री, और उस यात्री की चेतना पर उस स्थान की पड़ती छाप

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
स्याह / सियाहकाला, श्याम“समुद्र के अंदर से उभरी स्याह चट्टानों में से एक पर खड़ा होकर…”बादल इतने स्याह थे कि दोपहर में ही शाम-सी लगने लगी।
चट्टानशिला, बड़ा पत्थर“भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।”नदी के बीच खड़ी चट्टान पर बगुला बैठा था।
समाधिस्थ / समाधिसमाधि में स्थित; मनोयोग, तपस्या“हर तरफ से पानी की मार सहती हुई स्वयं भी समाधिस्थ-सी लग रही थी।”पिताजी सुबह-सुबह समाधिस्थ होकर बैठ जाते हैं।
चेतनाबुद्धि-विवेक से काम लेना, सावधान होना, होश में आना“अपनी पूरी चेतना से महसूस कर रहा था।”संगीत सुनते ही उसकी चेतना जैसे कहीं और चली गई।
क्षितिजवह स्थान जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैं; दृष्टि-सीमा“तीनों तरफ से क्षितिज तक पानी-ही-पानी था।”खेत की मेड़ पर खड़े होकर हमने क्षितिज तक फैली फ़सल देखी।
सिहरनकंपन, सिहरने की क्रिया“इससे मन में एक सिहरन भी हुई, हल्की उदासी भी घिर आई।”ठंडी हवा लगते ही देह में सिहरन दौड़ गई।
पृष्ठभूमिपहले की बातें; पीछे की भूमि या पीछे का दृश्य“पृष्ठभूमि में कन्याकुमारी के मंदिर की लाल और सफेद लकीरें चमक रही थीं।”फ़ोटो की पृष्ठभूमि में पूरा किला दिखाई दे रहा है।
झुरमुटसमूह, मंडली; पास-पास उगे पेड़ या झाड़ जिनकी डालियाँ मिलकर कुंज-सा बना रही हों“दूर-दूर हटकर उगे नारियलों के झुरमुट नजर आ रहे थे।”बाँस के झुरमुट में चिड़ियों का शोर मचा हुआ था।
बीहड़ऊबड़-खाबड़, विकट, विभक्त“सामने फैली रेत के कारण बहुत रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही थी।”चंबल के बीहड़ इलाकों में सड़क बनाना कठिन काम था।
मद्धिम / मद्धममध्यम, कम अच्छा, मंदा“दक्षिण-पूर्व के क्षितिज में एक जहाज की मद्धिम-सी रोशनी।”लालटेन की मद्धिम रोशनी में दादी कहानी सुनाती थीं।
महुआ / महुवाएक प्रसिद्ध पेड़ जिसके फूल-फल खाने और लकड़ी ईंधन तथा इमारती काम में आती है(शब्द-संपदा में दिया गया शब्द; पाठ में ‘मछुआ नाव’ आया है)चैत में महुआ के फूल पूरे जंगल को महका देते हैं।
सीपी / सीपियाँशंख-घोंघे की जाति का जलचर प्राणी, जिसका शरीर किश्तीनुमा दोहरे खोल में छिपा होता है और जिसके भीतर मोती बनता है“हम लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं।”बच्चे तट पर बिखरी रंग-बिरंगी सीपियाँ बटोर रहे थे।
दार्शनिकदर्शनशास्त्र का जानकार, तत्ववेत्ता“…दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं।”उसकी बातों में एक दार्शनिक गहराई रहती है।
ओटआड़, रोक, शरण; परदे के लिए बनाई गई दीवार“छोटे-छोटे द्वीपों की तरह समुद्र में बिखरी चट्टानों की ओट से सूर्य उदित हो रहा था।”वह दीवार की ओट में खड़ा होकर सब सुनता रहा।
अर्घ्यपूजनीय, पूजा में देने योग्य वस्तु“घाट पर बहुत-से लोग उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए एकत्रित थे।”छठ पर्व में लोग नदी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
कडल-काकपक्षियों की एक प्रजाति (समुद्री जलकाग)“बहुत-से कडल-काक हमारे आस-पास तैर रहे थे।”लहरों के बीच कडल-काक बिना डरे तैरते रहते हैं।
बाइनाक्यूलर्जदूरबीन, द्विनेत्री“…अपने बाइनाक्यूलर्ज से सूर्य-दर्शन।”मैंने बाइनाक्यूलर्ज से पहाड़ी पर बने मंदिर को देखा।
सैंड हिलबालूका टीला, रेत का टीला“यह वह ‘सैंड हिल’ थी जिसकी चर्चा मैं वहाँ पहुँचने के बाद से ही सुन रहा था।”हवा चलते ही सैंड हिल का आकार बदल जाता है।
सुरमईहल्का नीला, सुरमे के रंग का“…सुरमई, खाकी, पीली और लाल।”शाम के समय आकाश सुरमई हो जाता है।
सिर धुननाशोक-पश्चाताप के वेग से सिर पीटना, मातम करना, पछताना“स्याह पड़कर, जैसे लगातार सिर धुन रहे थे।”परिणाम देखकर वह सिर धुनता रह गया।
बे-लागखरा, दो टूक (बात); जिस पर किसी का असर न हो“वहाँ की बेकारी की समस्या और सूर्योदय की विशेषता, इन दोनों से बे-लाग।”उसने बे-लाग शब्दों में अपनी राय रख दी।
ढलाननीचे की ओर झुकी हुई सतह, उतार“वहाँ से दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी।”पहाड़ी की ढलान पर चाय के बागान फैले थे।
शृंखलाकड़ियों की लड़ी, सिलसिला, क्रमबद्ध समूह“पच्छिमी तट के साथ-साथ सूखी पहाड़ियों की एक शृंखला दूर तक चली गई थी।”हिमालय पर्वत-शृंखला भारत के उत्तर में फैली है।
मल्लाहनाव खेने वाला, नाविक“चार मल्लाह थे जो एक छोटी-सी मछुआ नाव में हमें वहाँ लाए थे।”मल्लाह ने पतवार सँभाली और नाव किनारे लग गई।
  1. मेरे उत्तर मेरे तर्क
  2. मेरी समझ मेरे विचार
  3. यात्रा का वृत्तांत
  4. यात्रा और खोज
  5. मेरे देश की धरती
  6. हस्तशिल्प कौशल
  7. मिलकर चलें
  8. प्रकृति की ओर
  9. अनुभव की साझेदारी
  10. चर्चा-परिचर्चा
  11. व्याकरण की बात
  12. आओ नए वाक्य बनाएँ
  13. गतिविधियाँ
  14. भाषा संगम
  15. झरोखे से
  16. खोजबीन
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