गंगा अध्याय 5 आओ नए वाक्य बनाएँ

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे तालिका में दिए गए हैं। इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों का अर्थ बताते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए। 1. तीनों तरफ से क्षितिज तक पानी-पानी था।
उत्तर
पाठ का वाक्यरेखांकित शब्दअर्थनया वाक्य
तीनों तरफ से क्षितिज तक पानी-पानी था।क्षितिजवह स्थान जहाँ धरती (या जल) और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैं; दृष्टि-सीमाखेत की मेड़ पर खड़े होकर हमने क्षितिज तक फैली हुई पीली सरसों देखी।
शब्द को ठीक से समझिए: क्षितिज कोई वास्तविक रेखा नहीं है — वह केवल हमारी आँख की सीमा है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, वह भी आगे खिसकता जाता है। इसीलिए इस पाठ में क्षितिज केवल भूगोल नहीं, एक प्रतीक भी बन जाता है — “लगता था कि उस ओर दूसरा छोर है ही नहीं।”
और वाक्य बनाकर देखिए: ‘विज्ञान ने मनुष्य के ज्ञान का क्षितिज बहुत विस्तृत कर दिया है।’ — यहाँ ‘क्षितिज’ लाक्षणिक अर्थ में है, यानी ‘सीमा/दायरा’।
प्र2.
2. पीछे दाईं तरफ दूर-दूर हटकर नारियलों के झुरमुट नजर आ रहे थे।
उत्तर
पाठ का वाक्यरेखांकित शब्दअर्थनया वाक्य
पीछे दाईं तरफ दूर-दूर हटकर नारियलों के झुरमुट नजर आ रहे थे।झुरमुटसमूह, मंडली; पास-पास उगे पेड़ या झाड़ जिनकी डालियाँ मिलकर कुंज-सा बना रही होंबाँस के झुरमुट में बैठी चिड़ियों का शोर दोपहर तक चलता रहा।
ध्यान दीजिए: ‘झुरमुट’ केवल ‘बहुत-से पेड़’ नहीं होता। इसमें यह भाव भी छिपा है कि पेड़ इतने पास-पास हैं कि उनकी डालियाँ आपस में मिलकर एक छाया-भरा घेरा बना देती हैं। इसीलिए पाठ में जब वे झुरमुट अँधेरे में स्याह पड़ जाते हैं, तो लेखक को लगता है — “जैसे लगातार सिर धुन रहे थे और हाथ-पैर पटक रहे थे।” यदि पेड़ अलग-अलग खड़े होते तो यह मानवीकरण बन ही नहीं पाता।
प्र3.
3. दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी।
उत्तर
पाठ का वाक्यरेखांकित शब्दअर्थनया वाक्य
दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी।ढलाननीचे की ओर झुकी हुई सतह; उतार, ढालपहाड़ी की ढलान पर बनी सीढ़ीदार खेती दूर से हरी सीढ़ियों जैसी लगती है।
‘ढलान’ का उलटा शब्द है ‘चढ़ाई’। दोनों एक ही रास्ते के दो नाम हैं — जिधर से आप चलें, उधर के हिसाब से नाम बदल जाता है। पाठ में यह ढलान बहुत काम की चीज़ बनती है : “निर्णय तुरंत करना था, इसलिए बिना और सोचे मैं रेत पर बैठकर नीचे तट की तरफ फिसल गया।” यानी जो ढलान देखने में सुंदर लग रही थी, वही लौटते समय बचने का रास्ता बन गई।
प्र4.
4. पच्छिमी तट के साथ-साथ सूखी पहाड़ियों की एक शृंखला दूर तक चली गई थी।
उत्तर
पाठ का वाक्यरेखांकित शब्दअर्थनया वाक्य
पच्छिमी तट के साथ-साथ सूखी पहाड़ियों की एक शृंखला दूर तक चली गई थी।शृंखलाकड़ियों की लड़ी; एक के बाद एक जुड़ी हुई चीज़ों का क्रम, सिलसिलाहिमालय पर्वत-शृंखला भारत की उत्तरी सीमा पर एक दीवार की तरह खड़ी है।
शब्द का मूल भाव: ‘शृंखला’ का शाब्दिक अर्थ है ज़ंजीर — यानी अलग-अलग कड़ियाँ, पर आपस में जुड़ी हुई। इसीलिए यह शब्द पहाड़ों के लिए भी चलता है और घटनाओं के लिए भी : ‘घटनाओं की एक पूरी शृंखला’, ‘व्याख्यान-शृंखला’। पाठ में यह पहाड़ियों के अकेले खड़े न होकर एक लंबे क्रम में फैले होने का बोध कराता है, जिससे वीरानी का प्रभाव और बढ़ जाता है।
वर्तनी पर ध्यान: इसे ‘श्रृंखला’ नहीं, शृंखला लिखा जाता है — श् + ऋ। पुस्तक में भी यही रूप छपा है।
प्र5.
5. सामने फैली रेत के कारण बहुत रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही थी।
उत्तर
पाठ का वाक्यरेखांकित शब्दअर्थनया वाक्य
सामने फैली रेत के कारण बहुत रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही थी।बीहड़ऊबड़-खाबड़, विकट, दुर्गम — ऐसा स्थान जहाँ चलना कठिन होचंबल के बीहड़ इलाकों तक सड़क पहुँचाने में वर्षों लग गए।
तीनों विशेषण एक साथ क्यों: लेखक ने पहाड़ियों के लिए तीन शब्द एक साथ रखे हैं — रूखी, बीहड़ और वीरान। तीनों अलग-अलग बात कहते हैं : ‘रूखी’ = हरियाली नहीं; ‘बीहड़’ = ज़मीन ऊबड़-खाबड़, चलना कठिन; ‘वीरान’ = कोई रहने वाला नहीं। तीनों मिलकर एक ऐसा चित्र बनाते हैं जो सूर्यास्त की सुनहली चमक के ठीक विपरीत खड़ा है — और यही विरोध दृश्य को गहरा बनाता है।
अभ्यास: इन पाँचों शब्दों को लेकर एक छोटा-सा अनुच्छेद लिखिए, जिसमें आप अपने ही किसी देखे हुए स्थान का वर्णन करें — “क्षितिज तक फैला खेत, दूर एक झुरमुट, बीच में एक ढलान, पीछे पहाड़ियों की शृंखला और उसके आगे बीहड़ ज़मीन…”। इससे शब्द केवल याद नहीं होंगे, काम में आना भी आ जाएगा।
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