गंगा अध्याय 5 गतिविधियाँ

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
1. कल्पना कीजिए कि आप अपने परिवार के साथ कहीं घूमने गए हैं। वहाँ आपकी भेंट एक ऐसे यात्री से होती है जिसे आपकी सहायता की आवश्यकता है लेकिन आप दोनों एक-दूसरे की भाषा से अपरिचित हैं। ऐसे में उस अनजान यात्री की सहायता आप कैसे करेंगे?
उत्तर

पहली बात — घबराइए मत। भाषा संप्रेषण का एक साधन है, अकेला साधन नहीं। मनुष्य के पास कम-से-कम पाँच और साधन हैं, और वे सब भाषा से पुराने हैं।

साधनकैसे काम लें
1. मुख-मुद्रा और स्वरपहले मुस्कराइए और सिर हिलाकर आश्वस्त कीजिए। घबराया हुआ यात्री सबसे पहले यही देखता है कि सामने वाला मित्र है या नहीं। स्वर धीमा और शांत रखिए — चिल्लाने से भाषा समझ में नहीं आ जाती।
2. संकेत (इशारे)बहुत-से इशारे लगभग सार्वभौमिक हैं — हाथ से खाने का संकेत, पानी पीने का संकेत, घड़ी की ओर इशारा करके समय पूछना, हाथ फैलाकर दिशा बताना, हथेली से ‘रुकिए’ कहना।
3. चित्र बनानाकागज़ पर बस, रेल, होटल, अस्पताल या डॉक्टर का सरल चित्र बना दीजिए। बच्चे यह सबसे अच्छा कर लेते हैं। नक्शा बनाकर उस पर ‘आप यहाँ हैं’ का निशान लगाना बहुत काम आता है।
4. लिखा हुआ और अंकस्थान का नाम, बस-नंबर, समय और दाम अंकों में लिख दीजिए। अंक अंतरराष्ट्रीय होते हैं। दूरी बताने के लिए कागज़ पर ‘2 km’ लिख देना बोलने से अधिक स्पष्ट है।
5. मोबाइल का सहाराअनुवाद ऐप (जैसे भाषिणी या अन्य अनुवाद सेवाएँ) में बोलिए या टाइप कीजिए और स्क्रीन दिखा दीजिए। मानचित्र ऐप खोलकर गंतव्य का नाम दिखा देना सबसे तेज़ उपाय है।
6. तीसरे व्यक्ति की सहायताआस-पास देखिए — बस-अड्डे का कर्मचारी, दुकानदार, पुलिसकर्मी या कोई विद्यार्थी उस भाषा को जानता हो सकता है। बड़े स्थलों पर पर्यटक सूचना केंद्र होता ही है।
7. साथ चलकर दिखानाजब समझाना कठिन हो, तो बताइए मत — साथ ले जाइए। यह सबसे भरोसेमंद उपाय है, विशेषकर तब जब कोई खो गया हो या बीमार हो।
नमूना उत्तर:

पिछले वर्ष हम परिवार के साथ मदुरै गए थे। स्टेशन के बाहर एक बुज़ुर्ग महिला अपना थैला थामे खड़ी थीं और परेशान दिख रही थीं। मैंने पास जाकर पूछा तो वे तमिल में कुछ कहने लगीं और मुझे एक शब्द भी समझ नहीं आया।

पहले मैंने मुस्कराकर सिर हिलाया ताकि उन्हें लगे कि मैं सुन रहा हूँ। फिर मैंने अपनी कॉपी निकालकर उस पर एक बस और एक रेलगाड़ी बनाई और उनकी तरफ पेंसिल बढ़ा दी। उन्होंने बस पर उँगली रख दी। फिर मैंने कागज़ पर लिखा — ‘?’ और उन्होंने अपने थैले से एक पर्ची निकालकर दी, जिस पर उनके गाँव का नाम लिखा था। मैंने वह नाम मोबाइल के मानचित्र में डाला और स्क्रीन उन्हें दिखाई — उन्होंने सिर हिलाकर ‘हाँ’ कहा।

इसके बाद मैंने पास खड़े एक ऑटो-चालक से पूछा, जो थोड़ी हिंदी जानता था। उसने बताया कि वह बस पीछे वाले स्टैंड से जाती है। हम उन्हें वहीं तक छोड़ आए और बस में बैठा भी दिया। बस चलते समय उन्होंने हाथ जोड़कर कुछ कहा — मुझे उसका एक शब्द भी समझ नहीं आया, पर अर्थ पूरा समझ आ गया।

सीखने की बात: संप्रेषण में शब्दों का हिस्सा सबसे छोटा होता है। धैर्य, मुस्कान और साथ चलकर दिखा देना — ये तीन ‘भाषाएँ’ हर जगह चलती हैं। और यही कारण है कि पुस्तक ने इस गतिविधि को ‘भाषा से संवाद’ के अंतर्गत रखा है — ताकि हम जान सकें कि भाषा जोड़ती है, पर उसका न होना अलग नहीं करता।
प्र2.
2. पधारो म्हारे देश — अपने क्षेत्र के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की एक सूची बनाइए और उनकी विशेषताओं को ध्यान में रखकर एक विवरणिका (ब्रॉशर) तैयार कीजिए।
उत्तर

विवरणिका (ब्रॉशर) विज्ञापन नहीं, उपयोगी सूचना है। अच्छा ब्रॉशर वह है जिसे पढ़कर कोई अजनबी सचमुच यात्रा की योजना बना सके।

ब्रॉशर में ये छह चीज़ें अवश्य हों:
  1. आकर्षक शीर्षक और एक पंक्ति का परिचय — जैसे ‘पधारो म्हारे देश’ के नीचे एक वाक्य।
  2. स्थलों की सूची — हर स्थल के बारे में दो-तीन पंक्तियाँ; क्या देखने योग्य है, यह स्पष्ट हो।
  3. कैसे पहुँचें — निकटतम रेलवे स्टेशन, बस-अड्डा, हवाई अड्डा और दूरी।
  4. कब आएँ — अनुकूल महीने और प्रमुख मेले/उत्सव।
  5. क्या खाएँ और क्या ले जाएँ — स्थानीय व्यंजन तथा हस्तशिल्प (इससे स्थानीय कारीगरों को लाभ होता है)।
  6. सूचना और सावधानी — ठहरने के विकल्प, संपर्क नंबर, और ‘कचरा न फैलाएँ’ जैसी अपील।
बनावट: A4 कागज़ को तीन भागों में मोड़िए (तीन-मोड़ वाला ब्रॉशर)। सामने का पन्ना — नाम और चित्र; भीतर के पन्ने — स्थल; पिछला पन्ना — नक्शा, कैसे पहुँचें और संपर्क।
नमूना विवरणिका — ‘पधारो म्हारे बुंदेलखंड’ (जिला झाँसी और आसपास)

पधारो म्हारे बुंदेलखंड
पत्थर के किले, ताल-तलैया और वीरता की कहानियाँ

पर्यटन स्थलक्या विशेष हैकितनी दूर
झाँसी का किलारानी लक्ष्मीबाई का किला; ऊँची प्राचीर से पूरा शहर दिखता है। शाम का ध्वनि-प्रकाश कार्यक्रम अवश्य देखें।शहर के भीतर
रानी लक्ष्मीबाई पार्क और संग्रहालय1857 के संग्राम से जुड़ी वस्तुएँ, अस्त्र-शस्त्र और मूर्तियाँ।2 कि.मी.
ओरछाबेतवा के किनारे जहाँगीर महल, राजा राम मंदिर और राजाओं की छतरियाँ। नदी के किनारे सूर्यास्त सबसे सुंदर।18 कि.मी.
बरुआ सागरपुराना ताल और किला; पक्षी देखने के लिए अच्छा स्थान।24 कि.मी.
देवगढ़गुप्तकालीन दशावतार मंदिर और जैन मंदिरों का समूह; प्राचीन शिल्प के लिए प्रसिद्ध।125 कि.मी.

कैसे पहुँचें — झाँसी जंक्शन दिल्ली–भोपाल मुख्य रेल-मार्ग पर है; निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर। बस-अड्डे से ओरछा के लिए हर आधे घंटे में साधन मिलता है।
कब आएँ — अक्टूबर से मार्च। ग्रीष्म में भीषण गरमी पड़ती है। झाँसी महोत्सव (फरवरी) में लोक-नृत्य और शिल्प-मेला लगता है।
क्या खाएँ — बुंदेली कढ़ी-भात, बरा, महेरी और गुड़ की खीर।
क्या ले जाएँ — स्थानीय पीतल के बर्तन, बाँस और मूँज की टोकरियाँ — इन्हें कारीगर से सीधे खरीदिए।
ध्यान रखें — किले और मंदिरों की दीवारों पर कुछ न लिखें, प्लास्टिक बाहर लेकर आएँ, और स्थानीय गाइड की सेवा लेकर स्थानीय रोज़गार को सहारा दें।
संपर्क — पर्यटक सूचना केंद्र, झाँसी जंक्शन।

अपना ब्रॉशर बनाते समय: केवल प्रसिद्ध स्थल मत लिखिए। एक ऐसा स्थान भी जोड़िए जिसे बाहर के लोग नहीं जानते — कोई पुराना बावड़ी, कोई मेला, कोई शिल्प। यही आपके ब्रॉशर को दूसरों से अलग बनाएगा — क्योंकि वह जानकारी केवल आपके पास है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ