पहली बात — घबराइए मत। भाषा संप्रेषण का एक साधन है, अकेला साधन नहीं। मनुष्य के पास कम-से-कम पाँच और साधन हैं, और वे सब भाषा से पुराने हैं।
| साधन | कैसे काम लें |
|---|---|
| 1. मुख-मुद्रा और स्वर | पहले मुस्कराइए और सिर हिलाकर आश्वस्त कीजिए। घबराया हुआ यात्री सबसे पहले यही देखता है कि सामने वाला मित्र है या नहीं। स्वर धीमा और शांत रखिए — चिल्लाने से भाषा समझ में नहीं आ जाती। |
| 2. संकेत (इशारे) | बहुत-से इशारे लगभग सार्वभौमिक हैं — हाथ से खाने का संकेत, पानी पीने का संकेत, घड़ी की ओर इशारा करके समय पूछना, हाथ फैलाकर दिशा बताना, हथेली से ‘रुकिए’ कहना। |
| 3. चित्र बनाना | कागज़ पर बस, रेल, होटल, अस्पताल या डॉक्टर का सरल चित्र बना दीजिए। बच्चे यह सबसे अच्छा कर लेते हैं। नक्शा बनाकर उस पर ‘आप यहाँ हैं’ का निशान लगाना बहुत काम आता है। |
| 4. लिखा हुआ और अंक | स्थान का नाम, बस-नंबर, समय और दाम अंकों में लिख दीजिए। अंक अंतरराष्ट्रीय होते हैं। दूरी बताने के लिए कागज़ पर ‘2 km’ लिख देना बोलने से अधिक स्पष्ट है। |
| 5. मोबाइल का सहारा | अनुवाद ऐप (जैसे भाषिणी या अन्य अनुवाद सेवाएँ) में बोलिए या टाइप कीजिए और स्क्रीन दिखा दीजिए। मानचित्र ऐप खोलकर गंतव्य का नाम दिखा देना सबसे तेज़ उपाय है। |
| 6. तीसरे व्यक्ति की सहायता | आस-पास देखिए — बस-अड्डे का कर्मचारी, दुकानदार, पुलिसकर्मी या कोई विद्यार्थी उस भाषा को जानता हो सकता है। बड़े स्थलों पर पर्यटक सूचना केंद्र होता ही है। |
| 7. साथ चलकर दिखाना | जब समझाना कठिन हो, तो बताइए मत — साथ ले जाइए। यह सबसे भरोसेमंद उपाय है, विशेषकर तब जब कोई खो गया हो या बीमार हो। |
पिछले वर्ष हम परिवार के साथ मदुरै गए थे। स्टेशन के बाहर एक बुज़ुर्ग महिला अपना थैला थामे खड़ी थीं और परेशान दिख रही थीं। मैंने पास जाकर पूछा तो वे तमिल में कुछ कहने लगीं और मुझे एक शब्द भी समझ नहीं आया।
पहले मैंने मुस्कराकर सिर हिलाया ताकि उन्हें लगे कि मैं सुन रहा हूँ। फिर मैंने अपनी कॉपी निकालकर उस पर एक बस और एक रेलगाड़ी बनाई और उनकी तरफ पेंसिल बढ़ा दी। उन्होंने बस पर उँगली रख दी। फिर मैंने कागज़ पर लिखा — ‘?’ और उन्होंने अपने थैले से एक पर्ची निकालकर दी, जिस पर उनके गाँव का नाम लिखा था। मैंने वह नाम मोबाइल के मानचित्र में डाला और स्क्रीन उन्हें दिखाई — उन्होंने सिर हिलाकर ‘हाँ’ कहा।
इसके बाद मैंने पास खड़े एक ऑटो-चालक से पूछा, जो थोड़ी हिंदी जानता था। उसने बताया कि वह बस पीछे वाले स्टैंड से जाती है। हम उन्हें वहीं तक छोड़ आए और बस में बैठा भी दिया। बस चलते समय उन्होंने हाथ जोड़कर कुछ कहा — मुझे उसका एक शब्द भी समझ नहीं आया, पर अर्थ पूरा समझ आ गया।