गंगा अध्याय 5 भाषा संगम

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे थे” — ‘नाव’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। इनके अतिरिक्त यदि आप ‘नाव’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर

पहले पुस्तक की अपनी सूची, फिर उसमें जोड़े गए शब्द।

भाषा‘नाव’ के लिए शब्दभाषा‘नाव’ के लिए शब्द
हिंदीनावनेपालीनाउ, नौका, डुड्रा
संस्कृतनौ, नौकाबांग्लानाओ, नौका
पंजाबीबेड़ीअसमियानाओ
उर्दूकिश्ती, नावमणिपुरीहि
कश्मीरीनावओड़िआनौका, नाआ
सिंधीबेड़ी, किश्तीतेलुगुपडव, नाव
मराठीहोड़ी, नावतमिलओडम्
गुजरातीनाव, होडीमलयालमतोणि
कोंकणीबहड़ीकन्नड़दोणि

इनके अतिरिक्त कुछ और भाषाएँ और बोलियाँ —

भाषा / बोलीशब्दटिप्पणी
भोजपुरीनाव, डोंगीछोटी नाव के लिए ‘डोंगी’ और बड़ी के लिए ‘नाव’।
मैथिलीनाव, डोंगाकोसी-क्षेत्र में ‘डोंगा’ अधिक प्रचलित है।
अवधी / बघेलीनाव, डोंगी
छत्तीसगढ़ीडोंगा, नाव
ब्रजनाव, नैयाभक्ति-काव्य में ‘नैया’ जीवन का प्रतीक बन गया — ‘भव-सागर की नैया’।
राजस्थानी / मारवाड़ीनाव, बेड़ोपंजाबी ‘बेड़ी’ से मिलता-जुलता।
हरियाणवीनाव, किश्ती
डोगरीबेड़ीपंजाबी के निकट।
संस्कृत (अन्य शब्द)तरणिः, तरी, पोतः‘तरणि’ का अर्थ है — जो तार दे, पार लगा दे।
फ़ारसी / अरबीकिश्ती / सफ़ीनाउर्दू और सिंधी में ‘किश्ती’ इन्हीं से आया।
अंग्रेज़ीboat, ferry‘navy’, ‘naval’ और ‘navigation’ शब्द भी उसी मूल से हैं जिससे संस्कृत ‘नौ’।
सूची से क्या दिखता है — दो परिवार, दो जड़ें:
  • नाव, नाओ, नाउ, नौका, नाआ, नाव — ये सब संस्कृत के ‘नौः’ से निकले हैं। रोचक बात यह है कि लैटिन का navis और अंग्रेज़ी का navy भी इसी प्राचीन मूल से जुड़े हैं — यानी यह शब्द हज़ारों वर्ष पुराना है।
  • तोणि (मलयालम), दोणि (कन्नड़), ओडम् (तमिल) — ये द्रविड़ भाषा-परिवार के अपने शब्द हैं, संस्कृत से नहीं आए। तेलुगु में दोनों मिलते हैं — ‘पडव’ अपना, और ‘नाव’ उधार लिया हुआ।
  • किश्ती, बेड़ी, बहड़ी — ये पश्चिमोत्तर भारत में फ़ारसी-अरबी संपर्क से आए या उसी क्षेत्र में विकसित हुए शब्द हैं।
यानी एक ही चीज़ के लिए भारत में तीन अलग-अलग शब्द-परंपराएँ साथ-साथ चलती हैं — और यही ‘भाषा संगम’ का असली अर्थ है। जिस तरह कन्याकुमारी में तीन सागर मिलते हैं, उसी तरह भारत की भाषाओं में कई धाराएँ मिलती हैं।
प्र2.
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर

मूल वाक्य (हिंदी) — “ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे थे।”

नीचे इसी वाक्य के कुछ भाषाओं/बोलियों में रूप दिए गए हैं। आप अपनी मातृभाषा में इसी तरह लिखिए — और यदि आपकी मातृभाषा हिंदी ही है, तो अपने घर की बोली (भोजपुरी, अवधी, हरियाणवी, बुंदेली, ब्रज, मालवी…) में लिखिए।

भाषा / बोलीवाक्य
भोजपुरीऊँच-ऊँच लहरन से बचावत मल्लाह नाव के ले आवत रहलें।
अवधीऊँची-ऊँची लहरन से बचाइ के मल्लाह नाव लइ आवत रहेन।
मैथिलीऊँच-ऊँच लहरि सँ बचाबैत मल्लाह नाव अनैत रहथि।
बुंदेलीऊँची-ऊँची लहरन ते बचाउत भए मल्लाह नाव लाउत हते।
हरियाणवीऊँची-ऊँची लहरां तै बचांदे होए मल्लाह नाव नै ल्या रे थे।
राजस्थानी (मारवाड़ी)ऊँची-ऊँची लहरां सूँ बचावतां थकां मल्लाह नाव नै ल्यावै हा।
पंजाबीउच्चीआं-उच्चीआं लहिरां तों बचांदे होए मल्लाह बेड़ी नूँ ला रहे सन।
मराठीउंच उंच लाटांपासून वाचवत खलाशी होडी आणत होते.
गुजरातीऊँची-ऊँची लहेरोथी बचावता खलासीओ होडी लावी रह्या हता.
बांग्लाउँचु-उँचु ढेउ थेके बाँचिये माझिरा नाओ निये आसछिलो.
संस्कृतउन्नताभ्यः तरङ्गेभ्यः रक्षन्तः नाविकाः नौकाम् आनयन्ति स्म।
अनुवाद करते समय दो बातें ध्यान रखिए:
  1. शब्द-दर-शब्द मत बदलिए। हर भाषा की अपनी वाक्य-रचना और अपनी क्रिया-प्रणाली होती है। मराठी में ‘मल्लाह’ के लिए ‘खलाशी’ और ‘नाव’ के लिए ‘होडी’ अधिक स्वाभाविक है।
  2. अपने घर की भाषा को कमतर मत समझिए। जो शब्द केवल आपकी बोली में है, वही सबसे मूल्यवान है — क्योंकि वह किसी और सूची में नहीं मिलेगा।
और यह भी देखिए कि ऊपर की तालिका में ‘नाव’ के लिए तीन अलग शब्द आ गए — नाव, बेड़ी, होडीएक ही वाक्य, ग्यारह रूप — यही भारत की भाषाई विविधता है।
कक्षा की गतिविधि: श्यामपट्ट पर यही एक वाक्य लिखिए और कक्षा के हर विद्यार्थी से उसकी मातृभाषा या बोली में एक-एक पंक्ति लिखवाइए। पूरी कक्षा की सूची को एक चार्ट पर लगाकर दीवार पर टाँग दीजिए — यही आपकी अपनी ‘भाषा संगम’ की भित्ति-पत्रिका होगी।
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