कक्षा ९ हिंदी अध्याय 6 रीढ़ की हड्डी के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

रचनाकार — जगदीशचंद्र माथुर का जन्म सन् 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ और शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई। वे इंडियन सिविल सर्विस में भी चयनित हुए। बिहार राज्य के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक तथा सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव जैसे प्रशासनिक पदों पर काम करते हुए भी वे आजीवन साहित्य-सृजन में सक्रिय रहे। सन् 1978 में उनका निधन हुआ। प्रयाग में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने लिखना आरंभ कर दिया था और उस समय की चर्चित पत्रिकाओं चाँद तथा रूपाभ में उनके नाटक-एकांकी छपने लगे थे। हिंदी नाटक और रंगमंच के विकास में उनके एकांकियों और नाटकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐतिहासिक नाटकों के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक समस्याओं से जुड़े एकांकी भी लिखे। प्रमुख कृतियाँ — भोर का तारा , कोणार्क , ओ मेरे सपने , शारदीया , पहला राजा , दस तस्वीरें , जिन्होंने जीना जाना । संपूर्ण रचनाएँ जग

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
अधेड़आधी उम्र का, ढलती उम्र का“जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वे अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं।”अधेड़ उम्र में भी उन्होंने नई भाषा सीखनी शुरू कर दी।
तख्तलकड़ी की बड़ी चौकी, सिंहासन“अब तख्त को उधर मोड़ दे... उधर।”दादा जी दोपहर में आँगन के तख्त पर ही लेटते हैं।
गंदुमीगेहुँए रंग का“गंदुमी रंग, छोटा कद।”उसका गंदुमी रंग और बड़ी-बड़ी आँखें सबका ध्यान खींचती थीं।
डाटटेक, अटकाव“क्यों रतन, तेरे कानों में डाट लगी है क्या?”शोर से बचने के लिए उसने कानों में डाट लगा ली।
जंजालझंझट, झमेला, संसार का बखेड़ा“मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।”बेकार की चीजें खरीदकर उसने घर को जंजाल बना लिया।
ठठोलीहँसी, परिहास“हटो भी! तुम्हें ठठोली ही सूझती रहती है।”गंभीर सभा में ठठोली अच्छी नहीं लगती।
करीने/करीनाढंग, क्रम, मेल, समानता“उमा से कह देना कि ज़रा करीने से आए।”उसने अपनी किताबें बड़े करीने से अलमारी में सजाईं।
दकियानूसीपुराने विचार का, पुराना“गुस्सा तो मुझे बहुत आता है इनके दकियानूसी खयालों पर।”बेटियों को न पढ़ाना आज भी कुछ लोगों की दकियानूसी सोच है।
तालीमशिक्षा“कहता है कि शादी का सवाल दूसरा है, तालीम का दूसरा।”तालीम पाकर ही कोई अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।
चौपटनष्ट, चारों ओर से खुला हुआ“गया नहीं मक्खन लाने?... सब चौपट कर दिया।”एक भूल ने महीनों की मेहनत चौपट कर दी।
दस्तकखटखटाना, हाथ का हलका आघात या धक्का, ताली“(प्रेमा जाती है। ... किवाड़ों पर दस्तक।)”आधी रात को दरवाज़े पर दस्तक सुनकर सब चौंक उठे।
फितरतीचालबाज, प्रकृतिगत“मालूम होता है कि काफी अनुभवी और फितरती महाशय हैं।”फितरती आदमी की मीठी बातों में मत आइए।
खीस निपोरना / खीस निकालनाइस तरह हँसना कि दाँत दिखाई दें, बेढंगी हँसी हँसना“उनका लड़का कुछ खीस निपोरने वाले नौजवानों में से है।”गलती पकड़ी जाने पर वह बस खीस निपोरता रह गया।
खासियत/खासीयतविशेषता, गुण, प्रभाव, प्रकृति, स्वभाव“झुकी कमर इनकी खासियत है।”इस मिट्टी के बर्तन की खासियत यह है कि पानी ठंडा रहता है।
तशरीफ़आदर, सम्मान, महत्व“हँ-हँ, इधर तशरीफ़ लाइए— इधर।”आप तशरीफ़ रखिए, वे अभी आते ही होंगे।
मार्जिनसीमा, किनारा“जी, एकाध साल का ‘मार्जिन’ रखता हूँ।”समय का थोड़ा मार्जिन रखकर घर से निकलिए।
बालाईऊपर का हिस्सा“यह हाल था कि चार पैसे में ढेर-सी बालाई आती थी।”दूध की बालाई निकालकर उसने मलाई-रोटी बना ली।
तकल्लुफ़बनावट, शिष्टाचार“यह सब आप क्या तकल्लुफ़ करते हैं!”अपने घर में तकल्लुफ़ की क्या ज़रूरत है?
माफ़िकअनुकूल, अनुसार“अपनी खूबसूरती के ‘ग्रेड’ के माफ़िक अपने ऊपर टैक्स तय कर ले।”यह काम मेरे माफ़िक नहीं है।
मुखातिबसंबोधन करने वाला, बात करने वाला“(शंकर की तरफ मुखातिब होकर) आपका क्या खयाल है, शंकर बाबू?”वे मेरी ओर मुखातिब होकर बोले।
निहायतअत्यधिक, अत्यंत, बहुत ज्यादा“लड़की का खूबसूरत होना निहायत जरूरी है।”यह निहायत ज़रूरी काम है, इसे टाला नहीं जा सकता।
जायचाजन्मपत्री“और जायचा (जन्मपत्र) तो मिल ही गया होगा?”पंडित जी ने दोनों के जायचे मिलाकर तारीख तय की।
अर्ज़निवेदन, प्रार्थना, चौड़ाई“नहीं साहब, वह तो मैंने अर्ज़ किया न।”मेरी बस इतनी अर्ज़ है कि एक बार सुन लीजिए।
अधीरधैर्य रहित, उतावला, आकुल, दृढ़ता रहित“गोपालप्रसाद अधीर हो उठते हैं और रामस्वरूप सकपकाते हैं।”परिणाम सुनने के लिए वह अधीर हुआ जा रहा था।
एकांकीएक ही अंक में पूरी होने वाली नाट्य-रचना“आप जानते ही हैं कि ‘रीढ़ की हड्डी’ एक एकांकी है।”हमारी कक्षा ने वार्षिकोत्सव में एक एकांकी प्रस्तुत किया।
रंग-निर्देश / मंच-निर्देशकोष्ठक में दिया वह निर्देश जो मंच-सज्जा, पात्रों की गति और भाव-भंगिमा बताता है“(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा।...)”रंग-निर्देश पढ़े बिना निर्देशक मंच नहीं सजा सकता।
  1. मेरे उत्तर मेरे तर्क
  2. मेरी समझ मेरे विचार
  3. एकांकी की पड़ताल
  4. रंग-निर्देश
  5. मेरी टिप्पणी
  6. तुलना और विचार
  7. एकांकी का विस्तार
  8. व्याकरण की बात
  9. भाषा में मुहावरे
  10. संदर्भ में शब्द
  11. आप भी संवाददाता
  12. भाषा संगम
  13. खोजबीन
क्या यह उपयोगी रहा?