गंगा अध्याय 6 भाषा संगम

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“मक्खन वाले की दुकान दूर है” — नीचे ‘मक्खन’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। मक्खन (हिंदी); नवनीतम् (संस्कृत); मक्खण (पंजाबी); मक्खन (उर्दू); ठॅन्य (कश्मीरी); मखणु (सिंधी); लोणी (मराठी); माखण, नवनीत (गुजराती); लोणी (कोंकणी); नौनी, माखन (नेपाली); माखन, ननी (बांग्ला); माखन (असमिया); माखोन (मणिपुरी); लहुणी, मक्खन (ओड़िआ); वेन्नै (तेलुगु); वॆण्णॆय् (तमिल); वॆण्ण (मलयालम); वॆण्णे (कन्नड़)। इनके अतिरिक्त यदि आप ‘मक्खन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर

पुस्तक की सूची में 18 भाषाएँ हैं। नीचे उनके अतिरिक्त कुछ और भाषाओं और बोलियों के शब्द दिए गए हैं, जो हमारे विद्यालय के बच्चों ने अपने घरों से पूछकर इकट्ठे किए —

भाषा / बोली‘मक्खन’ के लिए शब्द
भोजपुरीमक्खन / माखन
अवधीमाखन
ब्रजमाखन (‘माखनचोर’ शब्द इसी से बना है)
मैथिलीमक्खन / नवनीत
मगहीमाखन
राजस्थानी (मारवाड़ी)माखण
हरियाणवीमाखन
छत्तीसगढ़ीमाखन
डोगरीमक्खन
तुलुबॆण्णॆ
अंग्रेज़ीbutter (बटर)
सूची को केवल पढ़िए मत — उसमें एक नियम खोजिए। ध्यान से देखिए तो ये सारे शब्द तीन कुलों में बँट जाते हैं:
  • नवनीत-कुल — संस्कृत नवनीतम् से निकले शब्द — नवनीत (गुजराती, मैथिली), ननी (बांग्ला), नौनी (नेपाली)। ‘नवनीत’ का शब्दार्थ ही है ‘अभी-अभी निकाला हुआ’।
  • माखन-कुल — मक्खन, माखन, माखण, मखणु, माखोन, लहुणी के साथ चलने वाला ‘मक्खन’ — यह पूरे उत्तर, पश्चिम और पूर्व भारत में फैला हुआ है।
  • वेण्ण-कुल — वेन्नै (तेलुगु), वॆण्णॆय् (तमिल), वॆण्ण (मलयालम), वॆण्णे (कन्नड़), बॆण्णॆ (तुलु) — चारों-पाँचों द्रविड़ भाषाओं में लगभग एक ही शब्द।
इसके अलावा मराठी और कोंकणी का लोणी तथा ओड़िआ का लहुणी आपस में मिलते-जुलते हैं — यानी पड़ोसी भाषाएँ शब्द भी बाँट लेती हैं। इतनी दूर-दूर की भाषाओं में एक ही चीज़ के लिए मिलते-जुलते शब्द होना बताता है कि हमारी भाषाएँ अलग-अलग होकर भी एक ही परिवार-वृक्ष की शाखाएँ हैं।
Try This: कक्षा में एक चार्ट बनाइए जिसके बीच में ‘मक्खन’ लिखा हो और चारों ओर सबकी मातृभाषा के शब्द। फिर उन्हें ऊपर बताए तीन कुलों के रंगों से घेर दीजिए — भाषा का नक्शा अपने आप बन जाएगा।
प्र2.
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए। (“मक्खन वाले की दुकान दूर है”)
उत्तर

यह प्रश्न हर विद्यार्थी के लिए अलग है — आपको अपनी मातृभाषा में लिखना है। नीचे कई भाषाओं में यही वाक्य दिया गया है, ताकि आप अपनी भाषा का वाक्य मिलाकर देख सकें और यह भी समझ सकें कि तुलना कैसे की जाती है।

भाषा“मक्खन वाले की दुकान दूर है”
हिंदीमक्खन वाले की दुकान दूर है।
भोजपुरीमक्खन वाला के दुकान दूर बा।
अवधीमाखन वाले क दुकान दूर अहै।
मैथिलीमक्खन वला के दोकान दूर अछि।
राजस्थानीमाखण आळा री दुकान दूर है।
हरियाणवीमाखन आळे की दुकान दूर सै।
छत्तीसगढ़ीमाखन वाला के दुकान दूरिहा हे।
मराठीलोणी विकणाऱ्याचे दुकान लांब आहे.
गुजरातीમાખણવાળાની દુકાન દૂર છે. (माखणवाळानी दुकान दूर छे।)
पंजाबीਮੱਖਣ ਵਾਲੇ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਦੂਰ ਹੈ। (मक्खण वाले दी दुकान दूर है।)
बांग्लाমাখনওয়ালার দোকান দূরে। (माखनवालार दोकान दूरे।)
नेपालीनौनी बेच्नेको पसल टाढा छ।
उर्दूمکھن والے کی دکان دور ہے۔ (मक्खन वाले की दुकान दूर है।)
संस्कृतनवनीतविक्रेतुः आपणः दूरे अस्ति।
अंग्रेज़ीThe butter-seller’s shop is far away.
अब तीन बातें मिलाकर देखिए —
  1. क्रिया कहाँ आती है? लगभग हर भारतीय भाषा में वाक्य के अंत में — है, बा, अछि, सै, आहे, છે, ਹੈ, अस्ति। अंग्रेज़ी में क्रिया बीच में आ जाती है (is far away)। भारतीय भाषाओं की यह साझी बनावट अपने आप में एक खोज है।
  2. ‘वाला’ किस-किस रूप में मिलता है? वाला / वला / आळा / आळे / ওয়ালা / والے — एक ही प्रत्यय, थोड़ी-सी ध्वनि बदलकर, आधे भारत में फैला हुआ।
  3. ‘दूर’ लगभग सब जगह ‘दूर’ ही है — केवल नेपाली में ‘टाढा’ और मराठी में ‘लांब’ भी चलता है।
इसीलिए ‘भाषा संगम’ केवल अनुवाद का खेल नहीं है — यह देखने का तरीका है कि हमारी भाषाएँ अलग-अलग होकर भी एक-दूसरे की पड़ोसी हैं।
अपनी भाषा के लिए: यदि आपकी मातृभाषा ऊपर नहीं है, तो घर के बड़ों से पूछकर वाक्य लिखिए और उसके नीचे देवनागरी में उच्चारण भी लिख दीजिए, ताकि दूसरी भाषा के साथी भी उसे पढ़ सकें। कक्षा के सारे वाक्य एक चार्ट पर लगाकर दीवार पर टाँग दीजिए — यही आपकी कक्षा का ‘भाषा संगम’ होगा।
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