प्र1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं? 1. एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है? (क) शरीर के एक आवश्यक अंग का (ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का (घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
उत्तर
सटीक उत्तर — (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का।
यह उत्तर क्यों उपयुक्त है: एकांकी का अंतिम और सबसे तीखा वाक्य ही शीर्षक की व्याख्या कर देता है — “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन, बैकबोन!” शंकर के शरीर में रीढ़ की हड्डी तो है ही; उमा जो नहीं पाती वह है चरित्र की सीध। इसी बात की तैयारी लेखक पहले ही कर देता है — रंग-निर्देश में शंकर का परिचय है “झुकी कमर इनकी खासियत है”, और गोपालप्रसाद स्वयं बेटे को टोकते हैं — “झुककर क्यों बैठते हो? ब्याह तय करने आए हो, कमर सीधी करके बैठो। तुम्हारे दोस्त ठीक कहते हैं कि शंकर की ‘बैकबोन’...” वाक्य वहीं टूट जाता है, पर बात पूरी हो जाती है। इसके ठीक उलट उमा है, जिसका मस्तक उठ जाता है — “उसके स्वर में तल्लीनता आ जाती है, यहाँ तक कि उसका मस्तक उठ जाता है।” झुकी कमर बनाम उठा हुआ मस्तक — यही इस एकांकी का प्रतीक-विधान है। इसलिए ‘रीढ़ की हड्डी’ हड्डी का नहीं, आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| (क) शरीर के एक आवश्यक अंग का | ग़लत | यह शब्द का शब्दकोशीय अर्थ है, प्रतीकार्थ नहीं। यदि शीर्षक केवल हड्डी की बात करता तो एकांकी में कोई व्यंग्य ही न बचता — और उमा का वाक्य मज़ाक नहीं, चोट है। |
| (ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का | ग़लत | एकांकी में कहीं भी किसी पात्र की लंबाई-ऊँचाई चर्चा का विषय नहीं है। चर्चा का विषय है ‘कमर सीधी’ रखना, जो मुद्रा है, ऊँचाई नहीं। |
| (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का | सही ✓ | ‘बैकबोन’ अंग्रेज़ी में भी दृढ़ता और स्वाभिमान का मुहावरा है। शंकर का होस्टल-प्रसंग पर चुप रह जाना और सिर्फ़ “बाबूजी, चलिए।” कह पाना इसी दृढ़ता के अभाव का प्रमाण है। |
| (घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का | ग़लत | शारीरिक ताकत की बात एकांकी में आती ज़रूर है — गोपालप्रसाद की ‘कचौड़ियाँ’ और ‘बालाई’ वाली शेखी — पर वह हास्य का प्रसंग है। उमा शंकर की ताकत पर नहीं, उसकी कायरता पर उँगली रखती है — “न आपके पुत्र की तरह ताक-झाँककर कायरता दिखाई है।” |