गंगा अध्याय 6 भाषा में मुहावरे

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए— 1. “उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है— खाली हाथ।”
उत्तर

मुहावरा — भीगी बिल्ली की तरह (होना/आना)अर्थ — डरकर, सहमकर, बिलकुल दब्बू बनकर।

वाक्य में इसका काम: यह पंक्ति एक रंग-निर्देश से आई है, संवाद से नहीं — इसीलिए यह और भी सटीक है। रतन धोती के बजाय चादर न ला पाने पर डाँट खा चुका है और अब मालकिन के पीछे-पीछे खाली हाथ लौट रहा है। ‘भीगी बिल्ली’ शब्द-चित्र में वह पूरा दृश्य आ जाता है — झुके कंधे, धीमे कदम, नज़र नीची। ध्यान दीजिए, इसी पंक्ति में एक और मुहावरा छिपा है — खाली हाथ (लौटना), अर्थात् बिना कुछ पाए वापस आना।

मेरे नए वाक्य

  • शीशा टूटते ही शरारती बच्चा भीगी बिल्ली की तरह कोने में जा खड़ा हुआ।
  • कक्षा में इतनी बहस करने वाला मोहन प्रधानाचार्य के सामने भीगी बिल्ली बन जाता है।
  • मेला बंद हो चुका था, इसलिए हम खाली हाथ लौट आए।
प्र2.
2. “लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।”
उत्तर

मुहावरा — मुँह फुलानाअर्थ — रूठ जाना, नाराज़ होकर बोलचाल बंद कर देना।

वाक्य में इसका काम: प्रेमा शिकायत के स्वर में कहती है कि उमा तैयार होने से इनकार करके लेटी हुई है — “मेरा कहना था कि आँचल में मुँह लपेटकर लेट गई।” यहाँ मुहावरा माता-पिता की दृष्टि दिखाता है: उन्हें बेटी का विरोध केवल बचकाना रूठना लगता है। पर आगे चलकर एकांकी सिद्ध कर देता है कि वह रूठना नहीं, असहमति थी। यही इस मुहावरे का व्यंग्य है — बड़ों ने एक गंभीर इनकार को ‘मुँह फुलाना’ कहकर हल्का कर दिया।

मेरे नए वाक्य

  • मनपसंद खिलौना न मिलने पर छोटी बहन दिन-भर मुँह फुलाए बैठी रही।
  • टीम में जगह न मिलने से वह मुँह फुला बैठा, जबकि उसे और अभ्यास करना चाहिए था।
प्र3.
3. “और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?”
उत्तर

मुहावरा — किस मर्ज की दवा होनाअर्थ — किसी काम का न होना, बिलकुल बेकार होना (व्यंग्य में पूछा जाने वाला प्रश्न)।

वाक्य में इसका काम: ‘मर्ज’ का अर्थ है रोग और ‘दवा’ उसका इलाज। यानी सीधा अर्थ हुआ — “तुम किस बीमारी का इलाज हो?”, और लक्ष्य-अर्थ हुआ — “तुम किसी काम की नहीं हो।” रामस्वरूप यह वाक्य झुँझलाहट में पत्नी से कहते हैं, क्योंकि वे बेटी को ‘तैयार’ नहीं करा पाईं। यह मुहावरा उनके स्वभाव की भी चुगली करता है — घर में वे रोब जमाते हैं, और उन्हीं मेहमानों के सामने ‘हँ-हँ-हँ’ करके झुक जाते हैं।
ध्यान दीजिए: यह मुहावरा तीखा है और किसी व्यक्ति को नीचा दिखाता है। इसका प्रयोग अपने वाक्य में सावधानी से कीजिए — किसी साथी के लिए नहीं, किसी बेकार पड़ी वस्तु या व्यवस्था के लिए।

मेरे नए वाक्य

  • जो नल एक बूँद पानी न दे, वह किस मर्ज की दवा है?
  • ऐसी योजना किस मर्ज की दवा होगी जिसमें गाँव का नाम ही न हो!
प्र4.
4. “तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।”
उत्तर

मुहावरा — सिर चढ़ानाअर्थ — अत्यधिक लाड़-प्यार देकर ढीठ बना देना, मुँहज़ोर कर देना। (इसी परिवार का दूसरा रूप है — सिर चढ़ना, यानी स्वयं ढीठ हो जाना।)

वाक्य में इसका काम: यह एकांकी का सबसे अर्थपूर्ण मुहावरा-प्रयोग है, क्योंकि यहाँ ‘सिर चढ़ाने’ का कारण कोई शरारत नहीं — पढ़ाई बताई गई है। प्रेमा की दृष्टि में बेटी को पढ़ाना ही उसे बिगाड़ देना है। इसी वाक्य के साथ वह जोड़ती है — “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” इस तरह एक साधारण मुहावरा उस पूरे युग की सोच का प्रमाण बन जाता है। और एकांकी के अंत तक आते-आते हम देख लेते हैं कि जिसे माँ ‘सिर चढ़ना’ कहती है, वह असल में सिर उठाना है — “उसका मस्तक उठ जाता है।”

मेरे नए वाक्य

  • हर ज़िद पूरी करके नाना जी ने पोते को कुछ ज़्यादा ही सिर चढ़ा रखा है।
  • प्रशंसा अच्छी है, पर वह सिर चढ़ जाए तो सीखना रुक जाता है।
प्र5.
5. “मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।”
उत्तर

मुहावरा — (सब-कुछ) उगल देनाअर्थ — छिपाई हुई बात कह देना, भेद खोल देना।

वाक्य में इसका काम: रामस्वरूप डरे हुए हैं कि प्रेमा मेहमानों के सामने कहीं यह न बता दे कि उमा बी.ए. पास है। इसीलिए वे पहले ही चेतावनी दे देते हैं — “तुम्हें कतई अपनी जबान पर काबू नहीं है।” मुहावरे का चुनाव देखिए: ‘उगलना’ शब्द अपने आप में बताता है कि जो बात कही जा रही है वह निगली हुई, यानी दबाई हुई है। यहीं से एकांकी का वह झूठ शुरू होता है जो अंत में पकड़ा जाता है — “आपने मुझको कहा था कि सिर्फ मैट्रिक तक पढ़ी है।”

मेरे नए वाक्य

  • दो ही प्रश्नों में उसने सारी योजना उगल दी
  • जन्मदिन की तैयारी गुप्त रखनी थी, पर छोटे भाई ने सब कुछ उगल दिया
प्र6.
6. “यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।”
उत्तर

मुहावरा — काँटों में घसीटनाअर्थ — अत्यधिक प्रशंसा या शिष्टाचार से किसी को संकोच और असमंजस में डाल देना; बहुत लज्जित कर देना।

वाक्य में इसका काम: गोपालप्रसाद ने अभी-अभी कहा था — “जैसा मेरा काम, वैसा आपका काम... बल्कि यों कहिए कि मैंने आपके लिए खासी परेशानी कर दी।” रामस्वरूप इस पर तुरंत यह मुहावरा उछाल देते हैं। यह उस समय की औपचारिक शिष्टाचार-भाषा का नमूना है, जिसमें बड़प्पन दिखाने के लिए दोनों पक्ष अपने को छोटा बताते हैं। लेखक इसी बनावटी विनय पर हँसता है — क्योंकि यह पूरी मीठी बातचीत आगे चलकर ‘बिजनेस’ में बदल जाती है।

मेरे नए वाक्य

  • सबके सामने इतनी तारीफ़ करके आपने तो मुझे काँटों में घसीट दिया
  • छोटी-सी मदद के लिए इतना धन्यवाद मत दीजिए, मुझे काँटों में मत घसीटिए
प्र7.
7. “बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?”
उत्तर

मुहावरा — इज्जत उतारनाअर्थ — अपमानित करना, सबके सामने मान-मर्दन करना।

वाक्य में इसका काम: यह एकांकी का सबसे व्यंग्यपूर्ण मुहावरा-प्रयोग है। गोपालप्रसाद ‘इज्जत’ की दुहाई उस समय देते हैं जब वे स्वयं घंटे-भर से एक लड़की की नाप-तोल कर रहे थे। और उमा ठीक यही शब्द उन्हें लौटा देती है — “जी हाँ, और हमारी बेइज्जती नहीं होती जो आप इतनी देर से नाप-तोल कर रहे हैं?” एक ही मुहावरे को दो पक्षों के मुँह में रखकर लेखक दिखा देता है कि इस समाज में ‘इज्जत’ किसकी गिनी जाती है और किसकी नहीं।

मेरे नए वाक्य

  • सबके सामने चिल्लाकर उसने अपने ही मित्र की इज्जत उतार दी
  • किसी की गलती अकेले में बताइए — भरी सभा में इज्जत उतारना ठीक नहीं।
प्र8.
8. “लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
उत्तर

मुहावरा — मुँह छिपाकर भागनाअर्थ — लज्जित होकर, नज़र न मिला पाने की स्थिति में भाग जाना।

वाक्य में इसका काम: यह मुहावरा एकांकी के प्रतीक-विधान से जुड़ जाता है। शंकर का परिचय ही आँखें छिपाने से हुआ था — वह उमा को “आँखें छिपाकर” ताक रहा था। अब उमा उसकी पुरानी घटना याद दिलाकर वही मुद्रा सबके सामने रख देती है। और सबसे बड़ी बात — इस आरोप के बाद वह फिर वही करता है: “बाबूजी, चलिए।” यानी मुहावरा केवल पिछली घटना का वर्णन नहीं करता, वह इसी क्षण मंच पर फिर से घट रहा है। ‘मुँह छिपाना’ और ‘रीढ़ की हड्डी न होना’ — दोनों एक ही बात के दो नाम हैं।

मेरे नए वाक्य

  • चोरी पकड़ी जाते ही वह मुँह छिपाकर भाग खड़ा हुआ।
  • जो सच बोलता है उसे कभी मुँह छिपाकर भागना नहीं पड़ता।
दोहराव के लिए — एक नज़र में आठों मुहावरे
मुहावराअर्थकिसने कहा
भीगी बिल्ली की तरहडरकर, सहमकररंग-निर्देश (रतन के लिए)
मुँह फुलानारूठ जानाप्रेमा (उमा के लिए)
किस मर्ज की दवा होनाकिसी काम का न होनारामस्वरूप (प्रेमा से)
सिर चढ़ानालाड़ देकर ढीठ बना देनाप्रेमा (उमा के लिए)
उगल देनाभेद खोल देनारामस्वरूप (प्रेमा से)
काँटों में घसीटनाअधिक शिष्टाचार से संकोच में डालनारामस्वरूप (गोपालप्रसाद से)
इज्जत उतारनाअपमानित करनागोपालप्रसाद (रामस्वरूप से)
मुँह छिपाकर भागनालज्जित होकर भाग जानाउमा (शंकर के लिए)
Tip: मुहावरा कभी अकेला नहीं लिखा जाता — उसे वाक्य में और क्रिया के साथ ढालकर लिखिए (‘मुँह फुलाना’ नहीं, ‘वह मुँह फुलाए बैठी है’)। परीक्षा में यही देखा जाता है कि आपने मुहावरे को सही रूप में और सही प्रसंग में चलाया है या नहीं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ