प्र1.
एकांकी में पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर
यह गतिविधि आपको संदर्भ से अर्थ निकालना सिखाती है — भाषा सीखने का सबसे उपयोगी कौशल। तरीका यह है:
- पाठ पढ़ते हुए जो शब्द अटकाए, उसे पेंसिल से रेखांकित कर लीजिए।
- शब्दकोश तुरंत मत खोलिए। पहले पूरा वाक्य लिखिए और सोचिए — यह शब्द किसने कहा, किस भाव में कहा, आगे-पीछे क्या हो रहा है? उसी से अनुमान लगाइए।
- अब शब्दकोश देखिए और दोनों अर्थ आमने-सामने लिखिए। जहाँ अनुमान ठीक निकले, वहाँ अपनी पीठ थपथपाइए; जहाँ न निकले, वहाँ देखिए कि किस संकेत को आपने चूक दिया।
- अंत में हर शब्द से अपना एक वाक्य बनाइए — शब्द तभी अपना होता है जब वह आपके वाक्य में आ जाए।
नमूना उत्तर — मेरे पाँच नए शब्द
| शब्द | एकांकी का वाक्य | मेरा अनुमान (संदर्भ से) | शब्दकोश का अर्थ |
|---|---|---|---|
| दकियानूसी | “गुस्सा तो मुझे बहुत आता है इनके दकियानूसी खयालों पर। खुद पढ़े-लिखे हैं, वकील हैं... मगर लड़की चाहते हैं ऐसी कि ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो।” | ‘पढ़े-लिखे होकर भी’ के विरोध से लगा कि इसका अर्थ है — पुरानी, पिछड़ी सोच। | पुराने विचार का, पुराना। (अनुमान सही निकला।) |
| फितरती | “आवाज़ से मालूम होता है कि काफी अनुभवी और फितरती महाशय हैं।” | ‘अनुभवी’ के साथ आया है, इसलिए लगा — बहुत होशियार, दुनियादार। | चालबाज, प्रकृतिगत। (अनुमान आधा सही — शब्द में केवल चतुराई नहीं, चालाकी का नकारात्मक भाव भी है, जो आगे गोपालप्रसाद के व्यवहार से सिद्ध हो जाता है।) |
| तकल्लुफ़ | “गोपालप्रसाद : यह सब आप क्या तकल्लुफ़ करते हैं!” / “रामस्वरूप : तकल्लुफ़ किस बात का!” | नाश्ते की तैयारी देखकर कहा गया है, इसलिए लगा — इतना आदर-सत्कार क्यों। | बनावट, शिष्टाचार। (अनुमान सही — यहाँ अर्थ है ‘औपचारिकता’।) |
| मुखातिब | “(शंकर की तरफ मुखातिब होकर) आपका क्या खयाल है, शंकर बाबू?” | ‘तरफ होकर’ और उसके बाद सीधे प्रश्न — इसलिए लगा, किसी की ओर मुड़कर बात करना। | संबोधन करने वाला, बात करने वाला। (अनुमान सही।) |
| जायचा | “और जायचा (जन्मपत्र) तो मिल ही गया होगा?” | कोष्ठक में ही संकेत दे दिया गया है — जन्म से जुड़ा कोई काग़ज़। | जन्मपत्री। (विवाह तय करते समय वर-वधू की जन्मपत्रियाँ मिलाने की पुरानी रीति। रामस्वरूप का उत्तर — “ठाकुर जी के चरणों में रख दिया” — इस रस्म पर भी हल्का व्यंग्य है।) |
अब मेरे अपने वाक्य
- दकियानूसी — बेटियों को खेल के मैदान से दूर रखना आज भी कुछ लोगों की दकियानूसी सोच है।
- फितरती — उस फितरती दुकानदार ने मीठी बातों में उलझाकर पुराना माल थमा दिया।
- तकल्लुफ़ — अपने घर आए हो, तकल्लुफ़ छोड़ो और आराम से बैठो।
- मुखातिब — प्रधानाचार्य मंच से पूरी सभा को मुखातिब हुए।
- जायचा — पंडित जी ने दोनों के जायचे मिलाकर विवाह की तिथि तय की।
Tip: इस एकांकी में नए शब्दों की तीन खानें हैं — (1) उर्दू-फ़ारसी के शब्द जो शिष्टाचार से जुड़े हैं (तशरीफ़, तकल्लुफ़, निहायत, माफ़िक, अर्ज़, मुखातिब); (2) पुराने घरेलू शब्द (तख्त, नाँद जैसी चीज़ें, डाट, करीना, जायचा); (3) अंग्रेज़ी से आए शब्द जो पात्रों की आधुनिक दिखने की कोशिश बताते हैं (बिजनेस, मार्जिन, वीक-एंड, ग्रेड, टैक्स, बैकबोन)। पाँच शब्द चुनते समय तीनों खानों से चुनिए — तब आपकी सूची पूरे एकांकी की भाषा का नक्शा बन जाएगी।