कक्षा ९ हिंदी अध्याय 7 मैं और मेरा देश के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
रचनाकार — हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म सन् 1906 ई. में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था; उन्होंने नया जीवन और विकास पत्रों का संपादन किया। प्रारंभ से ही स्वतंत्रता संग्राम एवं सामाजिक कार्यों में भाग लेने के कारण उन्हें अनेक बार जेल-यात्रा भी करनी पड़ी। अपनी उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाओं के लिए उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। सन् 1995 में उनका निधन हुआ। उनके संस्मरणात्मक निबंध-संग्रह — दीप जले शंख बजे , जिंदगी मुसकराई , बाजे पायलिया के घुँघरू , जिंदगी लहलहाई , क्षण बोले कण मुसकाए , कारवाँ आगे बढ़े , माटी हो गई सोना , महके आँगन चहके द्वार और आकाश के तारे धरती के फूल — गहन मानवतावादी दृष्टिकोण और जीवन-दर्शन के परिचायक हैं। पत्रकार होने के कारण उनकी भाषा में सीधी बात कहने का साहस है और निबंधकार होने के कारण उस
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्द | अर्थ | पाठ की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|---|
| संचित | इकट्ठा किया हुआ, जमा किया हुआ, ढेर लगाया हुआ | “वहाँ के संचित ज्ञान-भंडार का उपयोग कर” | पुस्तकालय हमारी संचित बुद्धि का घर है। |
| मानस | मन, चित्त, मन से उत्पन्न; मानसरोवर; रामचरितमानस | “यह भूकंप … मेरे मानस में ही उठा था।” | उस दृश्य ने मेरे मानस पर गहरी छाप छोड़ी। |
| तेजस्वी | तेजवाला, प्रतापी, शक्तिशाली, प्रभावशाली | “वे तेजस्वी पुरुष थे स्वर्गीय पंजाब-केसरी लाला लाजपत राय।” | उसका तेजस्वी चेहरा दूर से ही पहचान लिया जाता है। |
| ठसक | चाल-ढाल का बनावटीपन जिससे रूप, धन आदि का गर्व सूचित हो; ऐंठ, शान, नखरा | “मेरी पूर्णता को एक ही ठसक में अपूर्णता की कसक से भर दिया।” | धन आने पर उसकी चाल में ठसक आ गई। |
| धनिक | धनवान, धनी, स्वामी | “हरेक आदमी न तो ऐसा वैज्ञानिक ही हो सकता है, न धनिक ही।” | धनिक होना बड़ी बात नहीं, उदार होना बड़ी बात है। |
| रसद | अनाज, खाने का सामान, भत्ता, राशन | “लड़ने वालों को रसद न पहुँचे तो वे कैसे लड़ें।” | बाढ़-पीड़ितों तक रसद पहुँचाना पहला काम था। |
| दाद देना | न्यायोचित प्रशंसा करना, न्याय करना | “मुशायरों की सारी सफलता दाद देने वालों पर ही निर्भर करती है।” | उसकी मेहनत की दाद तो देनी ही पड़ेगी। |
| साक्षी | गवाही, गवाह का बयान | “इतिहास साक्षी है, बहुत बार अकेले चने ने ही भाड़ फोड़ा है।” | यह इमारत हमारे नगर के इतिहास की साक्षी है। |
| लांछित | दोषयुक्त, कलंकित | “जाने कितने वर्षों तक संसार की आँखों में उसे लांछित करता रहा।” | बिना जाँच किसी को लांछित करना अन्याय है। |
| हँडिया | एक प्रकार का मिट्टी का बर्तन | “यह उपहार मिट्टी की छोटी हँडिया में पाव-भर शहद था।” | दादी आज भी हँडिया में ही दाल पकाती हैं। |
| सुतली | सन या पटसन के रेशों से बटकर बनाई हुई डोरी | “एक किसान ने रंगीन सुतलियों से एक खाट बुनी।” | पैकेट को सुतली से कसकर बाँध दो। |
| चौपाल | खुली या छायी हुई मंडपाकार बैठक जहाँ गाँव के लोग बैठकर पंचायत आदि करते हों; छायादार बड़ा चबूतरा या दालान | “चलती रेलों में, मुसाफिरखानों में, क्लबों में, चौपालों पर…” | शाम को गाँव की चौपाल पर सब जुट जाते हैं। |
| सघन | घना, गझिन, ठोस | “कर्ण के सघन आत्मविश्वास में संदेह की तरेड़ डाल दी।” | सघन वन में दिन में भी अँधेरा रहता है। |
| तरेड़ | दरार | “संदेह की तरेड़ डाल दी, जो … भावी पराजय की नींव रखने में सफल हो गई।” | घड़े में पड़ी छोटी-सी तरेड़ भी उसे बेकार कर देती है। |
| ज़ीना | सीढ़ी, सोपान | “होटलों-धर्मशालाओं में … ज़ीनों में, कोनों में पीक थूकते हैं?” | ज़ीने पर चढ़ते समय रेलिंग पकड़ लीजिए। |
| दरार | दीवार में पैदा हुई चटक/तरेड़/फाँक/टूटन; (लाक्षणिक) संबंधों में पड़ी फूट | “एक दिन आनंद की इस दीवार में एक दरार पड़ गई।” | छोटी-सी गलतफहमी ने दोनों की दोस्ती में दरार डाल दी। |
| गाँठ | धागे-रस्सी का बंधन; (लाक्षणिक) वह बंधन जो दो को जोड़े | “उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है, जो नागरिक और देश को एक साथ बाँधती है” | परिवार की गाँठ विश्वास से बँधती है। |
| शक्ति-बोध | देश के सामूहिक मानसिक बल और आत्मविश्वास का भाव | “हमारे देश को दो बातों की … जरूरत है। एक शक्ति-बोध और दूसरा सौंदर्य-बोध।” | खिलाड़ियों में शक्ति-बोध जगाना कोच का पहला काम है। |
| सौंदर्य-बोध | सुरुचि और सुंदरता की समझ; स्वच्छ, सुव्यवस्थित और सुसंस्कृत आचरण | “आपके द्वारा देश के सौंदर्य-बोध को भयंकर आघात लग रहा है।” | सौंदर्य-बोध वाला व्यक्ति दीवार पर नाम नहीं लिखता। |
| पराधीनता | परतंत्रता, दूसरे के अधीन होने की स्थिति | “अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में…” | पराधीनता में सुख के साधन भी बेस्वाद हो जाते हैं। |
| लांछन/कलंक का टीका | बदनामी का दाग | “एक युवक ने अपने देश के मस्तक पर कलंक का ऐसा टीका लगाया…” | एक व्यक्ति की चोरी पूरे दल पर कलंक का टीका लगा गई। |
| भामाशाह | मेवाड़ के वे मंत्री-सेठ जिन्होंने अपना सारा धन महाराणा प्रताप को अर्पित कर दिया; (लाक्षणिक) समय पर धन-त्याग करने वाला दानी | “अपने धन का भामाशाह की तरह समय पर त्याग कर ही कुछ काम आ सकता है” | विद्यालय के लिए भवन बनवाकर वे हमारे गाँव के भामाशाह बन गए। |
| निबंध | ‘नि + बंध’ अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ; गद्य की वह विधा जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव और विचार क्रमबद्ध तथा साहित्यिक ढंग से प्रस्तुत करता है | “‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है— ‘बाँधना’ (नि+बंध)।” | परीक्षा में ‘मेरा भारत मेरा गौरव’ पर निबंध पूछा गया था। |
| शब्द-युग्म | दो शब्दों का समूह जो कभी समान अर्थ, कभी समान उच्चारण और कभी विपरीत भाव देता है | “‘ममता-दुलार’ और … ‘भरा-पूरा’ शब्द मिलता-जुलता भाव दे रहे हैं। ये शब्द-युग्म हैं।” | शब्द-युग्म के प्रयोग से भाषा में सजीवता आ जाती है। |
अभ्यास
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- मेरे अनुभव मेरे विचार
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- विधा से संवाद
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