गंगा अध्याय 7 मैं और मेरा देश के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-06
इस अध्याय के बारे में
रचनाकार — हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म सन् 1906 ई. में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था; उन्होंने नया जीवन और विकास पत्रों का संपादन किया। प्रारंभ से ही स्वतंत्रता संग्राम एवं सामाजिक कार्यों में भाग लेने के कारण उन्हें अनेक बार जेल-यात्रा भी करनी पड़ी। अपनी उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाओं के लिए उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। सन् 1995 में उनका निधन हुआ। उनके संस्मरणात्मक निबंध-संग्रह — दीप जले शंख बजे , जिंदगी मुसकराई , बाजे पायलिया के घुँघरू , जिंदगी लहलहाई , क्षण बोले कण मुसकाए , कारवाँ आगे बढ़े , माटी हो गई सोना , महके आँगन चहके द्वार और आकाश के तारे धरती के फूल — गहन मानवतावादी दृष्टिकोण और जीवन-दर्शन के परिचायक हैं। पत्रकार होने के कारण उनकी भाषा में सीधी बात कहने का साहस है और निबंधकार होने के कारण उस
अभ्यास
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- मेरे अनुभव मेरे विचार
- मेरे प्रश्न
- विधा से संवाद
- चुनाव एवं आपके अनुभव
- अधिकार और कर्तव्य
- हमारा पुस्तकालय
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