गंगा अध्याय 7 भाषा संगम

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“मैं अपने देश का नागरिक हूँ” — नीचे ‘देश’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। … • इनके अतिरिक्त यदि आप ‘देश’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर

पहले पुस्तक की दी हुई सूची एक बार व्यवस्थित रूप में देख लीजिए —

भाषा‘देश’ के लिए शब्दभाषा‘देश’ के लिए शब्द
हिंदीदेशनेपालीदेश, मुलुक, राष्ट्र
संस्कृतदेशः, क्षेत्रम्बांग्लाप्रदेश, अञ्चल, राज्य
पंजाबीदेस, देशअसमियादेश, राज्य, प्रदेश
उर्दूख़ित्ता, इलाक़ामणिपुरीलैबाक, मफम, लम
कश्मीरीदीश, मुलुँखओड़िआदेश, राज्य, प्रदेश, अंचल
सिंधीदेशु, देसुतेलुगुप्रदेशमु
मराठीदेशतमिलइडम्, पिरदेशम्
गुजरातीदेश, प्रदेशमलयालमदेशम्
कोंकणीदेशकन्नड़देश

अब कुछ और भाषाएँ और बोलियाँ जोड़िए —

भाषा / बोली‘देश’ के लिए शब्द
भोजपुरी, अवधी, ब्रज, मैथिली, राजस्थानी, हरियाणवी, छत्तीसगढ़ीदेस / देश (इन सबमें रूप लगभग एक ही है — यही हिंदी-प्रदेश की भाषिक एकता का प्रमाण है)
डोगरीदेस
संथालीदिसोम
बोडोहादोर / हा (‘हा’ का अर्थ है भूमि)
अंग्रेज़ीcountry, nation, land
अरबी/फ़ारसी से आए शब्द जो हिंदी-उर्दू में चलते हैंमुल्क, वतन, सरज़मीन
इस सूची से क्या दिखता है — तीन बातें:
  1. एक ही मूल, अनेक रूप। संस्कृत ‘देश’ से देस, देसु, दीश, देशम्, देशमु, पिरदेशम् — सब निकले हैं। ध्वनि बदली, अर्थ नहीं। यही भारतीय भाषाओं का साझा भंडार है।
  2. कुछ भाषाओं ने अपने शब्द गढ़े। मणिपुरी का ‘लैबाक’ और ‘लम’, बोडो का ‘हा’, संथाली का ‘दिसोम’ — ये संस्कृत-मूल के नहीं हैं। भारत में केवल एक भाषा-परिवार नहीं है।
  3. कुछ शब्द बाहर से आकर अपने हो गए। उर्दू का ‘ख़ित्ता’ और ‘इलाक़ा’, कश्मीरी-नेपाली का ‘मुलुक/मुलुँख’ — अरबी-फ़ारसी से आए, पर आज उतने ही भारतीय हैं जितना ‘देश’।
इसीलिए यह डिब्बा ‘भाषा संगम’ कहलाता है — जहाँ अनेक भाषाएँ एक ही अर्थ पर आकर मिलती हैं।
Try This: कक्षा में जितनी मातृभाषाएँ हैं, उतने कागज़ बनाइए और हर कागज़ पर ‘देश’ लिखकर एक चार्ट पर लगाइए। फिर एक-एक विद्यार्थी अपनी भाषा में उसका उच्चारण करके सुनाए। अंत में गिनिए — कितने शब्दों में ‘द’ की ध्वनि सुनाई दी?
प्र2.
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए। (वाक्य — “मैं अपने देश का नागरिक हूँ”)
उत्तर

नीचे यह वाक्य कुछ भारतीय भाषाओं में देवनागरी लिप्यंतरण के साथ दिया गया है। आप इसमें अपनी मातृभाषा की पंक्ति जोड़िए और कक्षा में सबकी पंक्तियाँ एक ही चार्ट पर लगाइए।

भाषा“मैं अपने देश का नागरिक हूँ”
हिंदीमैं अपने देश का नागरिक हूँ।
संस्कृतअहं स्वदेशस्य नागरिकः अस्मि।
पंजाबीमैं आपणे देस दा नागरिक हाँ।
उर्दूमैं अपने मुल्क का शहरी हूँ।
भोजपुरीहम आपन देस के नागरिक हईं।
मैथिलीहम अपन देसक नागरिक छी।
मराठीमी माझ्या देशाचा नागरिक आहे।
गुजरातीहुं मारा देशनो नागरिक छुं।
नेपालीम मेरो देशको नागरिक हुँ।
कोंकणीहांव म्हज्या देशाचो नागरिक।
बांग्लाआमि आमार देशेर नागरिक।
असमियामइ मोर देशर नागरिक।
ओड़िआमुँ मो देशर नागरिक।
तेलुगुनेनु ना देश पौरुडिनि।
तमिलनान् एन् नाट्टिन् कुडिमहन्।
कन्नड़नानु नन्न देशद प्रजे।
मलयालमञान् एन्ऱे राज्यत्तिन्ऱे पौरनाण्।
अंग्रेज़ीI am a citizen of my country.
वाक्य लिखकर ये तीन बातें देखिए:
  1. क्रिया अंत में आती है। ‘हूँ’, ‘आहे’, ‘छुं’, ‘हुँ’, ‘अस्मि’ — लगभग हर भारतीय भाषा में वाक्य क्रिया पर समाप्त होता है, जबकि अंग्रेज़ी में क्रिया (am) बीच में आ जाती है।
  2. ‘अपना’ का रूप बदलता है, भाव नहीं। अपने / आपणे / आपन / माझ्या / मारा / मेरो / म्हज्या / आमार / मो — सब ‘अपना’ ही कह रहे हैं।
  3. ‘नागरिक’ शब्द अधिकांश भाषाओं में ज्यों-का-त्यों मिलता है — तमिल में ‘कुडिमहन्’, तेलुगु में ‘पौरुडु’, उर्दू में ‘शहरी’ — पर ये भी उसी अर्थ के अपने-अपने शब्द हैं।
ध्यान रखिए: ऊपर के वाक्य देवनागरी में लिप्यंतरित हैं, इसलिए उच्चारण में थोड़ा अंतर रह सकता है। अपनी मातृभाषा की पंक्ति उसी लिपि में भी लिखिए जिसमें वह भाषा लिखी जाती है, और यदि हो सके तो उस भाषा को बोलने वाले किसी बड़े से एक बार जाँच करा लीजिए — यही ‘भाषा संगम’ का असली अभ्यास है।
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