प्र1.
‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है।’ इस विषय पर परिचर्चा का आयोजन कीजिए और परिचर्चा में उभरकर आए बिंदुओं की रिपोर्ट तैयार कीजिए। रिपोर्ट को पावर प्वांइट प्रस्तुतीकरण या चार्ट के माध्यम से कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
यह तीन चरणों का काम है — परिचर्चा कराना, रिपोर्ट बनाना, प्रस्तुत करना। तीनों का तरीका और एक पूरा नमूना नीचे दिया गया है।
चरण 1 — परिचर्चा कैसे आयोजित करें
- कक्षा को चार समूहों में बाँटिए — भूमि, जन, संस्कृति-भाषा, मूल्य-संविधान। हर समूह अपने पक्ष से तीन तर्क तैयार करे।
- एक संचालक और एक लेखक (जो बोर्ड पर बिंदु लिखता जाए) चुनिए। हर वक्ता को दो मिनट।
- नियम — किसी की बात बीच में न काटें; हर तर्क के साथ एक उदाहरण दें; और अंत में हर समूह दूसरे समूह के एक तर्क को स्वीकार करे। इससे परिचर्चा वाद-विवाद नहीं, साझी समझ बनती है।
चरण 2 — रिपोर्ट (नमूना)
परिचर्चा रिपोर्ट
विषय: ‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है।’
दिनांक: 22 अगस्त 20×× | स्थान: कक्षा नौ ‘अ’ | प्रतिभागी: 38 विद्यार्थी, संचालन — कक्षा प्रतिनिधि
उभरकर आए मुख्य बिंदु —
निष्कर्ष: देश एक भौगोलिक इकाई भी है, पर उससे कहीं अधिक वह एक सामूहिक भावना है — “मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।”
रिपोर्ट प्रस्तुतकर्ता: अ.ब.स., कक्षा नौ ‘अ’
विषय: ‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है।’
दिनांक: 22 अगस्त 20×× | स्थान: कक्षा नौ ‘अ’ | प्रतिभागी: 38 विद्यार्थी, संचालन — कक्षा प्रतिनिधि
उभरकर आए मुख्य बिंदु —
- देश = भूमि + जन। यदि देश केवल भूमि होता तो सीमाएँ बदलने से देश बदल जाता। पर सीमाएँ बदलती रही हैं और देश की पहचान बनी रही है। निबंध का वाक्य — “मैं अपने देश का नागरिक हूँ और मानता हूँ कि मैं अपना देश हूँ।”
- देश एक साझा स्मृति है। स्वतंत्रता संग्राम, त्योहार, लोकगीत, महापुरुष — ये सब मानचित्र पर नहीं दिखते, पर देश इन्हीं से बनता है। “जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए” — वे सीमा नहीं, स्मृति हैं।
- देश भाषाओं और संस्कृतियों का संगम है। एक ही शब्द ‘देश’ बाईस भाषाओं में अलग-अलग ध्वनियों में मिलता है (‘भाषा संगम’ देखिए) — पर भाव एक है। यही अनेकता में एकता है।
- देश मूल्यों से बनता है। संविधान के मौलिक अधिकार और मूल कर्तव्य देश को केवल भूखंड नहीं, एक वचन बना देते हैं।
- देश आचरण में दिखता है। जापानी युवक ने फल देकर और दूसरे देश के विद्यार्थी ने चित्र चुराकर — दोनों ने अपने-अपने देश की परिभाषा गढ़ी। देश वही है जो उसके नागरिक करते हैं।
- देश प्रवासी के साथ भी जाता है। लाला लाजपत राय अमेरिका, इंग्लैंड और फ्रांस गए — पर उनका देश उनके माथे पर साथ गया। इससे बड़ा प्रमाण क्या कि देश सीमा में बंद नहीं रहता!
निष्कर्ष: देश एक भौगोलिक इकाई भी है, पर उससे कहीं अधिक वह एक सामूहिक भावना है — “मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।”
रिपोर्ट प्रस्तुतकर्ता: अ.ब.स., कक्षा नौ ‘अ’
चरण 3 — प्रस्तुतीकरण (स्लाइड/चार्ट की रूपरेखा)
| स्लाइड/चार्ट | उस पर क्या हो |
|---|---|
| 1. शीर्षक | विषय, कक्षा, तिथि — और बीच में केवल एक पंक्ति: “देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है।” |
| 2. प्रश्न | भारत का मानचित्र और उस पर प्रश्न — “क्या यही पूरा भारत है?” |
| 3–6. चार स्तंभ | भूमि · जन · भाषा-संस्कृति · मूल्य — हर स्लाइड पर तीन-तीन बिंदु और एक चित्र। |
| 7. प्रमाण | पाठ की दो घटनाएँ — जापानी युवक और चोरी करने वाला विद्यार्थी, आमने-सामने। |
| 8. असहमति | ‘सीमा का महत्व’ — विरोधी तर्क को भी स्थान दीजिए; यही अच्छी रिपोर्ट की पहचान है। |
| 9. निष्कर्ष | “सीमा शरीर है, नागरिक आत्मा।” |
प्रस्तुतीकरण के तीन नियम: एक स्लाइड पर पचास से अधिक शब्द नहीं; जो लिखा है उसे पढ़कर मत सुनाइए, उस पर बोलिए; और अंत में कक्षा से एक प्रश्न पूछिए — “आपके लिए देश का अर्थ क्या है?” प्रस्तुति तभी परिचर्चा बनती है।