कक्षा ९ हिंदी अध्याय 7 व्याकरण की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
“मैं सोचा करता था कि मेरी मनुष्यता में अब कोई अपूर्णता नहीं रही।” उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित शब्द ‘अपूर्णता’ में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का ही प्रयोग चिह्नित किया गया है। इस प्रयोग को समझकर नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय शब्द पहचानकर लिखिए— अलौकिक, निरक्षरता, सम्मानित, अनावश्यक, अपमानित, अभिमानी
उत्तर

पुस्तक में तालिका की केवल पहली पंक्ति (‘अपूर्णता’) भरी हुई है। नीचे पूरी तालिका भरकर दी गई है।

शब्दउपसर्गमूल शब्दप्रत्यय
अपूर्णता (पुस्तक में दिया हुआ)अपूर्णता
अलौकिकअलोकइक
निरक्षरतानिर्अक्षरता
सम्मानितसम्मानइत
अनावश्यकअन्आवश्यक— (कोई प्रत्यय नहीं)
अपमानितअपमानइत
अभिमानीअभिमानई
हर शब्द का विश्लेषण — क्यों ऐसा बना:
  • अपूर्णता = अ (निषेध) + पूर्ण + ता (भाववाचक) → ‘पूर्ण न होने का भाव’।
  • अलौकिक = अ (निषेध) + लोक + इक → ‘लोक’ से ‘लौकिक’ बना (इक प्रत्यय लगने पर पहला स्वर बढ़ जाता है — ओ ⟶ औ), फिर ‘अ’ लगकर ‘अलौकिक’ = जो इस लोक का न हो, अद्भुत।
  • निरक्षरता = निर् (अभाव) + अक्षर + ता → ‘अक्षर-ज्ञान न होने का भाव’। ध्यान दीजिए, ‘निः/निर्’ का रूप आगे आने वाले वर्ण के अनुसार बदलता है (निर्धन, निष्फल, निश्चय)।
  • सम्मानित = सम् (भली-भाँति) + मान + इत → ‘जिसे सम्मान दिया गया हो’। ‘सम् + मान’ की संधि से ‘सम्मान’ बनता है।
  • अनावश्यक = अन् (निषेध) + आवश्यक → ‘जो आवश्यक न हो’। यहाँ ‘अ’ नहीं, ‘अन्’ लगा — क्योंकि आगे स्वर (आ) है। नियम याद रखिए: व्यंजन से आरंभ हो तो ‘अ’ (अपूर्ण, असत्य); स्वर से आरंभ हो तो ‘अन्’ (अनावश्यक, अनुचित, अनादर)। इस शब्द में कोई प्रत्यय नहीं है।
  • अपमानित = अप (बुरा, नीचे) + मान + इत → ‘जिसका मान घटाया गया हो’। ‘अप’ का यही अर्थ अपयश, अपकार, अपशब्द में भी है।
  • अभिमानी = अभि (अपनी ओर, विशेष) + मान + ई (विशेषण बनाने वाला) → ‘जिसे अपने ही मान का अधिक भान हो’, घमंडी।
ध्यान देने की बात: ‘मान’ एक ही मूल शब्द है, पर उपसर्ग बदलते ही अर्थ बिलकुल बदल जाता है — सम्मान (आदर), अपमान (अनादर), अभिमान (घमंड), स्वाभिमान (अपनी गरिमा का बोध)। इसी निबंध में ‘सम्मान’ और ‘अपमान’ दोनों बार-बार आए हैं — “मैं अपने नगर के लोगों का सम्मान करता था” और “मेरा कहीं भी और कोई भी अपमान कर सकता है”। एक ही मूल से बने दो शब्द, और दोनों के बीच पूरा निबंध खड़ा है।
अभ्यास के लिए और शब्द (इसी पाठ से): पराधीनता = परा + अधीन + ता · अपूर्व = अ + पूर्व · निर्दयी = निर् + दया + ई · प्रतिनिधित्व = प्रति + निधि + त्व · सुरुचि = सु + रुचि · कुरुचि = कु + रुचि · सर्वोत्तम = सर्व + उत्तम (संधि) · तेजस्वी = तेजस् + वी · साहित्यिक = साहित्य + इक। (उपसर्ग और प्रत्यय की जानकारी आपकी पाठ्यपुस्तक के ‘क्या लिखूँ?’ पाठ में भी दी गई है।)
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