गंगा अध्याय 7 व्याकरण की बात

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।” / “इस तरह एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर मैं खड़ा हुआ था।” — पहले वाक्य में ‘ममता-दुलार’ और दूसरे वाक्य में ‘भरा-पूरा’ शब्द मिलता-जुलता भाव दे रहे हैं। ये शब्द-युग्म हैं। … आप इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द को फिर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।
उत्तर

निबंध में तीनों प्रकार के शब्द-युग्म मिलते हैं। नीचे उन्हें अलग-अलग छाँटकर, अर्थ और प्रयोग-पंक्ति सहित दिया गया है।

(1) मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द-युग्म (पर्यायवाची/समानार्थी युग्म)

शब्द-युग्मभावनिबंध की पंक्ति
ममता-दुलार(पुस्तक में दिया हुआ)स्नेह और लाड़“पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”
भरा-पूरा(पुस्तक में दिया हुआ)संपूर्ण, समृद्ध“एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर मैं खड़ा हुआ था।”
पास-पड़ोसआस-पास का क्षेत्र“उनके परिवार, उनके पास-पड़ोस और उनके नगर ने…”
ज्ञान-भंडारज्ञान का संचित कोश“वहाँ के संचित ज्ञान-भंडार का उपयोग कर”
घूम-फिरकरभ्रमण करके“अपने नगर में घूम-फिरकर, वहाँ के विशाल समाज का संपर्क पा”
दाल-रोटीसाधारण भोजन, जीविका“जो बेचारा अपनी ही दाल-रोटी की फिक्र में लगा हुआ हो”
शक्ति-बोध / सौंदर्य-बोधशक्ति की और सुरुचि की समझ“एक शक्ति-बोध और दूसरा सौंदर्य-बोध”
मोती-हीरेबहुमूल्य रत्न“क्या उसमें मोती-हीरे मिले हुए थे?”
तोड़-फोड़ध्वंस“किसी भी प्रकार के तोड़-फोड़ का कार्य होने पर…”
चाल-ढालरहन-सहन का ढंगशब्द-संपदा में ‘ठसक’ के अर्थ में — “चाल-ढाल का बनावटीपन”
रीति-रिवाजपरंपरा और प्रथाअभ्यास (पृष्ठ 128) — “धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक…”
कद-काठी, मुँहतोड़, ताबड़तोड़शरीर की बनावट / करारा / लगातार‘साथ-साथ पढ़ें’ खंड में — “बहुत लंबी कद-काठी के थे”, “मुँहतोड़ जवाब दिया”, “ताबड़तोड़ बमबारी”

(2) पुनरुक्त शब्द-युग्म (एक ही शब्द दोहराया गया)

शब्द-युग्मदोहराने से क्या जुड़ानिबंध की पंक्ति
छोटी-छोटीबहुलता — अनेक छोटी बातें“हरएक छोटी-छोटी बात पर ध्यान देता हूँ”
बड़ी-बड़ी / बड़े-बड़ेबहुलता और बल“जाने दो बड़ी-बड़ी बातें”; “देश के बड़े-बड़े लोग, विद्वान और धनी तरसते हैं!”
पूरा-पूरापूर्णता पर बल“अपने देश के सम्मान का पूरा-पूरा भाग मुझे मिले”
बार-बारपुनरावृत्ति“बार-बार के इस उल्लेख ने कर्ण के सघन आत्मविश्वास में…”
चलते-चलतेक्रिया की निरंतरता“लीजिए, चलते-चलते आपको इस प्रश्न का भी उत्तर दे ही दूँ।”
अलग-अलग, किन-किन, किस-किसका, क्या-क्याविस्तार और विविधताअभ्यास में — “आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं?”
खील-खीलपूरी तरह बिखर जाना(दो बैलों की कथा में) “भाड़ खील-खील ही नहीं हो गया” — यह पंक्ति इसी निबंध में भी आई है।
साथ-साथ, आस-पाससहचर्य और निकटता“साथ-साथ पढ़ें”; “अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा…”

(3) विपरीत भाव वाले शब्द-युग्म — पुस्तक ने बताया है कि युग्म “कभी विपरीत भाव भी देते हैं”। निबंध में इनकी भी भरमार है —

युग्मनिबंध की पंक्ति
हीनता–गौरव“देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता…”
उच्चता–हीनता“देश की उच्चता और हीनता को हम तोल सकें?”
अधिकार–कर्तव्य“यह मेरा कर्तव्य है… यह मेरा अधिकार है।”
पूर्णता–अपूर्णता“मेरी पूर्णता को एक ही ठसक में अपूर्णता की कसक से भर दिया।”
इधर-उधर“इधर की उधर, उधर की इधर लगाते हैं”
देश–विदेश, हाँ–ना“इसके उत्तर में सिर्फ हाँ या ना से काम न चलेगा”
शब्द-युग्म भाषा को क्या देते हैं: पुस्तक स्वयं कहती है — “इस प्रकार के शब्दों के प्रयोग से भाषा में सजीवता आती है।” तीन काम ये करते हैं — (1) बल (‘पूरा-पूरा भाग’ केवल ‘पूरा भाग’ से अधिक ज़ोर देता है), (2) विस्तार (‘छोटी-छोटी बातें’ यानी अनगिनत बातें), और (3) लय — पढ़ते समय वाक्य में एक थाप-सी बन जाती है, जो इस निबंध की बोलचाल वाली शैली के बहुत अनुकूल है।
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