प्र1.
“अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।” / “इस तरह एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर मैं खड़ा हुआ था।” — पहले वाक्य में ‘ममता-दुलार’ और दूसरे वाक्य में ‘भरा-पूरा’ शब्द मिलता-जुलता भाव दे रहे हैं। ये शब्द-युग्म हैं। … आप इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द को फिर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।
उत्तर
निबंध में तीनों प्रकार के शब्द-युग्म मिलते हैं। नीचे उन्हें अलग-अलग छाँटकर, अर्थ और प्रयोग-पंक्ति सहित दिया गया है।
(1) मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द-युग्म (पर्यायवाची/समानार्थी युग्म)
| शब्द-युग्म | भाव | निबंध की पंक्ति |
|---|---|---|
| ममता-दुलार(पुस्तक में दिया हुआ) | स्नेह और लाड़ | “पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।” |
| भरा-पूरा(पुस्तक में दिया हुआ) | संपूर्ण, समृद्ध | “एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर मैं खड़ा हुआ था।” |
| पास-पड़ोस | आस-पास का क्षेत्र | “उनके परिवार, उनके पास-पड़ोस और उनके नगर ने…” |
| ज्ञान-भंडार | ज्ञान का संचित कोश | “वहाँ के संचित ज्ञान-भंडार का उपयोग कर” |
| घूम-फिरकर | भ्रमण करके | “अपने नगर में घूम-फिरकर, वहाँ के विशाल समाज का संपर्क पा” |
| दाल-रोटी | साधारण भोजन, जीविका | “जो बेचारा अपनी ही दाल-रोटी की फिक्र में लगा हुआ हो” |
| शक्ति-बोध / सौंदर्य-बोध | शक्ति की और सुरुचि की समझ | “एक शक्ति-बोध और दूसरा सौंदर्य-बोध” |
| मोती-हीरे | बहुमूल्य रत्न | “क्या उसमें मोती-हीरे मिले हुए थे?” |
| तोड़-फोड़ | ध्वंस | “किसी भी प्रकार के तोड़-फोड़ का कार्य होने पर…” |
| चाल-ढाल | रहन-सहन का ढंग | शब्द-संपदा में ‘ठसक’ के अर्थ में — “चाल-ढाल का बनावटीपन” |
| रीति-रिवाज | परंपरा और प्रथा | अभ्यास (पृष्ठ 128) — “धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक…” |
| कद-काठी, मुँहतोड़, ताबड़तोड़ | शरीर की बनावट / करारा / लगातार | ‘साथ-साथ पढ़ें’ खंड में — “बहुत लंबी कद-काठी के थे”, “मुँहतोड़ जवाब दिया”, “ताबड़तोड़ बमबारी” |
(2) पुनरुक्त शब्द-युग्म (एक ही शब्द दोहराया गया)
| शब्द-युग्म | दोहराने से क्या जुड़ा | निबंध की पंक्ति |
|---|---|---|
| छोटी-छोटी | बहुलता — अनेक छोटी बातें | “हरएक छोटी-छोटी बात पर ध्यान देता हूँ” |
| बड़ी-बड़ी / बड़े-बड़े | बहुलता और बल | “जाने दो बड़ी-बड़ी बातें”; “देश के बड़े-बड़े लोग, विद्वान और धनी तरसते हैं!” |
| पूरा-पूरा | पूर्णता पर बल | “अपने देश के सम्मान का पूरा-पूरा भाग मुझे मिले” |
| बार-बार | पुनरावृत्ति | “बार-बार के इस उल्लेख ने कर्ण के सघन आत्मविश्वास में…” |
| चलते-चलते | क्रिया की निरंतरता | “लीजिए, चलते-चलते आपको इस प्रश्न का भी उत्तर दे ही दूँ।” |
| अलग-अलग, किन-किन, किस-किसका, क्या-क्या | विस्तार और विविधता | अभ्यास में — “आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं?” |
| खील-खील | पूरी तरह बिखर जाना | (दो बैलों की कथा में) “भाड़ खील-खील ही नहीं हो गया” — यह पंक्ति इसी निबंध में भी आई है। |
| साथ-साथ, आस-पास | सहचर्य और निकटता | “साथ-साथ पढ़ें”; “अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा…” |
(3) विपरीत भाव वाले शब्द-युग्म — पुस्तक ने बताया है कि युग्म “कभी विपरीत भाव भी देते हैं”। निबंध में इनकी भी भरमार है —
| युग्म | निबंध की पंक्ति |
|---|---|
| हीनता–गौरव | “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता…” |
| उच्चता–हीनता | “देश की उच्चता और हीनता को हम तोल सकें?” |
| अधिकार–कर्तव्य | “यह मेरा कर्तव्य है… यह मेरा अधिकार है।” |
| पूर्णता–अपूर्णता | “मेरी पूर्णता को एक ही ठसक में अपूर्णता की कसक से भर दिया।” |
| इधर-उधर | “इधर की उधर, उधर की इधर लगाते हैं” |
| देश–विदेश, हाँ–ना | “इसके उत्तर में सिर्फ हाँ या ना से काम न चलेगा” |
शब्द-युग्म भाषा को क्या देते हैं: पुस्तक स्वयं कहती है — “इस प्रकार के शब्दों के प्रयोग से भाषा में सजीवता आती है।” तीन काम ये करते हैं — (1) बल (‘पूरा-पूरा भाग’ केवल ‘पूरा भाग’ से अधिक ज़ोर देता है), (2) विस्तार (‘छोटी-छोटी बातें’ यानी अनगिनत बातें), और (3) लय — पढ़ते समय वाक्य में एक थाप-सी बन जाती है, जो इस निबंध की बोलचाल वाली शैली के बहुत अनुकूल है।