गंगा अध्याय 7 मेरे प्रश्न

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है” — निबंध के उपर्युक्त संदर्भ से आपके लिए दो प्रश्न बनाए गए हैं— (क) रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है?
उत्तर

रचनाकार को उन प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है जो दो शर्तें पूरी करते हैं — जो बात को आगे बढ़ाएँ और जो ठीक समय पर पूछे जाएँ

वह स्वयं यह कारण गिनाता है — “बड़े महत्व का प्रश्न है। इस अर्थ में भी कि यह बात को खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है और इस अर्थ में भी कि ठीक समय पर पूछा गया है। ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है…”

प्रश्न का गुणउसका अर्थनिबंध का उदाहरण
बात को खिलाने वालाऐसा प्रश्न जो विषय को समेटे नहीं, खोल दे — जिससे नई बात निकल आए।“क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई?” — इसी प्रश्न से लाला लाजपत राय का पूरा प्रसंग खुलता है।
ठीक समय पर पूछा गयाऐसा प्रश्न जो प्रसंग के ठीक उसी मोड़ पर आए जहाँ पाठक की जिज्ञासा जगी हो।“मानस में भूकंप उठा था?” — यह प्रश्न ठीक उसी क्षण आता है जब लेखक ने ‘मानसिक भूकंप’ कहा है।
जो नई दिशा खोलेजिसका उत्तर हाँ/ना में न दिया जा सके।“हम यह कैसे जान सकते हैं कि हमारा काम देश के अनुकूल है या नहीं?” — इस पर लेखक कहता है, “वाह, खूब सवाल पूछा है आपने… इसके उत्तर में सिर्फ हाँ या ना से काम न चलेगा, मुझे थोड़ा विवरण देना पड़ेगा।” और यहीं से ‘शक्ति-बोध’ तथा ‘सौंदर्य-बोध’ की चर्चा जन्म लेती है।
क्यों: पूरा निबंध प्रश्नोत्तर शैली में है। यदि प्रश्न अच्छे न होते तो निबंध आगे ही न बढ़ता। इसलिए लेखक के लिए प्रश्न बाधा नहीं, सीढ़ी है — और सीढ़ी चढ़ाने वाले प्रश्न का उत्तर देने में ही आनंद आता है।
प्र2.
(ख) आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है?
उत्तर

यह प्रश्न आपकी अपनी रुचि पूछता है, इसलिए उत्तर पहले पुरुष में और उदाहरण सहित लिखिए। नीचे एक पूरा नमूना उत्तर दिया गया है — आप इसमें अपने पसंद के विषय और अपने अनुभव रखकर लिख सकते हैं।

नमूना उत्तर:
मुझे उन प्रश्नों को बूझना सबसे रोचक लगता है जिनका उत्तर पुस्तक में सीधे न मिले, बल्कि सोचकर निकालना पड़े। मुख्यतः चार तरह के प्रश्न मुझे खींचते हैं —
  • ‘क्यों’ वाले प्रश्न। जैसे — हीरा-मोती को गया के यहाँ चारा तो मिला था, फिर उन्होंने नाँद में मुँह क्यों नहीं डाला? ऐसे प्रश्न का उत्तर घटना में नहीं, पात्र के मन में होता है — और वही खोजना मज़ेदार है।
  • ‘क्या होता, अगर…’ वाले प्रश्न। जैसे — यदि उस जापानी युवक ने फलों के दाम ले लिए होते, तो क्या स्वामी रामतीर्थ यह घटना जीवन-भर याद रखते? इससे समझ आता है कि किसी काम को यादगार उसकी भावना बनाती है।
  • पहेलियाँ और गणित के तर्क-प्रश्न। इनमें उत्तर तक पहुँचने का रास्ता खुद बनाना पड़ता है, और एक ही उत्तर पर दो रास्ते मिल जाएँ तो और आनंद आता है।
  • वे प्रश्न जिनके एक से अधिक उत्तर हो सकते हैं। जैसे — ‘देश’ किसे कहें? भूमि को, लोगों को, या भाषा-संस्कृति को? ऐसे प्रश्नों में कक्षा दो हिस्सों में बँट जाती है और बहस में हर पक्ष अपने तर्क खोजता है।
मुझे वे प्रश्न रोचक नहीं लगते जिनका उत्तर केवल याद करके लिखना हो — जैसे कोई तिथि या नाम। ऐसे प्रश्न जानकारी तो जाँचते हैं, पर सोचने का अवसर नहीं देते।
लिखते समय ध्यान रखें: केवल ‘मुझे कठिन प्रश्न अच्छे लगते हैं’ लिख देना अधूरा उत्तर है। हर प्रकार के साथ एक उदाहरण दीजिए — तभी उत्तर आपका अपना लगेगा, और अभ्यास का शीर्षक ही ‘मेरे प्रश्न’ है।
प्र3.
अब इस निबंध के आलोक में नीचे दी गई सामग्री को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए और लिखिए। — “यह सोचना एकदम निराधार है कि केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं। देश की सुरक्षा का विषय हो अथवा ऐश्वर्य व संपन्नता का, सभी नागरिकों का अपनी ही तरह से योगदान होता है। हम सब नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम यदि कुछ भी गलत करते हैं तो उससे अपनी छवि ही धूमिल नहीं होती अपितु अपने देश की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।”
उत्तर

पहले यह समझ लीजिए कि इस अनुच्छेद में तीन विचार हैं — (1) योगदान के लिए संपन्नता जरूरी नहीं, (2) हर नागरिक देश का प्रतिनिधि है, (3) नागरिक की गलती देश की छवि पर पड़ती है। सबसे अच्छे प्रश्न वही बनते हैं जो हर विचार पर एक-एक टिके हों।

तीन प्रश्न (उत्तर सहित) —

प्रश्नकिस विचार से बनासंभावित उत्तर
प्रश्न 1 — ‘देश की प्रगति में केवल संपन्न व्यक्ति ही योगदान दे सकते हैं’ — इस धारणा को अनुच्छेद ‘निराधार’ क्यों कहता है? ‘मैं और मेरा देश’ निबंध से दो उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।पहला विचारक्योंकि योगदान धन से नहीं, भावना और कर्तव्य-बोध से होता है। उदाहरण — (i) जापान का साधारण युवक, जिसने फलों की टोकरी देकर अपने देश का सिर ऊँचा कर दिया; (ii) तीस मील पैदल चलकर पाव-भर शहद लाने वाला बूढ़ा किसान, जिसका उपहार कमालपाशा ने ‘सर्वोत्तम उपहार’ कहा।
प्रश्न 2 — ‘हम सब नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं’ — इस कथन का आशय अपने शब्दों में लिखिए और बताइए कि यह निबंध की किस पंक्ति से मेल खाता है।दूसरा विचारआशय यह कि नागरिक जहाँ भी जाता है, अकेला नहीं जाता — उसके साथ उसके देश का नाम भी जाता है। यह निबंध की इस पंक्ति से मेल खाता है — “मैं अपने देश का नागरिक हूँ और मानता हूँ कि मैं अपना देश हूँ।”
प्रश्न 3 — एक नागरिक के गलत आचरण से देश की छवि पर नकारात्मक प्रभाव कैसे पड़ता है? निबंध में दिए गए उस उदाहरण की चर्चा कीजिए जो इस बात को सबसे स्पष्ट रूप से सिद्ध करता है।तीसरा विचारजापान में पढ़ने आए विदेशी विद्यार्थी ने पुस्तकालय की पुस्तक से दुर्लभ चित्र निकाल लिए। उसे देश से निकाला गया, पर दंड यहीं नहीं रुका — पुस्तकालय के बाहर बोर्ड पर लिख दिया गया कि उस देश का कोई निवासी भीतर नहीं आ सकता। एक व्यक्ति की चोरी ने पूरे राष्ट्र को वर्षों तक ‘लांछित’ कर दिया।
अच्छा प्रश्न कैसे बनाएँ — तीन कसौटियाँ:
  1. उत्तर एक शब्द में न हो। ‘क्या हर नागरिक देश का प्रतिनिधि है?’ — यह कमज़ोर प्रश्न है, क्योंकि उत्तर ‘हाँ’ है। इसे बनाइए — ‘किस अर्थ में हर नागरिक देश का प्रतिनिधि है?’
  2. प्रश्न सामग्री के भीतर से निकले। बाहर की जानकारी माँगने वाला प्रश्न इस अभ्यास का उद्देश्य पूरा नहीं करता।
  3. प्रश्न पाठ से जोड़े। निर्देश है — “इस निबंध के आलोक में”। इसलिए हर प्रश्न में ‘निबंध से उदाहरण देकर’ जैसा अंश जोड़ दीजिए; इससे प्रश्न गहरा हो जाता है।
दो और प्रश्न, यदि आप अधिक बनाना चाहें: (क) ‘अपनी ही तरह से योगदान’ का क्या अर्थ है? अपने परिवार के तीन सदस्यों के योगदान बताकर समझाइए। (ख) क्या किसी एक नागरिक के अच्छे काम से भी देश की छवि सुधरती है? इस अनुच्छेद और निबंध — दोनों के आधार पर अपना मत दीजिए।
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