रचनाकार को उन प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है जो दो शर्तें पूरी करते हैं — जो बात को आगे बढ़ाएँ और जो ठीक समय पर पूछे जाएँ।
वह स्वयं यह कारण गिनाता है — “बड़े महत्व का प्रश्न है। इस अर्थ में भी कि यह बात को खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है और इस अर्थ में भी कि ठीक समय पर पूछा गया है। ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है…”
| प्रश्न का गुण | उसका अर्थ | निबंध का उदाहरण |
|---|---|---|
| बात को खिलाने वाला | ऐसा प्रश्न जो विषय को समेटे नहीं, खोल दे — जिससे नई बात निकल आए। | “क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई?” — इसी प्रश्न से लाला लाजपत राय का पूरा प्रसंग खुलता है। |
| ठीक समय पर पूछा गया | ऐसा प्रश्न जो प्रसंग के ठीक उसी मोड़ पर आए जहाँ पाठक की जिज्ञासा जगी हो। | “मानस में भूकंप उठा था?” — यह प्रश्न ठीक उसी क्षण आता है जब लेखक ने ‘मानसिक भूकंप’ कहा है। |
| जो नई दिशा खोले | जिसका उत्तर हाँ/ना में न दिया जा सके। | “हम यह कैसे जान सकते हैं कि हमारा काम देश के अनुकूल है या नहीं?” — इस पर लेखक कहता है, “वाह, खूब सवाल पूछा है आपने… इसके उत्तर में सिर्फ हाँ या ना से काम न चलेगा, मुझे थोड़ा विवरण देना पड़ेगा।” और यहीं से ‘शक्ति-बोध’ तथा ‘सौंदर्य-बोध’ की चर्चा जन्म लेती है। |