इस पंक्ति का भाव है — नागरिक और देश के बीच लेन-देन दोनों ओर से चलता है। देश ऊँचा होगा तो नागरिक का सिर ऊँचा रहेगा; और नागरिक अच्छा काम करेगा तो देश का सिर ऊँचा होगा। यह एकतरफ़ा रास्ता नहीं, आने-जाने वाली सड़क है।
| दिशा | अर्थ | पाठ का उदाहरण | हमारे आस-पास का उदाहरण |
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| देश → नागरिक | देश की हीनता या गौरव का फल नागरिक को मिलता है। | लाला लाजपत राय — “जहाँ भी मैं गया, भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक मेरे माथे पर लगा रहा।” | आज भारतीय पासपोर्ट लेकर कोई विद्यार्थी विदेश पढ़ने जाता है तो उसे भारत की साख का लाभ मिलता है; भारत में बना टीका दुनिया के दर्जनों देशों तक पहुँचा, तो हर भारतीय ने उसका गौरव अनुभव किया — यद्यपि टीका उसने नहीं बनाया था। |
| नागरिक → देश | नागरिक की हीनता या गौरव का फल देश को मिलता है। | जापानी युवक ने फल भेंट कर देश का सिर ऊँचा किया; दूसरे देश के विद्यार्थी ने चित्र चुराकर देश पर कलंक लगाया — “उस देश का कोई निवासी इस पुस्तकालय में प्रवेश नहीं कर सकता।” | कोई खिलाड़ी ओलंपिक में पदक जीतता है तो पदक उसके गले में और तिरंगा पूरे देश का ऊपर जाता है। इसके उलट, यदि कोई यात्री विदेशी हवाई अड्डे पर नियम तोड़ता है तो अख़बार उसके नाम से पहले उसके देश का नाम छापते हैं। |
- विद्यालय की छवि — एक कक्षा के दस विद्यार्थी अंतर-विद्यालय प्रतियोगिता में अनुशासित रहते हैं, तो पूरे विद्यालय की प्रशंसा होती है। एक विद्यार्थी बस में शोर मचाता है, तो लोग कहते हैं — “फलाँ स्कूल के बच्चे ऐसे ही हैं।” यह ‘गाँठ’ का लघु रूप है।
- गाँव/मुहल्ले का नाम — जिस मुहल्ले में लोग कूड़ा नियत स्थान पर डालते हैं, वह ‘साफ़ मुहल्ला’ कहलाता है और वहाँ का हर निवासी उस नाम का लाभ उठाता है — मकान का किराया तक बढ़ जाता है।
- यातायात — एक व्यक्ति के ग़लत दिशा में गाड़ी चलाने से पूरे चौराहे का जाम लगता है और सैकड़ों लोग देर से पहुँचते हैं। एक की लापरवाही का दंड सबको मिलता है।