प्र1.
1. ‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है— ‘बाँधना’ (नि+बंध)। अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं। एक विधा के रूप में निबंध की कुछ विशेषताओं को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है— (विषय-केंद्रीयता, वैयक्तिकता, विचार प्रधानता एवं भावनात्मकता, सजीवता/चित्रात्मकता, तार्किकता, प्रेरणात्मकता, संक्षिप्तता और स्पष्टता, साहित्यिक सौंदर्य)। उपर्युक्त बिंदुओं से संबंधित संदर्भ ‘मैं और मेरा देश’ निबंध से खोजकर लिखिए।
उत्तर
पुस्तक ने आठ बिंदु एक चक्र के रूप में दिए हैं और हर बिंदु का संदर्भ पाठ से खोजने को कहा है। नीचे आठों बिंदुओं की पूरी भरी हुई तालिका दी गई है।
| विशेषता | उसका अर्थ | ‘मैं और मेरा देश’ से संदर्भ |
|---|---|---|
| विषय-केंद्रीयता | पूरा निबंध एक ही विषय के चारों ओर घूमता है; कोई प्रसंग विषय से बाहर नहीं जाता। | विषय है — व्यक्ति और देश का अटूट संबंध। आरंभ ‘मैं’ से, अंत ‘मेरा मत’ पर; और बीच के सारे प्रसंग (लालाजी, जापान की दो घटनाएँ, कमालपाशा, नेहरू जी, शल्य-कर्ण) इसी को सिद्ध करते हैं। केंद्रीय वाक्य — “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।” |
| वैयक्तिकता | निबंधकार अपनी निजी अनुभूति, ‘मैं’ और अपने ढंग से बात कहता है। | आरंभ ही आत्मकथात्मक है — “मैं अपने घर में जनमा था, पला था।” आगे — “मैंने जो कुछ जीवन में अध्ययन और अनुभव से सीखा है, वह यही है…”, और “अपने अनुभव के आधार पर ही आपसे कह रहा हूँ”। हर निष्कर्ष लेखक के अपने अनुभव की मुहर लिए हुए है। |
| विचार प्रधानता एवं भावनात्मकता | निबंध विचार देता है, पर सूखे तर्क से नहीं — भावना के साथ। | विचार: “महत्व किसी कार्य की विशालता में नहीं है, उस कार्य के करने की भावना में है।” भावना: “कमालपाशा ने हँडिया को स्वयं खोला और उसमें से दो उँगलियाँ भरकर चाटने के बाद तीसरी उँगली शहद में भरकर बूढ़े के मुँह में दे दी, बूढ़ा निहाल हो गया।” — विचार का प्रमाण भावना के दृश्य से दिया गया है। |
| सजीवता / चित्रात्मकता | शब्दों से आँखों के सामने चित्र खड़ा हो जाना। | “एक जापानी युवक प्लेटफार्म पर खड़ा था… सुनते ही वह अपनी बात बीच में छोड़कर भागा और कहीं दूर से एक टोकरी ताजे फल लाया।” तथा — “दिल्ली स्टेशन से उस खाट को अपने कंधे पर रखे वह भारत के प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की कोठी पर पहुँचा।” दोनों दृश्य पढ़ते ही आँखों में उतर आते हैं। |
| तार्किकता | बात क्रम से, प्रमाण और उदाहरण देकर सिद्ध की जाती है। | ‘अकेला चना क्या भाड़ फोड़े’ को खंडित करने की पूरी तर्क-शृंखला — “जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता। लड़ने वालों को रसद न पहुँचे तो वे कैसे लड़ें। किसान ही खेती न उपजाए तो रसद पहुँचाने वाले क्या करें… युद्ध में जय बोलने वालों का भी महत्व है।” एक कड़ी दूसरी से जुड़ती चली जाती है। |
| प्रेरणात्मकता | पढ़ने वाला कुछ करने को उठ खड़ा हो। | “इसलिए मैं अपने देश का कितना भी साधारण नागरिक क्यों न हूँ, अपने देश के सम्मान की रक्षा के लिए बहुत कुछ कर सकता हूँ।” और अंत का आह्वान — “जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें।” |
| संक्षिप्तता और स्पष्टता | बात थोड़े में और साफ़-साफ़ कही जाए। | “मतलब साफ है, एकदम साफ— कि जहाँ एक युवक ने अपने काम से अपने देश का सिर ऊँचा किया था, वहीं एक युवक ने अपने देश के मस्तक पर कलंक का ऐसा टीका लगाया…” दो घटनाओं का पूरा निष्कर्ष एक ही वाक्य में। इसी तरह — “इस उच्चता और हीनता की कसौटी है चुनाव।” |
| साहित्यिक सौंदर्य | प्रतीक, रूपक, मुहावरे और लय से भाषा सुंदर बनती है। | रूपक: “आनंद की इस दीवार में एक दरार पड़ गई”, “मानस में भूकंप”, “गौरव के दीपक जलाए”, “संदेह की तरेड़”। मुहावरे/लोकोक्तियाँ: “अकेला चना क्या भाड़ फोड़े”, “ईंट का जवाब पत्थर से”, “पानी ही उतर चुका है”। अतिशयोक्ति: “दर्शकों की तालियों से खिलाड़ियों के पैरों में बिजली लग जाती है।” सुंदर वाक्यांश: “सौ लालों का एक लाल”। |
यह तालिका बनाते समय क्या ध्यान रखें: हर बिंदु के लिए पाठ की पंक्ति उद्धृत कीजिए, केवल यह मत लिखिए कि ‘निबंध में तार्किकता है’। संदर्भ का अर्थ ही प्रमाण है। और एक ही पंक्ति दो विशेषताओं का उदाहरण हो सकती है — जैसे ‘गौरव के दीपक जलाए’ साहित्यिक सौंदर्य भी है और प्रेरणात्मकता भी।