गंगा अध्याय 7 चुनाव एवं आपके अनुभव

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“क्या कोई ऐसी कसौटी भी बनाई जा सकती है, जिससे देश के नागरिकों को आधार बनाकर देश की उच्चता और हीनता को हम तोल सकें?” रचनाकार के अनुसार इस प्रश्न का उत्तर है— निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया। 1. जब कोई चुनाव प्रक्रिया आपके क्षेत्र में शुरू होती है तो किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं?
उत्तर

चुनाव की घोषणा होते ही पूरा क्षेत्र बदल-सा जाता है। ये गतिविधियाँ तीन चरणों में बँटी होती हैं — चुनाव से पहले, चुनाव के दिन और चुनाव के बाद

चरणक्या-क्या होता है
घोषणा और तैयारीनिर्वाचन आयोग तिथि घोषित करता है और उसी क्षण से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। मतदाता-सूची का पुनरीक्षण होता है, नए नाम जुड़ते हैं, बी.एल.ओ. घर-घर पर्ची पहुँचाते हैं। विद्यालय भवन मतदान-केंद्र बनते हैं और शिक्षकों की ड्यूटी लगती है।
नामांकन और प्रचारउम्मीदवार नामांकन भरते हैं और अपनी संपत्ति तथा शिक्षा का ब्योरा देते हैं। फिर शुरू होता है प्रचार — घर-घर संपर्क, नुक्कड़ सभाएँ, रैली, जुलूस, पोस्टर-बैनर, गाड़ियों पर लाउडस्पीकर, पर्चे, और अब सोशल मीडिया पर वीडियो। चुनाव-चिह्न सबकी जुबान पर चढ़ जाते हैं।
मतदाता-जागरूकता‘स्वीप’ (SVEEP) जैसे अभियान चलते हैं — रंगोली, प्रभात-फेरी, मानव-शृंखला, नारे, ‘वोटर सेल्फी प्वाइंट’, और विद्यालयों में शपथ — “कोई मतदाता न छूटे।” (आपकी पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 134 पर इसी तरह के एक ‘वोटर सेल्फी प्वाइंट’ का चित्र भी दिया गया है।)
मतदान का दिनसार्वजनिक अवकाश; मतदान-केंद्र पर कतारें; पहचान-पत्र की जाँच; ई.वी.एम. और वी.वी.पैट से मतदान; उँगली पर अमिट स्याही; सुरक्षा बल की तैनाती; और केंद्र से सौ मीटर के भीतर प्रचार पर पूरी रोक।
मतगणना और उसके बादमतगणना, परिणाम की घोषणा, विजय-जुलूस और मिठाई; फिर शपथ-ग्रहण। साथ ही सारे पोस्टर-बैनर उतारने और दीवारें साफ़ करने का काम भी — जो प्रायः भुला दिया जाता है।
निबंध से जोड़िए: लेखक कहता है — “जहाँ के नागरिक गलत लोगों के उत्तेजक नारों या व्यक्तियों के गलत प्रभाव में आकर मत देते हैं, वह हीन है।” ऊपर गिनाई गई गतिविधियों में से कुछ (जागरूकता अभियान, घर-घर संपर्क, ब्योरे का प्रकाशन) नागरिक को समझदार बनाती हैं, और कुछ (उत्तेजक नारे, मुफ़्त वस्तुओं का प्रलोभन, अफ़वाह) उसे बहकाती हैं। कसौटी यही है कि नागरिक किन गतिविधियों से प्रभावित होता है।
Did you know? भारत में मतदान की न्यूनतम आयु 1989 में 61वें संविधान संशोधन द्वारा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई थी। यानी आपकी कक्षा के कई विद्यार्थी तीन-चार वर्ष बाद ही इस ‘कसौटी’ पर खरे उतरने वाले हैं।
प्र2.
2. “जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें”, आपके विचार से एक अच्छे उम्मीदवार में क्या-क्या गुण होने चाहिए?
उत्तर

लेखक ने ‘योग्य’ नहीं, ‘ठीक मनुष्य’ कहा है — यानी पहले वह अच्छा मनुष्य हो, तब नेता। एक अच्छे उम्मीदवार के गुण इन्हीं दो कोटियों में रखे जा सकते हैं।

कोटिगुणयह क्यों जरूरी है
चरित्र के गुणईमानदारी और स्वच्छ छविजो सार्वजनिक धन का रक्षक बनेगा, उस पर पहले भरोसा होना चाहिए। उसके विरुद्ध गंभीर आपराधिक मामले नहीं होने चाहिए।
सेवा-भाव और सुलभताचुनाव के बाद भी वह मिलता रहे — जैसे कमालपाशा तीस मील चलकर आए बूढ़े से मिलने विश्राम के वस्त्रों में ही नीचे उतर आए।
निष्पक्षतावह जाति, धर्म, भाषा या दल देखकर काम न करे। संविधान की समता उसी से आरंभ होती है।
साहस और उत्तरदायित्वगलती मानने और सुधारने का साहस; जो वादा किया, उसका हिसाब देने की तत्परता।
कार्य-क्षमता के गुणक्षेत्र की समझवह जानता हो कि उसके क्षेत्र में पानी, सड़क, विद्यालय, अस्पताल और रोज़गार की असली स्थिति क्या है।
शिक्षा और विषय-ज्ञानकानून बनाने के लिए विषय समझना पड़ता है — केवल भाषण देना पर्याप्त नहीं।
सबको साथ लेकर चलने की कला‘शक्ति-बोध’ बढ़ाने वाला नेता विरोधी का भी सम्मान करता है, उसका मनोबल नहीं तोड़ता — शल्य जैसा साथी कोई नहीं चाहता।
दूरदृष्टिअगले चुनाव तक नहीं, अगली पीढ़ी तक सोचने वाला — पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश करने वाला।
किन बातों से प्रभावित नहीं होना चाहिए: उत्तेजक नारे; जाति-धर्म की अपील; मुफ़्त वस्तुओं या धन का प्रलोभन; केवल भाषण-कला; और ‘सब ऐसे ही होते हैं’ जैसी निराशा। लेखक ने इन्हीं को ‘हीन देश’ की पहचान बताया है।
Check it yourself: अगले चुनाव में उम्मीदवारों की सूची लेकर एक तालिका बनाइए — नाम, शिक्षा, पिछले पाँच वर्षों का काम, और घोषणापत्र के तीन मुख्य वादे। यही ‘कसौटी’ को व्यवहार में उतारना है। भारत निर्वाचन आयोग हर उम्मीदवार का शपथ-पत्र सार्वजनिक करता है — वह सबके लिए उपलब्ध है।
प्र3.
3. चुनाव से जुड़ा अपना कोई अनुभव लिखिए। (संकेत— विद्यालय में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव)
उत्तर

यह अनुभव-लेखन है, इसलिए इसे कहानी की तरह लिखिए — तिथि, स्थान, पात्र, घटनाक्रम और अंत में आपने क्या सीखा। नीचे पूरा नमूना उत्तर दिया गया है।

नमूना उत्तर — ‘मेरी कक्षा का चुनाव’

पिछले वर्ष जुलाई में हमारी कक्षा में कक्षा-प्रतिनिधि का चुनाव हुआ। अध्यापिका जी ने कहा कि इस बार वे किसी को नियुक्त नहीं करेंगी — कक्षा स्वयं चुनेगी। तीन नाम सामने आए — रोहित, सलमा और मैं।

हमें दो-दो मिनट बोलने का समय मिला। रोहित ने कहा कि वह जीतने पर सबको खेल के पीरियड में मैदान दिलवाएगा। सलमा ने कहा कि वह पहले कक्षा का कोना-कोना साफ़ करवाएगी, फिर हर सप्ताह एक ‘संदेह-घंटा’ रखवाएगी जिसमें जो पीछे रह गए हैं वे बिना संकोच पूछ सकें। मैंने अपनी बारी में केवल यह कहा कि मैं सबकी बात अध्यापिका जी तक पहुँचाऊँगा।

मतदान गुप्त था — पर्चियाँ एक डिब्बे में डाली गईं और मॉनीटर के सामने गिनी गईं। सलमा को 21 मत मिले, रोहित को 12 और मुझे 9। पहले क्षण मुझे बुरा लगा, क्योंकि रोहित और मैं मित्र थे और मुझे लगा था कि वह मुझे ही मत देगा। पर गिनती के बाद अध्यापिका जी ने एक बात कही जो मुझे आज तक याद है — “मत मित्रता का बदला नहीं होता, वह जिम्मेदारी सौंपना होता है।”

आगे जो हुआ उसने यह बात और पक्की कर दी। सलमा ने सचमुच ‘संदेह-घंटा’ शुरू करवाया और तीन महीने में हमारी कक्षा का गणित का औसत बढ़ गया। मैंने तब समझा कि जिन्होंने उसे मत दिया, उन्होंने नारे नहीं, काम की योजना देखी थी।

इस अनुभव से मैंने तीन बातें सीखीं — पहली, अच्छा उम्मीदवार वादा नहीं, योजना देता है; दूसरी, गुप्त मतदान ही सच्ची राय लाता है; और तीसरी, हारने वाले का काम भी समाप्त नहीं होता — मैंने पूरे वर्ष सलमा के साथ मिलकर काम किया। लेखक ठीक ही कहते हैं — “जिस देश के नागरिक यह समझते हैं कि चुनाव में किसे अपना मत देना चाहिए और किसे नहीं, वह देश उच्च है।”
लिखते समय ध्यान रखिए: अनुभव में एक असली मोड़ जरूर होना चाहिए — कोई बात जो आपने पहले सोची नहीं थी। ऊपर के नमूने में वह मोड़ है ‘मित्र ने मुझे मत नहीं दिया’। बिना मोड़ के अनुभव केवल विवरण रह जाता है।
प्र4.
4. यदि आप किसी सभा, क्लब आदि के चुनाव में उम्मीदवार हों तो आपके क्या-क्या मुद्दे होंगे?
उत्तर

मुद्दे वही अच्छे होते हैं जो — (1) सचमुच की समस्या से निकलें, (2) आपके अधिकार-क्षेत्र में हों, और (3) जिन्हें पूरा हुआ या न हुआ, दोनों जाँचा जा सके। नीचे एक नमूना घोषणापत्र दिया गया है, जिसे आप विद्यालय की ‘बाल संसद’, साहित्यिक क्लब या मुहल्ले के पुस्तकालय-समूह — किसी के भी लिए ढाल सकते हैं।

नमूना उत्तर — मेरा घोषणापत्र (विद्यालय की बाल संसद के लिए)

क्रममुद्दामैं क्या करूँगा/करूँगीकब तक
1स्वच्छ और सुंदर विद्यालयहर कक्षा में गीला-सूखा कचरे के दो डिब्बे; महीने के अंतिम शनिवार को ‘एक घंटा श्रमदान’; शौचालय की साप्ताहिक जाँच-रिपोर्ट।पहले दो महीने
2पुस्तकालय सबके लिएपुस्तकालय मध्यावकाश में भी खुला रहे; ‘एक विद्यार्थी – एक पुस्तक’ दान अभियान; फटी पुस्तकों की मरम्मत का दल।तीन महीने
3पीछे रह गए साथियों की सहायतासप्ताह में दो दिन ‘सहपाठी-शिक्षण’ — जो विषय में आगे हैं वे आधा घंटा पढ़ाएँ। किसी का नाम सार्वजनिक नहीं होगा।तुरंत
4पेयजल और स्वास्थ्यपानी की टंकी की मासिक सफ़ाई की माँग; प्राथमिक चिकित्सा पेटी की जाँच; गर्मी में छाया की व्यवस्था।एक महीना
5खेल और कला सबके लिएखेल-सामग्री का रजिस्टर ताकि कुछ ही लोग उसे न घेरें; लड़कियों के लिए बराबर मैदान-समय; वार्षिक दीवार-पत्रिका।दो महीने
6सुरक्षा और सम्मान‘शिकायत-पेटी’ जिसमें बिना नाम के पर्ची डाली जा सके; चिढ़ाने और धौंस जमाने (bullying) के विरुद्ध कक्षावार संकल्प।तुरंत
7हिसाब देनाहर तीन महीने पर प्रार्थना-सभा में प्रगति-रिपोर्ट पढ़कर सुनाऊँगा/सुनाऊँगी — जो हुआ और जो नहीं हो पाया, दोनों।हर तिमाही
यह घोषणापत्र अच्छा क्यों है: इसमें कोई ऐसा वादा नहीं है जो मेरे बस में न हो (जैसे ‘परीक्षा हटवा दूँगा’ या ‘छुट्टियाँ बढ़वा दूँगा’)। हर मुद्दे के साथ समय-सीमा है, और अंतिम मुद्दा ‘हिसाब देना’ है — यही लोकतंत्र की आत्मा है। निबंध का वाक्य याद रखिए — “मेरा अधिकार है कि मेरा मत लिए बिना कोई भी आदमी… किसी अधिकार की कुरसी पर न बैठ सके।” जो मत लेकर कुरसी पर बैठा है, उसका पहला कर्तव्य हिसाब देना ही है।
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