चुनाव की घोषणा होते ही पूरा क्षेत्र बदल-सा जाता है। ये गतिविधियाँ तीन चरणों में बँटी होती हैं — चुनाव से पहले, चुनाव के दिन और चुनाव के बाद।
| चरण | क्या-क्या होता है |
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| घोषणा और तैयारी | निर्वाचन आयोग तिथि घोषित करता है और उसी क्षण से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। मतदाता-सूची का पुनरीक्षण होता है, नए नाम जुड़ते हैं, बी.एल.ओ. घर-घर पर्ची पहुँचाते हैं। विद्यालय भवन मतदान-केंद्र बनते हैं और शिक्षकों की ड्यूटी लगती है। |
| नामांकन और प्रचार | उम्मीदवार नामांकन भरते हैं और अपनी संपत्ति तथा शिक्षा का ब्योरा देते हैं। फिर शुरू होता है प्रचार — घर-घर संपर्क, नुक्कड़ सभाएँ, रैली, जुलूस, पोस्टर-बैनर, गाड़ियों पर लाउडस्पीकर, पर्चे, और अब सोशल मीडिया पर वीडियो। चुनाव-चिह्न सबकी जुबान पर चढ़ जाते हैं। |
| मतदाता-जागरूकता | ‘स्वीप’ (SVEEP) जैसे अभियान चलते हैं — रंगोली, प्रभात-फेरी, मानव-शृंखला, नारे, ‘वोटर सेल्फी प्वाइंट’, और विद्यालयों में शपथ — “कोई मतदाता न छूटे।” (आपकी पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 134 पर इसी तरह के एक ‘वोटर सेल्फी प्वाइंट’ का चित्र भी दिया गया है।) |
| मतदान का दिन | सार्वजनिक अवकाश; मतदान-केंद्र पर कतारें; पहचान-पत्र की जाँच; ई.वी.एम. और वी.वी.पैट से मतदान; उँगली पर अमिट स्याही; सुरक्षा बल की तैनाती; और केंद्र से सौ मीटर के भीतर प्रचार पर पूरी रोक। |
| मतगणना और उसके बाद | मतगणना, परिणाम की घोषणा, विजय-जुलूस और मिठाई; फिर शपथ-ग्रहण। साथ ही सारे पोस्टर-बैनर उतारने और दीवारें साफ़ करने का काम भी — जो प्रायः भुला दिया जाता है। |