गंगा अध्याय 7 अधिकार और कर्तव्य

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
इस निबंध में किसी भी स्वतंत्र देश में नागरिक के अधिकार और उसके कर्तव्य की बात की गई है। आपकी पाठ्यपुस्तक के प्रारंभिक पृष्ठ पर भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार और कर्तव्य दिए गए हैं। उसे पढ़कर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर

पहले निबंध की बात देखिए। लेखक अधिकार और कर्तव्य को अलग-अलग नहीं, एक ही वाक्य के दो हिस्सों की तरह रखता है —

कर्तव्य: “मुझे निजी रूप में सारे संसार का राज्य भी क्यों न मिलता हो, मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को… धक्का पहुँचे
अधिकार: “साथ ही उसके एक नागरिक के रूप में मेरा यह अधिकार भी है कि अपने देश के सम्मान का पूरा-पूरा भाग मुझे मिले

चुनाव के संदर्भ में भी वही जोड़ी —
कर्तव्य: “जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें”
अधिकार: “मेरा मत लिए बिना कोई भी आदमी… किसी अधिकार की कुरसी पर न बैठ सके”

अब संविधान की ओर देखिए। पाठ्यपुस्तक गंगा के प्रारंभिक पृष्ठ पर संविधान के भाग 4क, अनुच्छेद 51क के मूल कर्तव्य दिए गए हैं।

मौलिक अधिकार (भाग 3, अनुच्छेद 12–35)मूल कर्तव्य (भाग 4क, अनुच्छेद 51क)
1. समता का अधिकार (अनु. 14–18) — कानून के सामने सब बराबर; अस्पृश्यता का अंत।(क) संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे।
2. स्वतंत्रता का अधिकार (19–22) — वाक्, सम्मेलन, संचरण, निवास और व्यवसाय की स्वतंत्रता; प्राण और दैहिक स्वतंत्रता।(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करे।
3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (23–24) — बलात् श्रम और बाल-श्रम पर रोक।(ग) भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे।
4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (25–28)।(घ) देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे।
5. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (29–30) — अल्पसंख्यकों के हित तथा भाषा-लिपि-संस्कृति की रक्षा।(ङ) सब भारतवासियों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे; स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करे।
6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (32) — डॉ. आंबेडकर ने इसे संविधान की ‘आत्मा’ कहा था; अधिकार छिनने पर सीधे न्यायालय जाने का अधिकार।(च) हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करे।
(शिक्षा का अधिकार — अनुच्छेद 21क — 86वें संशोधन से जोड़ा गया: 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा।)(छ) प्राकृतिक पर्यावरण की — वन, झील, नदी और वन्य जीव सहित — रक्षा और संवर्धन करे तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखे।
(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे।
(झ) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे।
(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे।
(ट) माता-पिता या संरक्षक 6 से 14 वर्ष के अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर दे।
निबंध और संविधान का मेल — यही चर्चा का असली विषय है:
  • लेखक की ‘सौंदर्य-बोध’ वाली बात (कूड़ा न फेंकना, थूकना नहीं, स्मारक न बिगाड़ना) ठीक कर्तव्य (छ) और (झ) है।
  • ‘शक्ति-बोध’ को चोट न पहुँचाना — यानी अपने देश को हीन सिद्ध करने की चर्चा न करना — कर्तव्य (ग) और (ङ) से जुड़ता है।
  • ‘ठीक मनुष्य को मत देना’ अनुच्छेद 326 के वयस्क मताधिकार का सदुपयोग है।
  • और ‘मेरे सम्मान की रक्षा का मुझे, जहाँ भी मैं हूँ, भरोसा रहे’ — यह अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता) तथा 32 (संवैधानिक उपचार) की ही भाषा है।
सबसे बड़ी बात यह कि संविधान ने अधिकार भाग 3 में और कर्तव्य भाग 4क में रखे हैं — दोनों एक ही पुस्तक में। लेखक भी यही कहता है कि ये दो अलग चीजें नहीं हैं।
कक्षा-चर्चा का तरीका: कक्षा को चार समूहों में बाँटिए। हर समूह को दो-तीन मूल कर्तव्य दीजिए और कहिए कि वे उनके लिए (1) विद्यालय से एक उदाहरण, (2) मुहल्ले से एक उदाहरण और (3) इसी निबंध से एक पंक्ति खोजकर लाएँ। अंत में सारे उदाहरण एक चार्ट पर लगाइए — कक्षा के सामने संविधान अचानक ‘किताबी’ नहीं रह जाएगा।
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