प्र1.
निबंध में स्वामी रामतीर्थ के अनुभव का उल्लेख किया गया है। आप अपने पुस्तकालय या इंटरनेट से उनके विषय में सामग्री खोजकर पढ़िए और सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर
खोजबीन का अर्थ है — पढ़कर नोट बनाना और कक्षा में कुछ लेकर आना। नीचे यह दिया गया है कि क्या खोजें, कहाँ खोजें और चर्चा में क्या प्रस्तुत करें।
| क्या खोजें | जो सामग्री सामान्यतः मिलती है |
|---|---|
| जीवन-परिचय | जन्म सन् 1873, गाँव मुरालीवाला, जिला गुजराँवाला (तत्कालीन पंजाब)। मूल नाम तीर्थ राम। बचपन अत्यंत निर्धनता में बीता, पर वे असाधारण मेधावी थे। गणित में एम.ए. करके लाहौर के फोरमन क्रिश्चियन कॉलेज में गणित के प्राध्यापक बने। |
| जीवन का मोड़ | सन् 1897 में स्वामी विवेकानंद से भेंट ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। सन् 1901 में उन्होंने संन्यास ले लिया और ‘स्वामी रामतीर्थ’ कहलाए। वे ‘व्यावहारिक वेदांत’ (Practical Vedanta) के प्रचारक माने जाते हैं — उनका सूत्र था कि वेदांत मठ की नहीं, जीवन की वस्तु है। |
| जापान और अमेरिका यात्रा | सन् 1902 में वे जापान गए और वहाँ से अमेरिका। लगभग दो वर्ष (1902–1904) अमेरिका में रहकर उन्होंने भारतीय दर्शन पर व्याख्यान दिए। निबंध वाली फलों की घटना इसी जापान-यात्रा की है। जापान की स्वच्छता, अनुशासन और राष्ट्र-भावना का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा — वे बार-बार कहते थे कि भारत को जापान से यही सीखना चाहिए। |
| विचार | ‘मैं’ को विस्तार देकर सबमें देखना; आत्मविश्वास और आनंद का उपदेश; और यह कि देश-सेवा भी अध्यात्म का अंग है। उनके व्याख्यान In Woods of God-Realization नाम से संकलित हैं। हिंदी और उर्दू में उन्होंने कविताएँ भी लिखीं। |
| अंत | भारत लौटने के बाद वे हिमालय चले गए और सन् 1906 में, केवल 33 वर्ष की आयु में, टिहरी के पास गंगा में स्नान करते हुए उनका देहावसान हो गया। |
कहाँ खोजें: विद्यालय-पुस्तकालय में स्वामी रामतीर्थ की जीवनी या रामतीर्थ ग्रंथावली; सार्वजनिक पुस्तकालय में हिंदी नवजागरण से संबंधित पुस्तकें; और इंटरनेट पर विश्वसनीय स्रोत (राष्ट्रीय पुस्तकालयों की वेबसाइट, विश्वविद्यालयों के डिजिटल संग्रह)। हर स्रोत का नाम अपनी कॉपी में लिखिए — यही आपकी संदर्भ-सूची होगी। इंटरनेट पर मिली किसी भी बात को दो अलग स्रोतों से मिलाकर देखिए, तभी लिखिए।
चर्चा में क्या प्रस्तुत करें — तीन सुझाव:
- एक पृष्ठ का परिचय-पत्रक बनाइए — जन्म, मूल नाम, शिक्षा, संन्यास, यात्राएँ, विचार, निधन — और उस पर उनकी एक सूक्ति लिखिए।
- जापान वाली घटना का नाट्य-रूपांतरण कीजिए — तीन पात्र: स्वामी रामतीर्थ, जापानी युवक, और उसकी पत्नी। संवाद पाठ से ही लीजिए; अंत में युवक का वह वाक्य पूरी कक्षा एक साथ बोले।
- तुलना कीजिए — स्वामी रामतीर्थ 1902 में जापान गए और लाला लाजपत राय 1920 में यूरोप से लौटे। दोनों विदेश गए, दोनों ने वहाँ से एक सीख लाई। दोनों की सीख में क्या समान था? (उत्तर — दोनों ने अपने देश के आत्मसम्मान को केंद्र में रखा।)