प्र1.
आपके विद्यालय में रोचक पुस्तकों का भंडार है परंतु आपके ‘दृष्टिबाधित’ सहपाठी स्वयं पढ़कर इनका आनंद नहीं उठा पाते हैं। प्रधानाध्यापक को ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने के संदर्भ में पत्र लिखिए।
उत्तर
यह औपचारिक (कार्यालयी) पत्र है। इसमें चार बातें अवश्य होनी चाहिए — (1) समस्या का स्पष्ट कथन, (2) माँग, (3) कारण/लाभ, और (4) व्यावहारिक सुझाव कि यह कैसे संभव है। नीचे पूरा नमूना पत्र दिया गया है।
नमूना उत्तर:
सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय,
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
विषय — विद्यालय पुस्तकालय के लिए ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं कक्षा नौ ‘अ’ का विद्यार्थी हूँ और विद्यालय की पुस्तकालय-समिति का सदस्य भी हूँ। हमारे पुस्तकालय में कहानी, जीवनी, विज्ञान और खेल — सभी विषयों की रोचक पुस्तकों का अच्छा भंडार है, जिसका लाभ हम सब प्रतिदिन उठाते हैं।
किंतु हमारी कक्षा में तीन दृष्टिबाधित सहपाठी हैं। वे कक्षा में सबसे अधिक ध्यान से सुनते हैं और उनके प्रश्न भी सबसे अच्छे होते हैं, पर पुस्तकालय की एक भी पुस्तक वे स्वयं पढ़कर नहीं पढ़ पाते। उन्हें हर बार किसी साथी की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इससे उनका आत्मविश्वास घटता है और पढ़ने का वह आनंद, जो अकेले पढ़ने में है, उन्हें कभी नहीं मिल पाता।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि विद्यालय पुस्तकालय के लिए ब्रेल लिपि में कुछ पुस्तकें मँगवाने की कृपा करें। साथ ही यदि संभव हो तो कुछ श्रव्य (ऑडियो) पुस्तकें तथा एक ‘स्क्रीन रीडर’ युक्त संगणक भी उपलब्ध करा दिया जाए। हमने पता किया है कि राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान (देहरादून) तथा कुछ स्वयंसेवी संस्थाएँ विद्यालयों को ब्रेल पुस्तकें उपलब्ध कराती हैं, और ‘सुगम्य पुस्तकालय’ जैसी ऑनलाइन सेवाएँ निःशुल्क हैं।
हम विद्यार्थी भी इसमें सहयोग देना चाहते हैं। हमारी कक्षा ने निश्चय किया है कि वार्षिकोत्सव में एक ‘पुस्तक-दान स्टॉल’ लगाकर जो राशि एकत्र होगी, वह इसी कार्य में लगाई जाएगी। इसके अतिरिक्त हम स्वेच्छा से पाठ्यपुस्तकों के अंश रिकॉर्ड करके श्रव्य-रूप में तैयार करने को भी तत्पर हैं।
आशा है, आप हमारी इस प्रार्थना पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे। इससे हमारे सहपाठियों को न केवल पुस्तकें मिलेंगी, बल्कि यह भरोसा भी मिलेगा कि यह विद्यालय सबका है।
सधन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य
अ.ब.स.
कक्षा — नौ ‘अ’, अनुक्रमांक — 17
दिनांक — 12 अगस्त 20××
सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय,
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
विषय — विद्यालय पुस्तकालय के लिए ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं कक्षा नौ ‘अ’ का विद्यार्थी हूँ और विद्यालय की पुस्तकालय-समिति का सदस्य भी हूँ। हमारे पुस्तकालय में कहानी, जीवनी, विज्ञान और खेल — सभी विषयों की रोचक पुस्तकों का अच्छा भंडार है, जिसका लाभ हम सब प्रतिदिन उठाते हैं।
किंतु हमारी कक्षा में तीन दृष्टिबाधित सहपाठी हैं। वे कक्षा में सबसे अधिक ध्यान से सुनते हैं और उनके प्रश्न भी सबसे अच्छे होते हैं, पर पुस्तकालय की एक भी पुस्तक वे स्वयं पढ़कर नहीं पढ़ पाते। उन्हें हर बार किसी साथी की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इससे उनका आत्मविश्वास घटता है और पढ़ने का वह आनंद, जो अकेले पढ़ने में है, उन्हें कभी नहीं मिल पाता।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि विद्यालय पुस्तकालय के लिए ब्रेल लिपि में कुछ पुस्तकें मँगवाने की कृपा करें। साथ ही यदि संभव हो तो कुछ श्रव्य (ऑडियो) पुस्तकें तथा एक ‘स्क्रीन रीडर’ युक्त संगणक भी उपलब्ध करा दिया जाए। हमने पता किया है कि राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान (देहरादून) तथा कुछ स्वयंसेवी संस्थाएँ विद्यालयों को ब्रेल पुस्तकें उपलब्ध कराती हैं, और ‘सुगम्य पुस्तकालय’ जैसी ऑनलाइन सेवाएँ निःशुल्क हैं।
हम विद्यार्थी भी इसमें सहयोग देना चाहते हैं। हमारी कक्षा ने निश्चय किया है कि वार्षिकोत्सव में एक ‘पुस्तक-दान स्टॉल’ लगाकर जो राशि एकत्र होगी, वह इसी कार्य में लगाई जाएगी। इसके अतिरिक्त हम स्वेच्छा से पाठ्यपुस्तकों के अंश रिकॉर्ड करके श्रव्य-रूप में तैयार करने को भी तत्पर हैं।
आशा है, आप हमारी इस प्रार्थना पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे। इससे हमारे सहपाठियों को न केवल पुस्तकें मिलेंगी, बल्कि यह भरोसा भी मिलेगा कि यह विद्यालय सबका है।
सधन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य
अ.ब.स.
कक्षा — नौ ‘अ’, अनुक्रमांक — 17
दिनांक — 12 अगस्त 20××
इस पत्र की तीन खूबियाँ, जिन्हें आप अपने पत्र में भी रखिए:
- दया नहीं, अधिकार की भाषा। पत्र में यह नहीं लिखा कि ‘बेचारे बच्चों पर तरस खाइए’, बल्कि यह लिखा कि उन्हें भी वही आनंद मिलना चाहिए जो सबको मिलता है। यही संविधान की समता का भाव है।
- माँग के साथ समाधान। केवल माँगना आसान है; पत्र में स्रोत भी बताए गए और विद्यार्थियों का अपना योगदान भी।
- ठोस विवरण। ‘कुछ बच्चे हैं’ नहीं — ‘तीन सहपाठी हैं’। संख्या और उदाहरण पत्र को विश्वसनीय बनाते हैं।
Did you know? ब्रेल लिपि का आविष्कार फ्रांस के लुई ब्रेल ने सन् 1824 में, केवल पंद्रह वर्ष की आयु में किया था। इसमें छह उभरे हुए बिंदुओं (3 पंक्ति × 2 स्तंभ) के अलग-अलग संयोजन से अक्षर बनते हैं। भारत में हिंदी सहित अनेक भारतीय भाषाओं के लिए भारती ब्रेल का प्रयोग होता है।