गंगा अध्याय 8 पद के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-06

इस अध्याय के बारे में

रचनाकार — रैदास नाम से विख्यात संत रविदास का जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ। पुस्तक के अनुसार उनका जीवन-काल 15वीं शताब्दी (सन् 1388–1518) माना जाता है। वे संत कवियों में गिने जाते हैं। उन्होंने बाह्य आडंबरों का खंडन कर मन की शुद्धता और आंतरिक भक्ति को ही सच्चा धर्म माना है। उनकी रचनाएँ रैदास बानी में संकलित हैं और उनकी अनेक भक्ति-रचनाएँ आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में भी शामिल हैं। भाषा — रैदास ने अपनी काव्य-रचनाओं में सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फ़ारसी के शब्दों का भी मिश्रण है। संत कवियों की ऐसी मिली-जुली भाषा को सधुक्कड़ी कहा जाता है। यही कारण है कि पदों में ‘जाकी’, ‘बरै’, ‘राती’, ‘तोरौ’, ‘जोरौ’, ‘कवन’, ‘अंदेसा’, ‘भरोसां’ जैसे रूप एक साथ मिलते हैं। उनकी रचनाएँ आज भी समानता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देती हैं। पहला पद — कथ्य — पद क

  1. पद (1)
  2. पद (2)
  3. मेरे उत्तर मेरे तर्क
  4. अर्थ और भाव
  5. मेरी समझ मेरे विचार
  6. कविता का सौंदर्य
  7. कविता की कुछ अन्य विशेषताएँ
  8. विषयों से संवाद
  9. व्याकरण की बात
  10. सृजन
  11. झरोखे से
  12. खोजबीन
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