यह करके दिखाने वाली गतिविधि है। नीचे प्रस्तुति की पूरी योजना दी गई है, जिसे आप ज्यों-का-त्यों अपना सकते हैं।
अच्छी प्रस्तुति में क्या-क्या होना चाहिए —
- टेक की पहचान — ‘अब कैसे छूटै राम रट लागी’ पहले पद की टेक है। हर अंतरे के बाद इसे पूरा समूह मिलकर दोहराएगा। यही पद-गायन की सबसे पहली शर्त है।
- ठहराव सही जगह — हर पंक्ति दो चरणों में बँटी है; ठहराव ठीक बीच में लीजिए — “प्रभु जी तुम चंदन हम पानी | जाकी अंग-अंग बास समानी।”
- तुक पर ज़ोर — पानी–समानी, मोरा–चकोरा, बाती–राती, धागा–सुहागा, दासा–रैदासा। चरणांत का शब्द ज़रा खींचकर गाइए, इससे लय अपने आप बैठ जाएगी।
- भाव के अनुसार स्वर — पहला पद प्रेम और समर्पण का है — कोमल, धीमी लय में। दूसरा पद घोषणा का है — दृढ़, थोड़ी ऊँची और स्पष्ट आवाज़ में।
- वाद्य — हारमोनियम, ढोलक या मंजीरा; कुछ न हो तो केवल ताली से भी ताल दी जा सकती है — संत काव्य इसी तरह गाया जाता रहा है।
- उच्चारण — ‘छूटै’, ‘बरै’, ‘तोरौ’, ‘भरोसां’ — इनका उच्चारण ठीक कीजिए, क्योंकि ब्रज के इन रूपों में ही पद की मिठास है।
नमूना प्रस्तुति-योजना (10 विद्यार्थियों का समूह, लगभग 5 मिनट):
| क्रम | कौन | क्या | कैसे |
|---|---|---|---|
| 1 | सूत्रधार (1 विद्यार्थी) | दो वाक्य की भूमिका | “हम काशी के संत रैदास के दो पद प्रस्तुत कर रहे हैं। पहले पद में भक्त और आराध्य के अटूट नाते के पाँच चित्र हैं।” |
| 2 | पूरा समूह | टेक — “अब कैसे छूटै राम रट लागी।” | धीमे से शुरू करके दोहराएँ; ताली की एक सम-ताल। |
| 3 | समूह ‘क’ (3 विद्यार्थी) | चंदन-पानी और घन-मोर वाली पंक्तियाँ | कोमल स्वर; ‘अंग-अंग’ पर हल्का ज़ोर। |
| 4 | पूरा समूह | टेक दोहराएँ | — |
| 5 | समूह ‘ख’ (3 विद्यार्थी) | दीपक-बाती और मोती-धागा वाली पंक्तियाँ | ‘दिन राती’ को खींचकर गाएँ। |
| 6 | पूरा समूह | अंतिम पंक्ति — “प्रभु जी तुम स्वामी, हम दासा, ऐसी भगति करै रैदासा।” | सब एक साथ, स्वर धीरे-धीरे धीमा करते हुए। |
| 7 | समूह ‘ग’ (3 विद्यार्थी) | दूसरा पद — सस्वर पाठ (गायन नहीं) | दृढ़, स्पष्ट आवाज़; ‘मैं नहिं तोरौ’ पर सबसे अधिक बल। |
| 8 | सूत्रधार | समापन | “मन क्रम वचन कहै रैदासा — यानी मन, कर्म और वचन तीनों से यही बात। धन्यवाद।” |