गंगा अध्याय 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-06

इस अध्याय के बारे में

रचनाकार — गोस्वामी तुलसीदास का जन्म आज के उत्तर प्रदेश में हुआ था। पुस्तक के अनुसार उनका जीवन-काल 16वीं–17वीं शताब्दी (सन् 1532–1623) के मध्य माना गया है। रामचरितमानस उनका प्रसिद्ध महाकाव्य है, जो उनकी अनन्य रामभक्ति और सृजनात्मक कौशल का मनोरम उदाहरण है। उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं — कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली, विनयपत्रिका और हनुमान बाहुक । उनकी रचनाओं में राम मानवीय मर्यादाओं और आदर्शों के प्रतीक हैं, जिनके माध्यम से उन्होंने नीति, स्नेह, शील, विनय और त्याग जैसे मूल्यों को प्रतिष्ठित किया। मानव-प्रकृति, लोकजीवन और जीवन-जगत संबंधी गहरी अंतर्दृष्टि उनके काव्य की पहचान है। काशी में उनका देहावसान हुआ। भाषा — तुलसीदास संस्कृत के श्रेष्ठ ज्ञाता थे और अवधी तथा ब्रज दोनों भाषाओं पर उनका समान अधिकार था। उन्होंने रामचरितमानस की रचना अवधी में की और विनयपत्रिका तथा कवितावली की रचना ब्रज

  1. चौपाई 1–8 और दोहा 1
  2. चौपाई 9–16 और दोहा 2
  3. चौपाई 17–24 और दोहा 3
  4. मेरे उत्तर मेरे तर्क
  5. मेरी समझ मेरे विचार
  6. मेरी कल्पना मेरे अनुमान
  7. कविता का सौंदर्य
  8. भाव-पहचान एवं विश्लेषण
  9. काव्य-पंक्ति और भाव
  10. विषयों से संवाद
  11. सृजन
  12. व्याकरण की बात
  13. बहुभाषिकता
  14. लोक में भाषा
  15. गद्य-रूप
  16. गतिविधियाँ
  17. मेरी पहेली
  18. भाषा संगम
  19. खोजबीन
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