गंगा अध्याय 10 भारति, जय, विजयकरे! के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-06

इस अध्याय के बारे में

रचनाकार — सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ। वे मूलतः गढ़ाकोला (उन्नाव), उत्तर प्रदेश के निवासी थे। उनकी औपचारिक शिक्षा नौवीं तक महिषादल में ही हुई और आगे का सारा ज्ञान उन्होंने स्वाध्याय से अर्जित किया — संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी तीनों भाषाएँ उन्होंने स्वयं पढ़कर सीखीं। यही स्वाध्याय इस कविता की संस्कृतनिष्ठ शब्दावली में साफ़ दिखाई देता है। उनका निधन सन् 1961 में हुआ। रचना-संसार — निराला की प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं — अनामिका , परिमल , गीतिका , कुकुरमुत्ता और नए पत्ते । उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध लेखन में भी उनकी ख्याति अविस्मरणीय है। निराला रचनावली के आठ खंडों में उनका संपूर्ण साहित्य प्रकाशित है। उनकी रचनाओं में दार्शनिकता, विद्रोह, क्रांति, प्रेम की तरलता और प्रकृति का विराट तथा उदात्त चित्र उपस्थित है। छायावादी रचनाकारों में सबसे पहले मुक

  1. कविता
  2. मेरे उत्तर मेरे तर्क
  3. अर्थ और भाव
  4. मेरी समझ मेरे विचार
  5. कविता का सौंदर्य
  6. विषयों से संवाद
  7. विविध रंग भारत के
  8. सृजन
  9. व्याकरण की बात
  10. मातृभाषा और भाव
  11. समास
  12. अलंकार
  13. गतिविधियाँ
  14. भाषा संगम
  15. झरोखे से
  16. खोजबीन
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