पहले यह देख लीजिए कि निराला ने क्या-क्या रखा था — ज्ञान (‘प्राण प्रणव ओंकार’), कृषि (‘कनक-शस्य’), प्रकृति (‘तरु-तृण-वन-लता’, ‘गंगा’, ‘हिम-तुषार’) और अनेक स्वर (‘शतमुख-शतरव-मुखरे’)। ये आज भी सच हैं, इसलिए इन्हें हटाना नहीं है — इनमें जोड़ना है। आज का भारत वह भी है जो 1947 के बाद बना।
अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए —
- कम-से-कम पाँच-छह क्षेत्र चुने जाएँ, और हर एक के साथ एक ठोस उदाहरण हो — केवल ‘भारत महान है’ जैसा वाक्य नहीं।
- विशेषताएँ और विविधताएँ — दोनों आएँ, क्योंकि प्रश्न दोनों माँग रहा है।
- उपलब्धियों के साथ-साथ मूल्य भी आएँ — लोकतंत्र, समानता, सहअस्तित्व।
- अंत में यह भी कहा जाए कि किन चुनौतियों को नहीं छिपाना चाहिए — ईमानदार प्रस्तुति ही अच्छी प्रस्तुति है।
नमूना उत्तर:
यदि मुझे आज भारत को नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले, तो मैं उसे ‘पुरानी जड़ों वाला नया वृक्ष’ कहकर प्रस्तुत करूँगा — जड़ें वही, शाखाएँ नई। मैं इन विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करूँगा —
| क्षेत्र | क्या सम्मिलित करूँगा | क्यों |
|---|---|---|
| लोकतंत्र | संविधान, हर पाँच वर्ष में होने वाला विशाल चुनाव, वयस्क मताधिकार | भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। करोड़ों लोगों का शांतिपूर्वक अपनी सरकार चुनना अपने आप में एक उपलब्धि है। |
| विज्ञान और अंतरिक्ष | चंद्रयान और मंगलयान जैसे अभियान, ISRO, टीका-निर्माण की क्षमता | ‘प्राण प्रणव ओंकार’ वाली ज्ञान-परंपरा का आज का रूप यही है — जिज्ञासा वही है, उपकरण नए हैं। |
| डिजिटल भारत | यूपीआई से होने वाला डिजिटल भुगतान, आधार, ऑनलाइन शिक्षा | छोटे-से गाँव की दुकान पर भी क्यूआर कोड दिखना बताता है कि तकनीक कुछ लोगों तक सीमित नहीं रही। |
| भाषाई विविधता | संविधान की आठवीं अनुसूची की 22 भाषाएँ, सैकड़ों बोलियाँ, अनेक लिपियाँ | यही ‘शतमुख-शतरव-मुखरे!’ का आज का प्रमाण है। मैं एक ही वाक्य को कई भाषाओं में लिखकर दिखाऊँगा — जैसे पुस्तक ‘भाषा संगम’ में ‘शस्य’ के लिए करती है। |
| पर्व और कला | होली, ईद, क्रिसमस, बैसाखी, ओणम, बिहू, पोंगल, छठ; भरतनाट्यम से लेकर बिहू नृत्य तक; मधुबनी, वारली, पट्टचित्र | विविधता को गिनाना नहीं, एक साथ दिखाना चाहिए — तभी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना सामने आती है। |
| कृषि और खाद्य-सुरक्षा | हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, मोटे अनाज (श्री अन्न/मिलेट्स) की वापसी | निराला का ‘कनक-शस्य’ आज भी जीवित है — अंतर यह है कि अब भारत अपने लिए अन्न स्वयं उगाता है। |
| प्रकृति और जैव विविधता | हिमालय से सुंदरवन तक, बाघ और गंगा डॉल्फ़िन का संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा | आज प्रकृति केवल शोभा नहीं, ज़िम्मेदारी भी है — इसलिए मैं संरक्षण के प्रयास भी दिखाऊँगा। |
| महिलाएँ और युवा | खेल, विज्ञान, सेना और पंचायत में महिलाओं की भागीदारी; विश्व की सबसे युवा आबादियों में से एक | निराला की कविता में भारत स्त्री-रूप में है, पर उसमें स्त्रियाँ नहीं हैं। आज की प्रस्तुति में वे अवश्य होनी चाहिए। |
| ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का भाव | आपदा में दूसरे देशों को सहायता, योग का विश्व-प्रसार, शांति-सेनाओं में योगदान | कविता का शब्द ‘उदार’ (दानशील) आज भी भारत की सबसे अच्छी पहचान है। |
और मैं यह भी सम्मिलित करूँगा — मैं भारत को केवल सुंदर बनाकर नहीं दिखाऊँगा। मैं उसकी चुनौतियाँ भी रखूँगा — प्रदूषित होती नदियाँ, कटते जंगल, असमानता और बेरोज़गारी — क्योंकि जो देश अपनी कमियाँ स्वीकार कर सकता है, वही उन्हें सुधार भी सकता है। सच्चा देशप्रेम आँख मूँदकर प्रशंसा करना नहीं, आँख खोलकर सुधार करना है।